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अगर आप हर दिन ठीक 12 बजे,
एक ही जगह से,
पूरे साल सूरज की फोटो लेते रहें
और फिर उन सारी तस्वीरों को जोड़ दें—
तो आपको आसमान में ∞ (Infinity) जैसा पैटर्न दिखेगा।

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मुजफ्फरनगर की रहने वाली प्रगति की शादी 8 फरवरी को निर्धारित थी। घर में तैयारी चल रही थी, धूमधाम का माहौल था।
प्रगति थोड़े दिन पहले ही गुड़गांव से अपने गांव आई थी। क्योंकि प्रगति गुड़गांव में नौकरी करती थी, प्रगति के साथ रोहित नाम का लड़का भी वही गुड़गांव में ही नौकरी करता था।
रोहित और प्रगति दोनों का घर भी गांव में आमने-सामने था। जानकारी के मुताबिक दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे, और इनका रिश्ता पिछले 4 साल से चल रहा था।
प्रगति के शादी के तीन दिन पहले रोहित उसके घर जाता है, दोनों एक साथ एक कमरे में चले जाते हैं, थोड़ी देर बाद प्रगति के चीखने की आवाज आती है।
घर वाले तुरंत जाकर दरवाजा पीटने लगते हैं, अंदर से रोहित जैसे ही दरवाजा खोलता है, उसके हाथ में चाकू होता है। उस चाकू से वह अपनी गर्दन पर वार करता है और मौके पर वही मर जाता है।
प्रगति पहले से ही मर चुकी थी, क्योंकि रोहित ने चाकू से उसे मार डाला था।
जिस घर से डोली उठनी थी, उस घर से अब अर्थी उठेगी, लेकिन लड़के के परिवार वालों का आरोप है कि यह एक ऑनर किलिंग है। यानी की रोहित ने खुद को नहीं मारा बल्कि रोहित को मारा गया, और लड़की को भी मारा गया है।
हालांकि पुलिस अभी जांच कर रही है। पुलिस का पहला बयान यही है कि रोहित ने पहले प्रगति को मारा फिर उसने खुद को खत्म कर लिया।

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27 दिसंबर 2025 की वो शाम शकरपुर के एक परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला इंतजार बन गई। 16 साल की ईशा (अंकिता) ने अपने पिता से बड़े चाव से मोमोज खाने के लिए 100 रुपये मांगे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर की दहलीज पार करते हुए उसके कदम वापस नहीं लौटेंगे। 45 दिन बीत चुके हैं, लेकिन ईशा का सुराग अब भी दिल्ली की भीड़ और पुलिस की फाइलों में कहीं खोया हुआ है।

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दिल्ली के महरौली इलाके से सामने आई यह घटना भले ही दिल को झकझोर देने वाली हो, लेकिन इसके भीतर साहस, संवेदनशीलता और न्याय की एक मजबूत मिसाल भी छिपी है।
एक महिला की गरिमा के साथ हो रही गलत हरकत का विरोध करना मुकेश नामक युवक को भारी पड़ गया, लेकिन उन्होंने चुप रहना नहीं चुना। महज़ 119 सेकंड के भीतर चार हमलावरों ने उन पर बेरहमी से हमला कर दिया। इसके बावजूद मुकेश का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि आज भी हमारे समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो डर के आगे नहीं झुकते और सही के लिए खड़े होते हैं—चाहे खतरा कितना ही बड़ा क्यों न हो।
इस मामले में राहत और भरोसे की सबसे बड़ी वजह रही Delhi Police की तेज़ और सख़्त कार्रवाई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची, गंभीर रूप से घायल मुकेश को तुरंत AIIMS Trauma Centre में भर्ती कराया गया। मामले की गंभीरता को समझते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया और कुछ ही घंटों के भीतर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
अब मुकेश की हालत खतरे से बाहर है और वे सुरक्षित हैं। यह घटना सिर्फ हिंसा की कहानी नहीं, बल्कि उस नागरिक साहस की मिसाल है जो एक आम आदमी ने दिखाया और उस कानूनी भरोसे की भी, जिसे पुलिस प्रशासन ने मज़बूती से कायम किया।
महिला सम्मान के पक्ष में खड़ा होना अपराध नहीं—
यह समाज की ज़रूरत है।
और इस मामले में इंसाफ़ की तेज़ रफ्तार कार्रवाई उम्मीद जगाती है।
#courage #justicedelivered #delhipolice

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कभी चप्पल खरीदने के पैसे नहीं थे और कई रातें स्टेशन पर गुजरीं, वही डॉ. ए वेलुमनी आज देश की बड़ी डायग्नोस्टिक कंपनियों में से एक के संस्थापक हैं। थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज के जरिए उन्होंने सस्ती जांच को आम लोगों तक पहुंचाया और फोकस, सादगी व जोखिम के दम पर ₹5000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बनाई।

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भारत ने U-19 विश्व कप के इतिहास में एक बार फिर अपना नाम दर्ज कर लिया 🇮🇳

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केरल में स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु के अवतार पद्मनाभस्वामी को समर्पित है। इसका अर्थ है "जिसकी नाभि में कमल है"। माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा मिली थी, जिसके बाद इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन करने आते हैं।
अपार खजाना और तहखाने
2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर के तहखानों की जांच की गई। इसमें अनुमानित 1 लाख करोड़ रुपये की कीमती धातुएं, मूर्तियां और सिंहासन पाए गए। मंदिर में कुल 6 तहखाने (A, B, C, D, E, F वॉल्ट) हैं, लेकिन सभी का खुलासा नहीं हो सका।
पौराणिक मान्यता
कहा जाता है कि इस खजाने की रक्षा नागों और अलौकिक शक्तियों द्वारा की जाती है। जो कोई इसे खोलने की कोशिश करेगा, उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ऐसा माना जाता है कि केवल वही पुजारी इसे खोल सकता है, जिसे गरुड़ मंत्र का सही ज्ञान हो।
इतिहास और स्थापत्य
मंदिर का इतिहास लगभग 8वीं शताब्दी पुराना माना जाता है। वर्तमान रूप 18वीं शताब्दी में त्रावणकोर महाराजा मार्तंड वर्मा ने बनवाया। मंदिर में भगवान विष्णु की 18 फीट लंबी प्रतिमा, शेषनाग पर शयन मुद्रा में, नेपाल की गंडकी नदी से लाए गए 12008 शालिग्राम से बनाई गई है। यह प्रतिमा कई दरवाजों से देखी जा सकती है और कला व स्थापत्य का अद्भुत उदाहरण है।
यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि इतिहास, वास्तुकला और रहस्य के दृष्टिकोण से भी अनोखा है।

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देवभूमि उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल स्थित इंटर कॉलेज, यमकेश्वर में नवनिर्मित भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में आज उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी एवं माननीय सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी के साथ सम्मिलित हुआ एवं छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
जीवन में वही सफल हुआ है, जिसने सदैव सकारात्मक भाव के साथ अपनी सीढ़ी चढ़ने का प्रयास स्वयं किया है।
सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।
Trivendra Singh Rawat

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देवभूमि उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल स्थित इंटर कॉलेज, यमकेश्वर में नवनिर्मित भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में आज उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी एवं माननीय सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी के साथ सम्मिलित हुआ एवं छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
जीवन में वही सफल हुआ है, जिसने सदैव सकारात्मक भाव के साथ अपनी सीढ़ी चढ़ने का प्रयास स्वयं किया है।
सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।
Trivendra Singh Rawat

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