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लखनऊ में दर्दनाक हादसा! 🚨 लोहिया विधि विश्वविद्यालय के स्विमिंग पूल में डूबने से इंटर के छात्र की मौत; परिवार में मचा कोहराम। 💔🌊⚠️
लखनऊ: राजधानी के आशियाना इलाके से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय परिसर में बने स्विमिंग पूल में रविवार रात नहाने गए 17 वर्षीय छात्र कुशाग्र भूषण की डूबने से मौत हो गई।
हादसे की मुख्य बातें:
पारिवारिक दुख: कुशाग्र ने इसी साल इंटर की परीक्षा दी थी। वह अपने बड़े भाई प्रणव और दोस्तों के साथ पूल गया था।
गहरा पानी बना काल: बताया जा रहा है कि नहाते वक्त कुशाग्र अचानक 14 फीट गहरे पानी की तरफ चला गया और डूबने लगा।
लाइफ गार्ड्स की कोशिश: शोर मचने पर वहां मौजूद लाइफ गार्ड्स ने कुशाग्र को बाहर निकाला और लोकबंधु अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई: इंस्पेक्टर आशियाना के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
इस घटना ने स्विमिंग पूल्स में सुरक्षा मानकों और गहरे पानी में बच्चों की निगरानी को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्विमिंग पूल्स में सुरक्षा की इस कमी पर आपकी क्या राय है? अपनी संवेदनाएं कमेंट में व्यक्त करें। 🙏 सम्भल कर रहें! 👇🗣️🚨
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देहरादून क्षेत्र से इन दिनों एक भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में दो अलग-अलग गाड़ियों पर “बेटी हुई है” लिखा नजर आ रहा है, जो समाज को बेटियों के प्रति सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दे रहा है.

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उत्तराखंड के श्रीनगर से शर्मनाक मामला सामने आया है. जहां सूखी लकड़ियां न मिलने के कारण एक 19 वर्षीय युवती का अंतिम संस्कार डीजल और पुराने टायरों की मदद से किया गया. बताया जाता है कि मृतक लड़की के परिजनों को निजी टाल संचालक द्वारा गीली लकड़ियां दे दी गई थी. जिसके चलते परिजनों को 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा. इस घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से सरकारी टाल की व्यवस्था करने की मांग की है.

जानकारी के अनुसार श्रीनगर के वार्ड संख्या 12 की रहने वाली एक युवती की मौत हो गई थी. शनिवार को परिजन अंतिम संस्कार के लिए अलकेश्वर घाट पहुंचे. लेकिन यहां परिवार को क्या पता था कि अपनी लाडली की विदाई के समय उन्हें ऐसी बेबसी झेलनी पड़ेगी. परिजनों ने एक निजी टाल से चिता के लिए लकड़ियां खरीदीं, लेकिन वे इतनी गीली और कच्ची थीं कि बार-बार कोशिश करने के बाद भी आग नहीं पकड़ पाईं.

4 घंटे का इंतज़ार और 15 लीटर डीजल जब खत्म हो गया और काफी देर तक चिता नहीं जली, तो घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं. बेबस पिता और परिजनों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें. अंततः हार मानकर बाजार से 5 लीटर डीजल मंगाया गया, लेकिन लकड़ियां फिर भी नहीं जलीं. इसके बाद 10 लीटर डीजल और मंगाया गया. साथ ही दो कट्टे पुराने टायर, ट्यूब, फटे कपड़े और गद्दों का इंतजाम किया गया.

करीब 4 घंटे के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद चिता को पूरी तरह अग्नि मिल सकी. इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधियों में रोष है. वार्ड पार्षद शुभम प्रभाकर ने नगर निगम मेयर को पत्र लिखकर घटना की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि "मुनाफाखोरी इतनी बढ़ गई है कि अब शवों की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा."

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