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उदित नारायण एक बेहतरीन बॉलीवुड गायक हैं जिन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पांच फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं। 2009 में, उदित नारायण को उनकी गायकी के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उदित नारायण अपने बेटे आदित्य नारायण और अपनी पत्नी और बहू के साथ खूबसूरत सेल्फी लेते हुए इवेंट के दौरान दिखे
जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से अंतिम युद्ध लड़ते हुए घायल हो गई और अंग्रेज उनका पीछा कर रहे थे, तब एक अंग्रेज ने गोली चलाई, जो रानी लक्ष्मीबाई की बाई जंघा में लगी।
इस समय रानी के दोनों हाथों में तलवारें थीं, लेकिन गोली लगने के बाद जब सम्भलना कठिन हुआ, तो उन्होंने बाएं हाथ की तलवार फेंक दी और लगाम पकड़ी।
गोली चलाने वाले अंग्रेज को रानी ने दाएं हाथ की तलवार से समाप्त किया। इसी समय एक और अंग्रेज ने तलवार से रानी लक्ष्मीबाई के सिर पर प्रहार किया, जिससे रानी के सिर का एक हिस्सा कट गया और दाई आंख बाहर आ गई।
ऐसी परिस्थिति में भी रानी ने उस अंग्रेज का कंधा काट दिया। तब तक रानी के वीर रघुदास भी आ पहुंचे। वीर साथी ने उस अंग्रेज के 2-2 टुकड़े कर दिए।
फिर रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुई और उनके अंतिम संस्कार के समय वहां वीर रघुदास , रघुनाथ, देशमुख व बालक दामोदरराव थे।
रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम समय का ये वर्णन वृंदावनलाल वर्मा ने किया है। वृंदावनलाल वर्मा के परदादा झांसी के दीवान आनंदराय थे, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का साथ देते हुए वीरगति पाई। इस अंतिम समय के बारे में वृंदावनलाल को उनकी परदादी ने बताया, उस समय वृंदावनलाल की आयु 10 वर्ष थी।
(फोटो झांसी दुर्ग का है जो आज भी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का वीरान गवाह है)
#history_इतिहास
पापा की परी है ये मेरा अब्दुल ऐसा नहीं है बोलके प्यार में गई थी मुस्लिम देशों के बाज़ारो में 13 बार बेचा गया आख़िरी में मौत हुई एक विशेष तरह के खेल से ।इस खेल में शेख़ अपने अपने ख़ूँख़ार कुत्तो को लड़की को नंगा करके उसके पीछे छोड़ देते है जिसका कुत्ता पहेले काट लेता वो शेख़ जीत जाता शेख़ों के सामने कुत्तो ने नोच के खाया अच्छे घर की पापा की परी थी ये अपनी टीम ने समझाया भी था पर इनका अब्दुल ऐसा नहीं था