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IPL तुम्हारी बर्बादी लाएगा.....
#रजाकार देखो....
दस 'कश्मीर फाइल्स'
दस 'केरला स्टोरी' और
दस 'बस्तर' मिलाकर
एक रजाकार जैसी फ़िल्म बनती है.....
यह फ़िल्म नहीं... महागाथा है... हमारे पूर्वजों द्वारा लड़ी गई दर्दभरी... रक्तरंजित सच्ची कहानी है !!
रज़ाकर देखो.... अपने पूर्वजों का त्याग, बलिदान, संघर्ष और जिजीविषा देखो... आने वाली पीढ़ियों तक यह संघर्ष-त्यागगाथा पहुचाओ...
शेयर-कापी कीजिये...प्लीज़...🙏
ईसा पूर्व 322 में चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्दवंश को पराजित कर मौर्यवंश के संस्थापक भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट बने और भारत के छोटे-छोटे राज्यों को जोड़कर अखण्ड भारत का निर्माण किया मौर्यवंश ने दस पीढ़ी तक शासन किया।
मौर्यवंश के 10 महाबली महान मौर्य सम्राटों के नाम~ ☸️
.सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य
.सम्राट बिन्दुसार मौर्य
.सम्राट असोक महान मौर्य
.सम्राट कुणाल मौर्य
.सम्राट दशरथ मौर्य
.सम्राट सम्प्रति मौर्य
.सम्राट शालिसुक मौर्य
.सम्राट देववर्मन मौर्य
.सम्राट शतधन्वन मौर्य
.सम्राट बृहद्रथ मौर्य
2.मौर्य वंश का शासन 184 ई०पू० (139 वर्ष) तक रहा मौर्यवंश के अन्तिम शासक वृहद्रथ मौर्य का धोखे से वध उनके सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा किया गया एवं पुष्यमित्र द्वारा आदेशित किया गया कि जो व्यक्ति मौर्यवंशी बौद्धिक का एक सिर काट कर लायेगा उसे 100 सोने की मुद्रायें ईनाम में दी जाएंगी पुष्यमित्र शुंग द्वारा प्रताड़ित किये जाने पर मौर्यवंशी जंगलों, पहाड़ों, गुफाओं में जाकर
3.छिप गये और आर्थिक सामाजिक राजनीतिक और मानसिक रूप से पिछड़ गए और ब्रह्मणो के ब्राह्मणवाद के गुलाम हो गए
आज मौर्यवंशियो की पहचान बिखंडित होकर मौर्य शाक्य कुशवाहा सैनी गहलौत और कई नामों से पहचाना जाता हैं।
4.1827 ई० में स्वजातीय सैनी परिवार (महाराष्ट्र) में ज्योतिबाराव फुले एवं माता सावित्री बाई फुले का जन्म हुआ फुले द्वारा नारी शिक्षा एवं शूद शिक्षा का आरम्भ किया गया बिहार में लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा ने मौर्यो को जगाया।
5.आज प्रगति के दौर में हम सभी स्वजातीय बंधुओं का दायित्व बनता है कि हम लोग संगठित होकर अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर प्रगति के पथ पर फिर से स्थापित करने का प्रयत्न करें।
6.अग्रrसर होते हुए बौद्ध धम्म सम्राट असोक महान के संदेश- शांति एवं वीरता शिक्षित जागरूक एवं कर्मठ बनें तब हम जाकर फिर से सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के भारत को विश्व गुरु बना पाएंगे
नमो बुद्धाय 🥀 🙏
जय सम्राट...जय मौर्यवंश ☸️🦁
छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में कभी भी किसी औरत का नाच गाना नहीं हुआ। महिलाओं का हमेशा सम्मान किया जाता था चाहे वह दुश्मन की पत्नी भी क्यों ना हो सभी को अपनी माता और बहन के समान समझा जाता था।
उनका साफ कहना था कि महिलाओं की गरिमा हमेशा बनाए रखनी चाहिए। बेशक वह महिला किसी भी जाति या धर्म से हो क्यों ना हो।
28 फरवरी 1678 में, सुकुजी नामक सरदार ने बेलवाड़ी किले की घेराबंदी की। इस किले की किलेदार एक स्त्री थी।
उसका नाम सावित्रीबाई देसाई था। इस बहादुर महिला ने 27 दिनों तक किले के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन अंत में, सुकुजी ने किले को जीत लिया और सावित्रीबाई से बदला लेने के लिए उसका अपमान किया।
जब राजे ने यह समाचार सुना, तो वह क्रोधित हो गए। राजे के आदेशानुसार सुकुजी की आंखें फोड कर उसे आजीवन कैद कर दिया गया।
24 अक्टूबर 1657 को छत्रपति शिवाजी महाराज के आदेश पर सोनेदेव ने जब कल्याण के किले पर घेराबंदी की और उसको जीत लिया। उस समय मौलाना अहमद की पुत्रवधू यानी औरंगजेब की बहन और शाहजहां की बेटी रोशनआरा जो एक अभूतपूर्व सुंदरी थी। जिसको किले में कैद कर लिया गया उसके बाद सैनिकों ने उस रोशनाआरा को जब छत्रपति शिवाजी महाराज के सामने पेश किया तो छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने सैनिकों को यह कहा की यह तुम्हारी पहली और आखरी गलती है।
उसके बाद अगर ऐसा अपमानित करने का कार्य किसी भी जाति और धर्म की औरत के साथ किया तो इसकी सजा मौत होगी। फिर एक पालकी सजा कर रोशनआरा को उसके कहने पर उसके महल में भेज दिया गया।
इसी प्रकार से शाइस्ता खान ने सन 1663 ईस्वी में कोंकण को जीतने के लिए अपने सेनापति दिलेर खान के साथ एक ब्राह्मण उदित राज देशमुख की पत्नी राय बाघिन (शेरनी) को भेजा तो छत्रपति शिवाजी महाराज ने राय बाघिन और मुगल दिलेरखान को रात में कोल्हापुर में ही घेर लिया और दिलेरखान अपनी जान बचा कर भाग गया। उस समय राय बाघिन को एक सजी हुई पालकी में बैठा कर वापसी उसके घर भेज दिया था।