Découvrir des postesExplorez un contenu captivant et des perspectives diverses sur notre page Découvrir. Découvrez de nouvelles idées et engagez des conversations significatives
बात लगभग 10 साल पुरानी है ...नौंवीं कक्षा में मैंने विज्ञान की कॉपी नहीँ बनाई थी और कॉपी चेक कराने का भयंकर दबाव था......
मैडम भी बहुत सख्त थी, पता चलता उनको तो उल्टा ही टांग देतीं😢😭
पूरे नौ अध्याय हो चुके थे......
लड़के 40- 40 रुपए वाले रजिस्टर भर चुके थे और मेरे पास रजिस्टर के नाम पर बस एक रफ़ कॉपी में ही थी 😐
दो रात एक मिनट भी नींद नहीं आई,
ऊपर से हेड सर् को पता चलने का डर 😞
इस प्रकार चेकिंग का दिन आ ही गया 😰
मैडम ने चेकिंग शुरू की 🤢 18 रोल नंबर वालों तक की कॉपी चेक हुईं और घंटी बज गई,
मैंने राहत की सांस ली..... 😁
तभी मैडम ने जल्दी जल्दी में कहा:-
सभी बच्चे अपनी अपनी कॉपी जमा करके दे दो, मैं चेक करके भिजवा दूंगी..... 🙄
तभी मेरा शातिर दिमाग घूमा🤔, और मैं भीड़ में कॉपियों तक गया और जैसे अलजेब्रा में मान लेते हैं
ठीक वैसे ही मैंने भी मान लिया कि कॉपी मैंने जमा कर दी ......😁😁
अब कॉपी की जिम्मेदारी मैडम की..... 😉
दो दिन बाद सबकी कॉपी आई लेकिन मेरी नहीं आई...आती भी कैसे......?☺️☺️😊😃😂
मैं मैडम के पास गया और बोला:-
मैडम जी, मेरी कॉपी नहीं मिली...🤔
वो बोलीं:-
मैं चेक कर लूंगी, स्टाफ रूममें होगी.....😏
अगले दिन मैं फिर पहुच गया और बोला:-
मैडम मेरी कॉपी ?🤔
मैडम बोलीं:-
स्टाफरूम में तो है नहीं, मेरे घर रह गई होगी, कल देती हूं 😏
मैंने कहा:- ठीक है 😊
अगले दिन.......
मैं फिर....मैडम कॉपी ? ☹️
मैडम बोली:-
बेटा मेने घर देखी थी,आपकी कॉपी मिल गयी है, आज मैं लाना भूल गई, कल देती हूं 😊
मैं(मन ही मन ☺️😁):- वाह ! कमाल हो गया, कॉपी दिए बिना ही मैडम के घर में मिल गई , असंभव हुआ संभव 😆😂
अगले दिन मैं फिर:- मैडम कॉपी 😐
वो क्या है ना मैडम जी, याद भी करना भी जरूरी है😞🙄
और यूं मैंने 5 दिन तक जो मुझे मिला वही तनाव मैडम को दिया 😁
फिर मैडम ने हमको स्टाफरूम में बुलाया बोली:-
देखो बेटा! आपकी कॉपी हमसै गलती से खो गयी है 😐😐
मैंने ऐसा मुरझाया मुंह बना बनाया जैसे पता नहीं अब क्या होगा 😲😞🤕 और कहा:-
मैम अब क्या होगा 🤢😢😟?
