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युवाओं में खिताबी छक्का लगाने का मद्दा भारतीय टीम फाइनल में रविवार को कंगारू से भिड़ेगी

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हंसी और हॉरर से भरी फिल्म 'बूओ मैं दरगी, 😉😱 का आधिकारिक ट्रेलर 🤙 कल @7PM रिलीज हो रहा है✔️

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ज्योतिष को बदनाम करने के लिए ऐसे आचार्य टीवी पर बैठ जाते है जिनको *पहर* का ज्ञान भी नहीं है दोपहर किसको कहते हैं? 👉टीवी पर बैठकर प्रेम प्रसंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

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रवीना की बेटी राशा के निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखने की खबरें हैं। ऐसे में रवीना ने राशा को सलाह देने के बारे में कहा, "मुझे लगता है कि जब आप अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं तो हर दिन आपको नया अनुभव मिलता है।" अभिनेत्री का मानना है कि कभी-कभी बच्चों को गिरने, उठने और फिर से चलने देना चाहिए, इससे वे मजबूत होंगे और पहचान पाएंगे कि वे क्या करने में सक्षम हैं।

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रवीना टंडन ने इन दिनों अपनी वेब सीरीज 'कर्मा कॉलिंग' को लेकर चर्चा में बनीं हुई है। जो हाल ही में डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई है। दर्शक इसे बेहद पसंद कर रहे हैं। ऐसे में एक्ट्रेस भी काफी खुश हैं। इसी दौरान अपनी बेटी के बॉलीवुड डेब्यू के बारे में साझा करते हुए, “मुझे लगता है कि जब आप अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहे होते हैं तो हर दिन और हर चीज आपके लिए एक नया अनुभव होता है।

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आज से कुछ साल पहले जब हमारे पूर्वज गांव में रहा करते थे ,उस वक्त न फ़ोन था ना तो wifi ,ना tv थीं ना सिनेमा ,बस था तो चारो तरफ सुकून और शांति ।
सूरज उगते ही काम पर जाना फिर सूरज ढलने पर लौट आना। सब कुछ बहुत प्यारा था , न प्रदुषण और न ही तेज धूप ,सुबह होती तो शीतल हवा का झोंका होता औऱ शाम होती तो चूल्हे की रोटियां होती ।
कुछ साल और बीते फिर लोग गांव से शहर आने लगे , गांव मे चौपाल लगा करती थीं, एक बरगद का पेड़ था जिसके नीचे सब बैठे बातें किया करते थे ,डाकिया बाबू हुआ करते थे जिनको सबका पता मालूम होता था , गर्मी के दिनों में सब शहर से गाँव छुट्टियां मनाने जाया करते थे ,अविष्कार हुआ टेलीफोन का ,मानो कोई जादू हो गाया हो और आज का समय हैं हमने अपने जीने के लये पेड़ों का काट दिया , उस जमीन पर खूबसूरत सा घर बनाया , डाकिया बाबू अब गांव नहीं आते क्योंकि हमने चिट्ठी लिखना बंद कर दिया अब मोबाइल का ज़माना है।
बाहर जाने के लये अब सायकिल नही बल्कि बाइक और कार है , अब गर्मी की छुट्टियां गांव में नहीं शहरों में हुआ करती है , अब गर्मी में वो शीतलता कहाँ ।। आज वो बाग़ खाली हो गए झूलों के बिना, वो चबूतरा सुनसान पड़ा है , वो चिड़ियों की चहचहाहट गायब हो गयी ।
आने वाले सालों बाद हमारे पास सब कुछ होगा , मसलन सारी सुख सुविधा होंगी , लेकिन नही होगा तो बस वो ऑक्सीजन क्योंकि तब तक सारे पेड़ काट दिए जा चुके होंगे , हरियाली तो बस गमलों में ही मिलेगी ।

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