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Dr. Ravishankar Singh जी का कहना है कि जो केजरी और उनकी टीम ने भ्रष्टाचार किया है, वह बहुत सामान्य भ्रष्टाचार है। जिले से लेकर प्रदेश, देश तक फैला है।
500 रुपया हम व्यवस्था से आपको लाभ देते हैं, 250 मेरा, 250 आपका है। उन पर आरोप है कि इस तरह से केजरी एक हजार करोड़ बनाये।
भारत में जिस स्तर का भ्रष्टाचार है, यह बहुत बड़ी रकम नहीं कही जा सकती है। इतना तो जिले का अधिकारी बना लेता है।
तो मैं केजरी को भ्रष्टाचार का गम्भीर अभियुक्त नहीं मानता हूँ। इसका अपराध इससे भी बड़ा है। इसने जनमानस के साथ छल किया है। पीड़ित समाज का उपहास किया है।
देखो तुम मूर्ख हो ! मैंने तुमको मूर्ख बनाकर सिद्ध कर दिया कि कैसे हितैषी बनकर गर्दन काटी जाती है।
इसने ऐसे लोगों का रास्ता बंद कर दिया है जो सच में संवेदनशील थे, हैं। जो भ्रष्टाचार, कुशासन को स्वीकार नहीं करते हैं। केजरी और उसकी टीम ने ऐसे लोगों की विश्वसनीयता को खत्म कर दिया।
यह कपटी, धोखेबाज है। इसका अपराध भ्रष्टाचार से भी कहीं अधिक गम्भीर है।।
यदि कोई संत , दार्शनिक मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम के चरित कि भी आलोचना करता है। तो उसका उद्देश्य बहुत गहरा है।
वह चाहते हैं कि राम के प्रति आपकी श्रद्धा गहनतम से गहनतम होनी चाहिये। यदि उनके चरित पर ही रुक गये तो परमात्मा का दर्शन कैसे होगा।
उनका चरित रोमांचित, भावविव्हल कर देता है। लेकिन इससे राम का वह परमात्मा स्वरूप कहीं खो जाता है। उसी परमात्मा को आप समझ सकें कई संतो ने चरित को महत्वहीन किया है।
यदि उनके चरित पर आघात, आपकी श्रद्धा, आस्था को विचलित कर दे रहा है। तो संतो आघात ठीक है। आपकी श्रद्धा मे शुद्धता, समर्पण नही है।