मैं दोबारा कैसे इतना लिखूंगा,याद कैसे करूंगा? इम्तिहान कैसे दूंगा, इतना सारा काम मैं फिर से कैसे लिखूंगा....? 😢😥😪😵
मैडम ने ज्यों ही कहा:- बेटा तुम चिंता ना करो🤔🤗 दसवें चैप्टर से कॉपी बनाओ और बाकी दोबारा मत लिखना, वो मैं बंदोबस्त कर दूंगी 🤔
ऐसे लगा जैसे भरी गर्मी में कलेजे पर बर्फ रगड़ दी हो किसी ने 15 अगस्त के दिन लड्डू की जगह छेने बटे हो 🤗☺️😄😃😁😂🤣
मानो 50 किलो का बोझा सिर से उतर गया हो☺️ मैडम के सामने तो खुशी जाहिर नहीं कर सकता था 😆लेकिन
मैडम के जाते ही तीन बार घूंसा💪🏻 हवा में मारकर "Yes! Yes! Yes!" बोलकर अपन टाई ढीली करते हुए आगे बढ़ लिया 😉
अगले दिन मैडम उन 9 चैप्टर की 80 पेज की फोटोस्टेट लेकर आई और मुझे देते हुए बोली:-
ये लो बेटा, कुछ समझ ना आए तो कभी भी आकर समझ लेना 🤗
उसी दिन मुझे अपनी असली शक्तियों का एहसास हुआ कि अपनी पर आऊंं तो मैं कुछ भी कर सकता हूं l ☺️🤗🤣🤣😂😁🤣
एग्जाम की तैयारी अच्छे से और 100 में 100 का सोच कर करे , खाने पीने में विशेष ध्यान दे, वाहन धीरे और चलाते समय समय सावधानी बरतें, अनिश्चित घटनाओं अस्वस्थ होने से बचें💐🍁☘️🍫🌸
😂😂😂 और हां मेरी पोस्ट कैसी लगी कमेंट बॉक्स मेंअवश्य बताएं😎
Best Indian Astrologer in Wyong | Famous Psychic Reader
https://famousastrologycentre.....com/best-indian-astr
Best Indian Astrologer in Wyong offer a reliable & real service in astrology reading. He is Famous Psychic Reader. Top Vashikaran Specialist Astrologer
#सौ_करोड़ होने के बाद भी आज तुम मंदिरों में छुप कर भाग कर अपनी जान बचा रहे हो उस समय का अंदाजा लगाओ जब पूरे भारत की आबादी ही 16 करोड़ थी और विदेशी #आक्रांता बार बार भारत पर आक्रमण कर रहे थे तब न भारत के पास आधुनिक हथियार थे न क्षत्रियों की संख्या #10_12 करोड़ थी ...
फिर भी 1947 के समय भारत में 85% हिंदू था क्यू कि मुट्ठी भर हो कर भी हमारे #पुरखों ने कई बार #मुगल ,तुर्क ,अफगानों को कई बार खदेड़ा था आज 100 करोड़ हो कर भी भाग कर छुप कर तुम जान बचाते फिर रहे हो और कहते हो क्षत्रिय हार गए थे अब #समय है अब तुम लड़ कर दिखाओ जीत कर दिखाओ
अकबर की महानता का गुणगान तो कई इतिहासकारों ने किया है लेकिन अकबर की औछी हरकतों का वर्णन बहुत कम इतिहासकारों ने किया है
अकबर अपने गंदे इरादों से प्रतिवर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था जिसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था अकबर इस मेले में महिला की वेष-भूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देती थी उसे दासियाँ छल कपटवश अकबर के सम्मुख ले जाती थी एक दिन नौरोज के मेले में महाराणा प्रताप की भतीजी छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह की पुत्री मेले की सजावट देखने के लिए आई जिनका नाम बाईसा किरणदेवी था जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ
बाईसा किरणदेवी की सुंदरता को देखकर अकबर अपने आप पर काबू नही रख पाया और उसने बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखे से जनाना महल में बुला लिया जैसे ही अकबर ने बाईसा किरणदेवी को स्पर्श करने की कोशिश की किरणदेवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को ऩीचे पटकर छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी और कहा नींच... नराधम तुझे पता नहीं मैं उन महाराणा प्रताप की भतीजी हुं जिनके नाम से तुझे नींद नहीं आती है बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है अकबर का खुन सुख गया कभी सोचा नहीं होगा कि सम्राट अकबर आज एक राजपूत बाईसा के चरणों में होगा अकबर बोला मुझे पहचानने में भूल हो गई मुझे माफ कर दो देवी तो किरण देवी ने कहा कि आज के बाद दिल्ली में नौरोज का मेला नहीं लगेगा और किसी भी नारी को परेशान नहीं करेगा अकबर ने हाथ जोड़कर कहा आज के बाद कभी मेला नहीं लगेगा उस दिन के बाद कभी मेला नहीं लगा ।
इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित सगत रासो मे 632 पृष्ठ संख्या पर दिया गया है बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेटिंग मे भी इस घटना को एक दोहे के माध्यम से बताया गया है -
किरण सिंहणी सी चढी उर पर खींच कटार!!
भीख मांगता प्राण की अकबर हाथ पसार!!
धन्य है किरण बाईसा !!उनकी वीरता को नमन् 🚩