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जागो हिन्दुओ 🙏🚩🙏,,

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शिखा जिसकी धरोहर है तिलक से जो अलंकृत है,
चमकता भाल दिनकर सा जो हर भय से वंचित है।
जो शम्भू सा विनाशी है जो विष्णु सा हृदय कोमल,
है जिसमें तेज ब्रह्मा का वो ब्राह्मण सर्व वन्दित है।।

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18 जून 1858 को ग्वालियर में कोटा की सराय में रानी लक्ष्मीबाई ने आखिरी युद्ध लड़ा। अंग्रेज़ों को तलवार से पछाड़ा, गोली खाई, पर आत्मसमर्पण नहीं किया। मरते वक्त भी घोड़े पर सवार थीं, खुद को आग में भस्म कर वीरगति ली।
#ranilakshmibai

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1976 ई. में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की अस्थियां लेते हुए शहीद-ए-आजम भगतसिंह के भाई कुलतार सिंह शिव विनायक मिश्र के पोते सतीश मिश्र के मुताबिक आजाद के अंतिम संस्कार में कमला नेहरू आई थीं और उनको पता था कि शिव विनायक मिश्र चंद्रशेखर आजाद के करीबी हैं,

इसलिए उनको भी बुलवाया गया। इलाहाबाद में रसूलाबाद घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। बाद में शिव विनायक मिश्र बची हुई अस्थियां लेकर बनारस आए। सरदार भगत सिंह के छोटे भाई कुलतार सिंह 1974 में कांग्रेस के टिकट से सहारनपुर से एमएलए चुने गए थे।

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ये घटना उस समय की है जब अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति थे उस समय उनका पूरा परिवार उनसे मिलने दिल्ली आया। वे कुल 52 लोग थे, जिनमें उनके 90 साल के बड़े भाई से लेकर उनकी डेढ़ साल की परपोती भी शामिल थी
स्टेशन से सभी को राष्ट्रपति भवन लाया गया, जहां वह 8 दिन तक भवन में रुके। उनके आने-जाने से लेकर खाने-पीने तक, यहां तक की एक प्याली चाय का खर्चा भी कलाम ने अपनी जेब से दिया।
इतना ही नहीं कलाम ने अपने अधिकारियों का भी साफ तौर पर निर्देश दिया था कि इन मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी। 🇮🇳🏡
रिश्तेदारों के खाने-पीने के सारे खर्च का ब्यौरा अलग से रखा गया। और जब वह सभी वापस गए तब कलाम ने अपने निजी खाते से 3,52,000 रुपये का चेक काट कर राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा। ऐसे थे हमारे देश के अनमोल हीरे एपीजे अब्दुल कलाम।💵💵❣️

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Today in 1989, A Lion was Born! Shaurya Chakra Major Anuj Sood He was martyred on May 2, 2020, during a counter-terr’orism operation in Handwara, Jammu and Kashmir

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ये हैं परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव जिन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में 15 गोलियाँ खाने के बावजूद दुश्मनों को हराकर तिरंगा लहराया था। योगेंद्र सिंह यादव की शादी की मेहंदी फीकी भी नहीं पड़ी थी कि शादी के 15 दिन बाद कारगिल से बुलावा आ गया।

10 मई, 1980 को जन्मे योगेंद्र यादव महज 16 साल और 5 महीने की छोटी उम्र में सेना की 18 ग्रेनेडियर में भर्ती हो गए थे। कारगिल में दुश्मनों के हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन विजय के दौरान योगेंद्र 18वीं ग्रेनेडियर्स की घातक प्लाटून के सदस्य थे। इस प्लाटून को जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में टाइगर हिल टॉप कब्जाने का जिम्मा मिला था।

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रविंद्रनाथ अपने साथियों के साथ बंगाल की खाड़ी में हल्दिया के पास मछली पकड़ने गया था। तभी अचानक समुद्र का रुख बदल गया तेज़ तूफान उठा, लहरें बेकाबू हो गईं और देखते ही देखते नाव पलट गई। रविंद्रनाथ के 11 साथी समंदर की विशाल लहरों में बह गए।

लेकिन रविंद्रनाथ ने हार नहीं मानी।
वो तैरता रहा… तैरता रहा… ऊपर बस आसमान, नीचे अथाह पानी। घंटे बीते, दिन बीत गए।

5 दिन तक रवीन्द्रनाथ समंदर में अकेले तैरता रहा, न खाना, न पीने का पानी, सिर्फ़ ज़िंदा रहने की जिद। तैरते रहने के दौरान मैंने कुछ नहीं खाया। रुक-रुक कर बारिश हो रही थी और बड़ी-बड़ी लहरें उठ रही थीं। बारिश होने पर ही मैंने पानी पिया।

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जम्मू-कश्मीर में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए पिता के पार्थिव शरीर को देखकर एक साल की बेटी पापा..पापा बोलने लगी। इस सीन को जिसने भी देखा भावुक हो गया।
उधमपुर के माजलता में शहीद हुए अमजद खान का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद जवान का पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो उनकी एक साल की बेटी अपने पिता को आखिरी देने पहुंची। पिता के शव को देखकर मासूम बेटी पापा..पापा...पुकारती रही लेकिन अमजद खान नहीं जागे।
बेटी को पता ही नहीं था कि अब उसके पापा कभी नहीं जागेंगे। बेटी का पापा के प्रति लगाव देखकर हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ❣️🇮🇳
#indianarmy

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