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प्रगनाननंदा अपनी दम पर शतरंज के बादशाह बने
कोच बोले- वह खुद ही अपने आप को संभालते हैं
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। भारत के रमेशबाबू प्रगनाननंदा ने शतरंज विश्व कप के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया। खिताबी मुकाबले में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी से तीन दिन तक जूझने के बाद भले ही उन्हें टाई ब्रेकर में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इससे पहले ही वह बहुत कुछ हासिल कर चुके थे। 18 साल के प्रगनाननंदा ने लाखों नए फैंस बनाए और करोड़ों भारतीयों को यह उम्मीद दी कि आने वाले वर्षों में शतरंज की दुनिया में भारत का राज होगा।
#worldathleticschampionships में आपके अभूतपूर्व 88.17-मीटर फेंक के लिए बधाई @TAG, जो आपको डायमंड लीग ट्रॉफी, एक विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण और एक ओलंपिक स्वर्ण के साथ पहला भारतीय बनाया।
आपकी उपलब्धियां सम्पूर्ण राष्ट्र की भावना को बढ़ाता है।
हर भारतीय गर्व और प्रेरणा के साथ 'चाँद पर' है।
Jai Hind!