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भारत देश का प्राचीन नाम ""जंम्बुद्विप ""था..और तथागत गोतम बुध्द से पहले 27 बोधिसत्व ,, बुद्ध,,हो चुके थे।
मौर्य साम्राज्य कालखंड के पहले ही बौद्ध धम्म परंपराएं ...
#सम्राट_चंद्रगुप्त_मोरिया
संस्थापक मौर्य.. (खत्तिय) साम्राज्य
कार्यक्षेत्र ""पिप्पलीवन "" #बौध्द_दर्शन_परंपरा
इसा पुर्व 305 मे ""अलेक्ज़ेंडर ( सिकंदर) का जनरल ""सेलूकस निकेटर ""को युद्ध मे हराकर विजय हासिल किया था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य साम्राज्य के राज दरबार में ""ग्रीक के मेगास्थनीज राजदूत थे....
विदेशी पंडित पुरोहित ब्राह्मणों ने झुठ को सच साबित करने के लिए ""काल्पनिक चाणक्य ब्राम्हण का निर्माण किया था "" और चंद्रगुप्त मौर्य का प्रधानमंत्री बताया है जो झुठा प्रचार प्रसार हैं..... जब की असल सच्चाई उलटा हैं।
तथागत बुध्दां के महापरिनिर्वाण की अस्थियां का जब बंटवारा हो रहा था। तब पिप्पलीवन के मौर्य बुद्ध की अस्थियां प्राप्त करने हेतु आए परन्तु देर से आने के कारण
मौर्य राजवंश को राख ही मिल गई....
पिप्पलीवन के मौर्य राजाने अपने राज्य में एक बुद्ध स्तुप का निर्माण किया था ( महानिर्वाण सुत्त ) पिप्पलीवन में मोरिय सम्राट का अधिकार था।
सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य साम्राज्य मे पाली भाषा,, प्राकृत भाषा विराजमान थी ""संस्कृत भाषा का नामोनिशान नहीं था।
सम्राट चन्द्रगुप्त मोरिय और विष्णूगुप्त मोरिय ( मौर्य) दोनों
सगे भाई थें ( विष्णु गुप्त ""चपड़ नाम से भी जाने जाते थे )
सम्राट चन्द्रगुप्त के राज्य-काल में ""साक्षरता स्रोत ""
अर्थव्यवस्था,, अर्थशास्त्र के निर्माण कर्ता ""युवराज विष्णु गुप्त मोरिय थे..
1904 में आर आर शर्मा द्वारा ""अर्थशास्त्र की खोज ""प्रकाशित पुस्तक 15 किताबें 180 अध्याय और 3 भाग में
पहिला भाग --राजा परिषद सरकारी विभागों का चयन
दुसरा भाग -- सिवील और अपराधीक कानुन विभाग
तीसरा भाग -- युद्ध निती --कुटनिती
मेगास्थनीज ने अपने दरबार का दौरा किया।
जुनागढ़ रॉक शिलालेख के अनुसार ""सुदर्शन झिल "को सम्राट चंद्रगुप्त ने बनाया है।
और बद्रबाहू के साथ सम्राट चन्द्रगुप्त दक्षिण भारत चले गए और ""सवणबेलागोला"" मैसूर कर्नाटक मे उनका""परिनिर्वाण हो गया। ..नमो बुद्धाय!!