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आदरणीय भरतपुर के लाल श्री भजनलाल शर्मा जी को भाजपा विधायक दल की बैठक में राजस्थान का मुख्यमंत्री मनोनीत किये जाने पर हृदय से बधाई एवं जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
मुझे विश्‍वास है कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में आपकी कुशल नीतियां व अनुभव राजस्थान की प्रगति एवं विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

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🙏 नमस्कारम🚩 जय श्री महाकाल 💐 जय श्री राम ❤️ जय श्री बालाजी🚩 सत्यमेव जयते 🙏 यह तस्वीर 💐जीतwinner💐 की और सभी सनातनियो के विश्वास, धैर्य व निरंतर प्रयास का परिणाम है।
💐शुभकामनाएं💐
योगदान में मात्रा नही,
मनसा का महत्व रखती है।

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प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' (शहरी) के लाभार्थियों से संवाद करेंगे।

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एनिमल को रिलीज हुए दो हफ्ते हो चुके हैं. तमाम बातों और बहसों के बीच 'अल्फा मेल' वाली बहस अभी तक जारी है. फिल्म ताकत और शक्ति को जिस तरीके से जस्टिफाइ-ग्लोरिफाई करती है, असल जिंदगी में तो वह कई बार संकट का कारण बनता रहा है. फिल्म अपनी बात स्थापित करने के लिए रणबीर कपूर का कैरेक्टर उदाहरण भी आदिम युग का देता है. तो क्या ये बार-बार हमें उसे कबीलाई स्थिति में फिर से ठेलने की कोशिश है, जिसमें अपनी जान बचाने का मतलब, सामने वाले को जान से मार देना रहा है... जहां जोरू (औरत) भी जमीन की तरह संपत्ति ही थी.
फिल्म में 'अल्फा मेल' वाला डॉयलॉग भी एक अजीब परिस्थिति में कहा जा रहा है. रश्मिका मंदाना, रणबीर कपूर को बचपन से भैया बोलती आ रही है, उसे राखी बांधती थी. अब दोनों बड़े हो चुके हैं. रणबीर बोर्डिंग से लौट आया है. रश्मिका की सगाई हो रही है. इसी सगाई में रणबीर अपने दोस्त (जो रश्मिका का भाई है) से रश्मिका को पसंद करने की बात करता है, क्योंकि वो उसे हॉट लगती है. अभी तो यही अपच हो रही थी, कि इतनी हिंसक फिल्म में हीरोइन का भाई इतना सॉफ्ट कैसे निकला? पहली मारकाट तो यहीं हो जानी चाहिए थी. वो खुद अपनी बहन को रणबीर के पास छोड़ने भी आता है.
रश्मिका को अकेले में कन्विंस करने के लिए ही रणबीर ने 'अल्फा मेल' वाला अपना दोयम दर्जे वाला डायलॉग मारा और कवियों को 'जलन का मारा' बोल गया. मेरी नजरों में बोल्ड और आत्मविश्वास से भरपूर लगने वाली मेरी प्रिय नायिका रश्मिका मंदाना भी कन्विंस हो जाती है कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए प्रेमी या पति के रूप में शारीरिक सौष्ठव वाले कथित अल्फा मेल की ही जरूरत है. यहां प्रेम चूक गया.
खैर, ये सब मेरा सोचना है. हर किसी का सोचना अलग-अलग हो सकता है, लेकिन कवियों-साहित्यकारों के लिए इस्तेमाल हुए दोयम दर्जे का ये संवाद मेरी समझ से परे रहा. वो कविताएं ही रही हैं, जिन्होंने दुनिया में लोगों को प्रेम सिखाया, वादे निभाना बताया. उन्होंने संकल्प का अर्थ समझाया और दया-करुणा, सामर्थ्य, इच्छा शक्ति जैसे शब्दों को जीवंत किया.
प्रथम प्रधानमंत्री रहे पंडित नेहरू के स्टडी टेबल पर एक कविता हमेशा रखी रही. कहते हैं कि अंत समय तक वह इसका मूलमंत्र की तरह जाप करते रहे थे. मूल कविता इंग्लिश में थी, जिसका हिंदी तर्जुमा उससे प्रभावित होकर कवि हरिवंश राय बच्चन ने किया था. कविता क्या थी, समझ लीजिए एक तरह से ध्येय वाक्य ही था.
वन हैं सुंदर और सघन, पर मुझको वचन निभाना है
नींद सताए इसके पहले, मुझको कोसों जाना है, मुझको कोसों जाना है.
असल में इस कविता को मूल रूप से अमेरिकन पोएट Robert Frost ने लिखा था.
The woods are lovely, dark and deep,
But I have promises to keep,
And miles to go before I sleep,
And miles to go before I sleep.
शेक्सपियर ने मर्चेंट ऑफ वेनिस में 14 पंक्तियों की सॉनेट लिखी Mercy, ये कविता दया के गुण बताती है और पूरे नाटक के दौरान लिखी गई सबसे मास्टरपीस बन जाती है. कुल मिलाकर ये दुनिया ऐसे अल्फा मेल से नहीं, पोएट्री करने वालों से ही जिंदा है.

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