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भी मैंने Aaj Tak पर Sudhir Chaudhary जी द्वारा आदिपुरुष फिल्म के डायरेक्टर Om Raut जी व डायलॉग राइटर Manoj Muntashir जी का इंटरव्यू देखा।
मित्रों अब बात करें इनके इंटरव्यू की तो इसमें लेश पोत बहुत अच्छी तरीके से हुई है, ओम राउत जी इस फिल्म को फिल्म न कहकर इसे भक्ति का प्रतीक बता रहें है, साथ ही इस फिल्म के डायलॉग राइटर होने के नाते श्री मनोज मुंतशिर जी कह रहे हैं की अगर रावण खिलजी जैसा लग रहा है तो क्या समस्या है।
लेकिन अब इसमें इन लोगों में से किसी ने हनुमान जी के रोल की बात ही नही की जानते हो किसलिए क्योंकि यहां ये सब इसी उद्देश्य से बैठे थे की लेश पोत के स्वयं का प्रभु का भक्त बताकर बस पल्ला झाड़ लेंगे।
अरे भाई हमको समस्या है की रावण के रोल के साथ साथ हनुमान जी का इस्लामीकरण करके उनका रूप ऐसा बना दिया की वो जैसे कोई मौलाना हों।
हम इसे कतई स्वीकार नहीं करेंगे ।
"अगर ओम राउत जी ने गहन अध्ययन किया होता तो उन्हें पता होता की हनुमान जी के स्वरूप के संबंध में लिखा है -
कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा।
अर्थ - हनुमान जी सुनहरे रंग, सुंदर वस्त्र ,कानो में कुण्डल और घुंगराले बालो में सुशोभित है