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भगवान के श्रीचरणों में विश्वामित्र, अगस्त्य जैसे ऋषियों ने अस्त्र रख दिये।
स्वयं मर्यादापुरुषोत्तम शिव, देवी, सूर्य कि उपासना किये। किष्किंधा से लेकर मलय, जावा तक कि सम्पूर्ण वनवासी जातियों, भील आदि उनके साथ युद्ध किया।
इस प्रलयकारी युद्ध में रावण को मारकर लंका पर विजय प्राप्त किये।
उसी लंका को ईश्वर विभीषण को सौंप देते हैं। स्वयं उसी गेरुआ वस्त्र में अयोध्या लौट आते हैं।
उनकी स्थापित की गई यह मर्यादा समस्त जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा है। हम कर्म करें, संघर्ष करें कुछ भी प्राप्त करने के लिये अपना सब कुछ अर्पित कर दें। लेकिन जो कुछ भी प्राप्त हो, उसके प्रति मोह, उसको अपना ही समझने की भूल ही समस्या हैं।
वह सब कुछ जो प्राप्त है। वह इस जगत का है, उसी को सौंप देना है।
जैसा कि मनुष्यों के भगवान बुद्ध ने कहा था।
सब दुख ही है।
पाने का दुख, फिर जो मिला है उसको बनाये रखने का दुख। अंतः उसके खो जाने का दुख। सब दुख ही दुख है।
मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम यही शिक्षा देते है। जो मिला है, वह अपना है ही नही। तो पाने, बनाये रखने, खोने का कोई दुख ही नही हैं।।

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गुजरात में कलशयात्रा का टूटा रिकॉर्ड।

प्राण प्रतिष्ठा से पहले 10 लाख लोग कलश लेकर अहमदबाद की सड़कों पर उतरे।

मूर्तिकार अरुण योगीराज का बड़ा बयान।

"अंदर जाते ही भगवान बदल गए।"

"प्राण प्रतिष्ठा के बाद मैंने देखा कि रामलला बदल गए, मैंने कहा ये मेरा काम नहीं है।"

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*#फिर भी यहाँ हमारे लोग सेक्युलर कीड़े और स्वार्थी लोग वोट कांग्रेस और विपछ को देते है

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Prime Minister Shri Narendra Modi's Public Programmes in Tamil Nadu and Maharashtra on 10 April 2024.

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