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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ।। पोस्ट३२३, बालकाण्ड दोहा ६४, दक्ष यज्ञ विध्वंस।
सती मरनु सुनि संभुं गण लगे करन मख खीस।
जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।
भावार्थ;- जब दक्ष यज्ञ में सती ने शरीर का त्याग किया तब - सती का मरण सुनकर शिवजी के गण यज्ञ विध्वंस करने लगे। यज्ञ को विध्वंस होते देखकर मुनीश्वर भृगु जी ने उस यज्ञ की रक्षा की।
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वीरभद्र - विनाश और उग्रता के देवता, भगवान शिव का उग्र स्वरूप!
वीरभद्र, शिव के एक बहादुर गण थे और प्रथम अवतार थे जिन्होने शिव के आदेश पर दक्ष प्रजापति का सर धड़ से अलग कर दिया था। देवसंहिता और स्कंद पुराण के अनुसार शिव ने अपनी जटा से 'वीरभद्र' नामक गण उत्पन्न किया था।
चित्र - वीरभद्र और भद्रकाली द्वारा दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस
हर हर महादेव 🚩