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भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, दुनिया में सबसे व्यस्त विदेश मंत्री है। उन्हें अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट से भी व्यस्त कहा जाता है।
इन सब व्यस्तताओं के बीच उन्होंने पुस्तक( why bharat matters) भी लिख दिया। डिप्लोमेसी के एक्सपर्ट उस पर समीक्षा कर रहे है।
किसी किसी के अंदर विशिष्ट क्षमता होती है। समस्त व्यस्तताओं के बीच भी अपना passion बनाये रखते है।
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, दुनिया में सबसे व्यस्त विदेश मंत्री है। उन्हें अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट से भी व्यस्त कहा जाता है।
इन सब व्यस्तताओं के बीच उन्होंने पुस्तक( why bharat matters) भी लिख दिया। डिप्लोमेसी के एक्सपर्ट उस पर समीक्षा कर रहे है।
किसी किसी के अंदर विशिष्ट क्षमता होती है। समस्त व्यस्तताओं के बीच भी अपना passion बनाये रखते है।
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, दुनिया में सबसे व्यस्त विदेश मंत्री है। उन्हें अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट से भी व्यस्त कहा जाता है।
इन सब व्यस्तताओं के बीच उन्होंने पुस्तक( why bharat matters) भी लिख दिया। डिप्लोमेसी के एक्सपर्ट उस पर समीक्षा कर रहे है।
किसी किसी के अंदर विशिष्ट क्षमता होती है। समस्त व्यस्तताओं के बीच भी अपना passion बनाये रखते है।

गणेशजी द्रविड़ न्याय दर्शन और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान हैं। उन्होंने ही मुहूर्त निकाला है।
भारतीय परंपरा के आधार पर काशी में एक शास्त्रार्थ हो जाय। विद्वानों को आकर अपना मत रखना चाहिये। अब भी भारत में शास्त्रों के ज्ञाता हैं। नई पीढ़ी भी अपनी प्राचीन परंपरा का आनंद लेगी।
अभी तक प्राणप्रतिष्ठा के पक्ष में जो भी कहा गया है वह शास्त्रों का उद्धरण दिया गया , स्वयं गणेशजी द्रविड़ ने शास्त्रों का उद्धरण दिया है।
जबकि विरुद्ध में किसी शास्त्र के श्लोक को नहीं रखा गया है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि विरोध में जो हैं उनकी मानसिकता दूषित है।।
उन्होंने मानव सभ्यता के आरंभिक समय में ही ऐसे जीवन मूल्यों को स्थापित किया। जो धर्म के आधार बन गये।
इन सब से भी बड़ी बात है। भयानक आपदाओं, असहनीय पीडाओं में जीवन मूल्यों का सम्मान करते रहे।
वह कोई सामान्य परिस्थिति हो या युद्ध हो किसी भी परिस्थिति में जीवन मूल्यों को त्यागा नही जा सकता है।
वेहनसांग अपनी यात्रा वृतांत में लिखता है। यह विचित्र देश है। जंहा युद्ध हो रहा है, उससे थोड़ी ही दूरी पर किसान बिना भय के खेत में बैल चला रहे है। मेगनस्थीज इंडिका में लिखता है। यह ऐसा व्यवस्थित समाज है। जंहा युद्ध मे फसल को नष्ट करना अनैतिक है।
यह राम का देश है।
उनके आदर्शो कि भूमि है।
अभी कुछ क्षण ही पहले उन्हीं का एक महान राज्य के राजा के रूप में राज्याभिषेक था। और अभी वह वनवासी बन गये।
लेकिन वह केवट को गंगा उतराई देने के लिये चिंतित है। उनके चेहरे का भाव ऐसा है। जो बता रहा है इस केवट को कुछ देना चाहिये।
देने के लिये शरीर गेरुआ वस्त्र, तुलसी की माला के अतिरिक्त कुछ नही है। भार्या जनकनन्दिनी उनका वह भाव पढ़ लेती है। अंगुली से मुद्रिका निकालकर देने लगी।
केवट उनके पैरों गिरकर बिलख बिलखकर रोने लगा।
*
उनके भाई लक्ष्मण जीवन मृत्यु से लड़ रहे है। इस जंगल, पहाड़, समुद्र के किनारे चिकित्सक मिलना लगभग असंभव है। उनके परमभक्त हनुमान जी, रावण के राजवैद्य को बलात लेते आते हैं।
वह राजवैद्य फिर भी लक्ष्मण कि चिकित्सा के लिये तैयार नही है।
कोई भी ऐसी परिस्थिति में अपना धैर्य खो देगा। उनके पास एक शक्तिशाली सेना है। वह स्वंय ऐसे योद्धा जिनको पराजित नही किया जा सकता है।
लेकिन वह चिकित्सक को उनके चिकित्सक धर्म कि बात करते हैं। एक चिकित्सक के लिये राजा के प्रति निष्ठा महत्वपूर्ण है या रोगी का उपचार महत्वपूर्ण है।
यह सब कुछ उन्होंने इसलिये किया। आने वाला अंनत युग कठिन परिस्थितियों, विपदाओं मे जीवन मूल्यों, धर्म का त्याग न करें। इस सभ्यता में जो कुछ भी सुंदर, सत्य है, वह राम है।
तभी तो 500 वर्ष तक पीढ़ी दर पीढ़ी राममंदिर के लिये संघर्ष करती रही। ऐसा अनवरत संघर्ष, धैर्य मनुष्य के इतिहास में कम ही मिलता है।
राम कि शक्तिशाली भुजाओ और हिमालय से हिंदमहासागर तक फैली उनकी मर्यादा के वटवृक्ष के नीचे हम सभी अपने गुणों, अवगुणों के साथ सुरक्षित आनंदित है।।
सनातनधर्म मे गणेश,शक्ति,शिव,विष्णु, सूर्य को उस एक आदिकारण ओंकार परमब्रह्म परमेश्वर के ही पंच दिव्य स्वरुप माना गया है.
पहले इन पंच स्वरूपों मे से एक,भगवान के चतुर्भुज विष्णु स्वरुप की ही पूजा होती थी,
पश्चात् विष्णु के ही लीलावतार स्वरूपों राम व कृष्ण की पूजा भी वैष्णवो मे प्रतिष्ठित हुई,
👇👇सावधान👇👇
कुछ अज्ञानी लोगो ने मूल विष्णु स्वरूप को गौण कर के राम और कृष्ण रूप को लेकर अलग अलग रामपंथी व कृष्णपंथी संकीर्ण धाराए बना दी है.
🙏🕉️🙏
विष्णु राम व कृष्ण, इन तीनो नामों व रूपों को एक मानकर एक साथ इनका गायन करे, राम व कृष्ण को विष्णु के ही रूप मानकर भजन करो.
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,हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।
गोविंदा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा।।
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
वैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम।।
आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेहीहरणं जटायुमरणं सुग्रीवसंभाषणम् ।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावणकुम्भकर्णहननं एतद्धि रामायणम् ।🙏
वर्ल्ड ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित सुश्री Hima Das जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
#happybirthdaywishes