Ontdekken postsOntdek boeiende inhoud en diverse perspectieven op onze Ontdek-pagina. Ontdek nieuwe ideeën en voer zinvolle gesprekken
Help needy people | जरूरतमंद लोगों की मदद करें | help poor people 🫂😭 / #youtubeshorts #help #loveshayari
कारगिल की जमी हुई चोटियों पर जब मौत हर कदम पर घात लगाए बैठी थी, तब एक 19 वर्षीय सैनिक ने वह कर दिखाया जिसे इतिहास असंभव मानता था। गले और कंधे में कई गोलियाँ धंसी होने के बावजूद, हलवदार योगेंद्र सिंह यादव ने 60 फीट ऊँची बर्फीली चट्टान पर चढ़कर दुश्मन पर धावा बोला—और युद्ध की दिशा ही बदल दी।
3 जुलाई 1999, कारगिल युद्ध के निर्णायक क्षणों में, 18 ग्रेनेडियर्स की घातक प्लाटून के साथ योगेंद्र यादव ने टाइगर हिल पर हमला किया। दुश्मन की भारी गोलाबारी में उन्हें 15 गोलियाँ लगीं, फिर भी उन्होंने दुश्मन के बंकर तबाह किए, अपने साथियों तक अहम जानकारी पहुँचाई और हमले को सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
जब टाइगर हिल की चोटी पर तिरंगा फहराया गया, तो वह सिर्फ एक सैन्य विजय नहीं थी—वह भारतीय जज़्बे की जीत थी। इतनी कम उम्र में दिखाई गई इस अद्वितीय वीरता के लिए योगेंद्र सिंह यादव को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।