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बिहार के गोपालगंज जिले से बहुत ही चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहां स्थित प्रसिद्ध थावे मंदिर से कथित तौर पर देवी की प्रतिमा का स्वर्ण मुकुट चोरी कर लिया गया है। ये घटना हैरान करने वाली इसलिए भी है क्योंकि थावे मंदिर बिहार के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। बता दें कि देवी का जो सोने का मुकुट चोरी किया गया है उसका वजन करीब 500 ग्राम बताया जा रहा है।

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जय जय श्री कृष्णा*
*ll श्रीमद भगवद गीता ll* 🙏💫🕉️✨

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पार्वती जी ने शिव जी की मौन साधना को देखा और उनकी प्रतीक्षा की। शिव जी ने कहा—“धैर्य वह शक्ति है जो कठिन समय को भी अवसर बना देती है।” यह कथा हमें सिखाती है कि जल्दबाजी नुकसान पहुँचाती है, पर धैर्य सही समय पर सही फल अवश्य देता है। हर हर महादेव #हरहरमहादेव@highlight— feeling loved at

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बीते दिन जब एक माँ अपने बच्चे के लिए दूध लेने के इरादे से ट्रेन से उतरी ही थी कि अचानक ट्रेन चलने लगी। तभी गार्ड की नज़र उस माँ पर पड़ी और उसने बिना देर किए ट्रेन को रुकवाने का इशारा कर दिया। इस संवेदनशीलता और इंसानियत से भरे कदम के लिए उस गार्ड को दिल से सलाम!

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जब परतंत्रता की बेड़ियाँ भारत माता को जकड़े हुए थीं, तब पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह जैसे क्रांतिदूतों ने काकोरी की धरती पर अंग्रेजी साम्राज्य की चूलें हिला दी थीं। इन हुतात्माओं के साहस ने सोए हुए राष्ट्र को जगाकर स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी।
मातृभूमि की वेदी पर अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के इन अमर नायकों को उनके बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन। आपकी अडिग देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान युगों-युगों तक देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज बना रहेगा।

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72 घंटे, एक जवान… और सामने 300 दुश्मन!
1962 की जंग का वो अध्याय जिसे भारत कभी नहीं भूल सकता
1962 के भारत–चीन युद्ध में कुछ कहानियाँ इतिहास नहीं, हौसले की मिसाल बन जाती हैं।
ऐसी ही एक कहानी है गढ़वाल राइफल्स के वीर जवान जसवंत सिंह रावत की—एक ऐसा नाम, जिसे सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के इस सपूत ने पूरे 72 घंटे तक अकेले मोर्चा संभाले रखा।
सामने थे 300 से अधिक चीनी सैनिक, लेकिन न डर था, न पीछे हटने का सवाल।
बर्फीली चोटियाँ, सीमित हथियार और असंभव हालात—फिर भी जसवंत सिंह रावत डटे रहे।
उनकी रणनीति और साहस ने दुश्मन को यह यकीन दिला दिया कि भारतीय सेना की एक बड़ी टुकड़ी वहां मौजूद है।
आखिरकार, देश की रक्षा करते हुए वह अमर हो गए।
कहते हैं आज भी उन पहाड़ों में उनके बलिदान की गूंज महसूस की जाती है।
भारतीय सेना आज भी उस पोस्ट पर जसवंत सिंह रावत को सम्मानपूर्वक “ड्यूटी पर तैनात” मानती है।
वह सिर्फ एक सैनिक नहीं थे—वह साहस की परिभाषा, हिम्मत का प्रतीक और भारत की शान थे।
भारत ऐसे वीर सपूतों पर सिर्फ गर्व नहीं करता, उनसे प्रेरणा लेता है।
🇮🇳
सलाम उस जांबाज़ को, जिसने अकेले इतिहास रच दिया।
#jaswantsinghrawat #indianarmy #1962war #bharatkeveer

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72 घंटे, एक जवान… और सामने 300 दुश्मन!
1962 की जंग का वो अध्याय जिसे भारत कभी नहीं भूल सकता
1962 के भारत–चीन युद्ध में कुछ कहानियाँ इतिहास नहीं, हौसले की मिसाल बन जाती हैं।
ऐसी ही एक कहानी है गढ़वाल राइफल्स के वीर जवान जसवंत सिंह रावत की—एक ऐसा नाम, जिसे सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के इस सपूत ने पूरे 72 घंटे तक अकेले मोर्चा संभाले रखा।
सामने थे 300 से अधिक चीनी सैनिक, लेकिन न डर था, न पीछे हटने का सवाल।
बर्फीली चोटियाँ, सीमित हथियार और असंभव हालात—फिर भी जसवंत सिंह रावत डटे रहे।
उनकी रणनीति और साहस ने दुश्मन को यह यकीन दिला दिया कि भारतीय सेना की एक बड़ी टुकड़ी वहां मौजूद है।
आखिरकार, देश की रक्षा करते हुए वह अमर हो गए।
कहते हैं आज भी उन पहाड़ों में उनके बलिदान की गूंज महसूस की जाती है।
भारतीय सेना आज भी उस पोस्ट पर जसवंत सिंह रावत को सम्मानपूर्वक “ड्यूटी पर तैनात” मानती है।
वह सिर्फ एक सैनिक नहीं थे—वह साहस की परिभाषा, हिम्मत का प्रतीक और भारत की शान थे।
भारत ऐसे वीर सपूतों पर सिर्फ गर्व नहीं करता, उनसे प्रेरणा लेता है।

सलाम उस जांबाज़ को, जिसने अकेले इतिहास रच दिया।
#jaswantsinghrawat #indianarmy #1962war #bharatkeveer

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श्री बाँके बिहारी लाल की जय....राधे राधे🙏🌹🙏🌹
#radha #radharani #radhe #radheradhe #radhekrishna #bihariji #krishna #vrindavan

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