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अब बच्चे भले अपना समय कार्टून देखने मे बिताते हैं लेकिन बीस साल पहले के बच्चों के लिए कार्टून कॉमिक्स हुआ करता था ।मोबाइल पर कार्टून देखने का आनंद तो है लेकिन आंख खराब होने का खतरा , मोबाइल का लत लगने का खतरा बना रहता है । कॉमिक्स पढ़ना मतलब किताब पढ़ना , यहां तो फायदे ही फायदे थे । किताब पढ़ने का आदत बन गया था । कुछ बच्चों को कॉमिक्स नही मिलता था तो पढ़ने की लत ने उन्हें साहित्य की तरफ भी मोड़ दिया था ।
तब कॉमिक्स में भी आज की फिल्मों की तरह खून खराबा मार धाड़ हुआ करता था जिसके लिए सबसे ज्यादा डोगा फेमस था । जैसे ही डोगा की नई कॉमिक्स आती नस नस में चिंगारियां दौड़ने लगती । मार धाड़ पसन्द करने वाले बच्चों में डोगा का अलग ही क्रेज था । चमत्कारी शक्तियों में विश्वास करने वाले बच्चों के लिए नागराज तो वैज्ञानिक बुद्धि वाले बच्चों के लिए सुपर कमांडो ध्रुव का अलग ही जुनून था । कभी मिले तो कॉमिक्स पढ़ कर देखियेगा ।