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भारत की भूमि पर जितने भी विद्वान हुये है।
उनमें सबसे अधिक आदर मैं हस्तिनापुर के महामंत्री विदुर जी का करता हूँ। वह विद्वान के साथ लेखक भी थे। विदुरनीति उनकी रचना है।
वह किस स्तर के विद्वान थे इससे अच्छी तरह से समझा जा सकता है की भगवान श्रीकृष्ण उनको महात्मा कहकर संबोधित करते थे।
लेकिन मेरा कारण कुछ अलग है।
बहुधा यह देखा जाता है , विद्वान , प्रबुद्ध , अभिजात्य लोग तटस्थ रहते है या निरपेक्षता का ढोंग करते है। अपनी कायरता को सिद्धांतो के आवरण में छुपाते है।
परंतु महात्मा विदुर ऐसे विद्वान नहीं थे। वह प्राचीन भारत के सबसे उच्च पद पर आसीन थे।
भरत वंश कि सारी प्रशासनिक शक्ति उनके पास थी। महामंत्री होने के साथ वह समस्त भारत की नीति , व्यवस्था के प्रेणता थे।
वह कभी मौन नहीं रहे।
निडरता , स्पष्टता , धर्मपरायणता के साथ उनकी नीति में अधिकारों की स्प्ष्ट व्याख्या थी।
अपनी युवावस्था में उन्होंने धृतराष्ट्र को आयु में श्रेष्ठ होते हुये भी उत्तराधिकारी के अयोग्य बताया था।
पांडु पुत्रों को अधिकार दिलाने के लिये वह संघर्ष करते रहे। माताकुंती को आश्रय दिये , लाक्ष्यागगृह में पांडवों की रक्षा किये।
भीष्म , द्रोण , कृपाचार्य जैसे मनीषियों कि भी आलोचना से हिचके नहीं।
हस्तिनापुर कि राज्यसभा में जँहा रेखायें बिल्कुल स्पष्ट थी कि जो भी दुर्योधन का विरोध करेगा, वह हस्तिनापुर का
सफ़ेद नमक,स्वास्थ्य और ब्रत🌹🌹❤️❤️
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हमारे धर्म में व्रत रखने को कहा गया है।
पूरे वर्ष में कम से कम 30 दिन व्रत रखना चाहिये।
अधिकतम महीने में चार दिन, वर्ष में 48 दिन कहा गया है।
व्रत का धार्मिक महत्व है। वह सब आप जानते है।
अन्य पंथों, मजहबो में भी व्रत रखा जाता है।उनकी अपने नियम है।
लेकिन मैं स्वास्थ्य कि बात कर रहा हूँ। वह बिल्कुल ही अलग है।
हिंदू धर्म मे व्रत का सबसे कठोर नियम क्या है ?
24 घँटे का है !
ठीक है ,इसका भी महत्व है।
लेकिन कुछ अलग है। जिसका महत्व आज के समय मे बहुत है।
'नमक '
24 घँटे अर्थात दिन और रात आपको नमक नहीं खाना है।
यदि आप वर्ष में तीस दिन( प्रति 24 घँटे ) नमक नहीं खाते। आपका सोडियम संतुलित रहता है।
यदि आप 10 या 12 घँटे में नमक का सेवन कर लिये तो कोई लाभ नहीं होगा।
साल्ट अर्थात नमक ! जहर बन गया है। रक्तचाप ( blood pressure ) सहित लोग हृदय कि बीमारियों से लोग जूझ रहे है। रक्तचाप एक बहुत बड़ा कारण ब्रेन हैमरेज होने का और इससे अपंगता, मृत्यु हो रही है।
WHO का कहना है कि दुनिया 70 लाख लोग इस साल्ट से मर जायेंगें।
एक दिन