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मैं चुनाव लड़ता तो यह घोषणा करता - सत्ता में आया तो।
1- मनरेगा के मजदूरों से वृक्षारोपण कराता। भारत को हरा भरा करने का अभियान चलाता।
2- 5 किलो राशन उनको मिलता जो वृक्ष लगाते। दूसरी इसका शपथपत्र लेता कि वह जीवित हैं या नही।
3- नदियों , तालाबों कि सफाई कराता।
4- सभी शहरों में जमीन क्रय पर रोक लगा देता। सरकारी आवास बनाकर दिये जाते।
5- सभी शहरों में ट्रक का प्रवेश निषिद्ध होता। उसके लिये रिंग रोड का निर्माण होता।
6- सभी शिक्षकों की नियुक्ति के लिये राष्ट्रीय परीक्षा होती। जिसका स्तर NEET, IIT जैसा होता।
7- सरकारी अस्पतालों, कॉलेजों में चिकित्सकों के वेतनमान दुगुने किये जाते।
8- आयुष्मान योजना का विस्तार किया जाता।
9- किसान बिल को फिर से लाते। बागवानी के लिये सब्सडी दी जाती।
10 - अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक जैसे शब्द सविंधान से निकालकर सभी नागरिकों के लिये एक समान सुविधा, कानून होते।।
आगे जारी है--------।
पिछली पोस्ट पर आये कमेंट से यह विचार आया है।
मैं यह कह रहा था।
सारे नीलगाय, साँढ़, भैंसा सब शहर में लाकर छोड़ दिया जाय।
जो गमले में बरगद, पीपल, ताड़, चमेली, अशोक लगाकर सब बैठें है। तब पता चले कि छुट्टा जानवर क्या होंते हैं।
शहर का पाप गाँव क्यों भुगते।
जब ढाई किलो का तोंद लेकर प्रोफेसर साहब लोग साँढ़, नीलगाय दौड़ायेंगे तो उसका आनंद अलग ही होगा।