राधे राधे का स्मरण करते रहो 💯🥺💖
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उत्तराखंड के रहने वाले मशहूर यूट्यूबर सौरव जोशी (Sourav Joshi) आज करोड़ों की कमाई कर रहे हैं, लेकिन उनका शुरुआती सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा । एक समय था जब उनके पिता काम की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर भटकते थे और परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।
सौरव ने अपने करियर की शुरुआत आर्ट और स्केच वीडियो से की थी, लेकिन उन्हें असली कामयाबी 2019 में व्लॉगिंग (Vlogging) शुरू करने के बाद मिली। उन्होंने लगातार 365 दिनों तक हर रोज एक वीडियो डालने का संकल्प लिया, जिसने उनकी किस्मत बदल दी। उनके पारिवारिक व्लॉग्स ने दर्शकों का दिल जीत लिया और वे भारत के सबसे तेजी से बढ़ते व्लॉगर्स में शुमार हो गए।
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरव आज यूट्यूब से सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई करते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी कमाई का अंदाजा देते हुए कहा था कि वे इतनी कमाई कर लेते हैं जिससे एक 'थार रॉक्स' (Thar Roxx) खरीदी जा सके। उनकी मेहनत ने आज उनके परिवार को गरीबी से निकालकर शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचा दिया है।
लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में एक दुखद घटना सामने आई है। पति द्वारा मज़ाक में ‘बंदरिया’ कहे जाने से आहत होकर तनु नामक महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। तनु ने चार साल पहले प्रेम विवाह किया था और वह मॉडलिंग की शौकीन थीं। परिजनों के अनुसार, हंसी-मज़ाक के दौरान कही गई यह बात उनके लिए बेहद आहत करने वाली साबित हुई, जिसके बाद उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने सोनिया विहार में नकली ब्रांडेड जूतों की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। नाइकी, एडिडास और न्यू बैलेंस के जाली जूते बनाने वाले मालिक संदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी में मशीनें, कच्चा माल, 9,600 से अधिक अपर पार्ट्स और 1,667 स्टिकर शीट्स जब्त हुईं।
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भारतीय रेल के सामान्य डिब्बे से एक बार फिर जिंदगी की वह तस्वीर सामने आई है, जिसे अक्सर व्यवस्था अनदेखा कर देती है। ट्रेन में इतनी भीड़ है कि पैर रखने तक की जगह नहीं। हर चेहरा थकान, मजबूरी और चुप्पी की कहानी कह रहा है।
इसी भीड़ में एक युवक अपनी पत्नी और छोटे बच्चों के साथ टॉयलेट के बाहर ज़मीन पर बैठा दिखाई देता है। कभी वह पत्नी को सहारा देता है, तो कभी बच्चों को गोद में सुलाने की कोशिश करता है। डिब्बे में न तो बैठने की जगह है, न ही आराम की कोई उम्मीद।
उस युवक के चेहरे पर न गुस्सा है, न विरोध—क्योंकि उसे मालूम है कि वह स्लीपर या एसी टिकट खरीदने की स्थिति में नहीं है। मजबूरी ने उसे सिखा दिया है कि यह सफर ऐसे ही काटना होगा।
डिब्बे के अंदर कुछ यात्री सीट पर बैठकर खाना खा रहे हैं। वहीं ज़मीन पर बैठे बच्चों की मासूम आंखें उन्हें देख रही हैं—शायद वे यह समझने की कोशिश कर रही हों कि बैठने का अधिकार आखिर किन लोगों के लिए बना है। हैरानी की बात यह है कि किसी ने भी बच्चों को अपनी सीट देने की ज़रूरत महसूस नहीं की।
सवाल यह नहीं है कि नियम क्या कहते हैं, सवाल यह है कि क्या हमारी व्यवस्था और हमारा समाज कभी इन यात्रियों को सम्मानपूर्वक सफर दे पाएगा?
जनरल डिब्बे का किराया चुकाने के बाद भी अगर एक इंसान को बैठने तक की जगह न मिले, तो यह सिर्फ़ भीड़ की समस्या नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सिस्टम—दोनों की विफलता है।
यह दृश्य किसी एक ट्रेन का नहीं है। यह उन लाखों भारतीयों की कहानी है, जो रोज़ अपनी मजबूरी को टिकट बनाकर सफर करते हैं—खामोशी से, बिना शिकायत के।
बेंगलुरु में लोकायुक्त पुलिस ने एक पुलिस इंस्पेक्टर को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी इंस्पेक्टर गोविंदराजु जो के.पी. अग्रहारा पुलिस स्टेशन में तैनात थे, गिरफ्तारी के दौरान बीच सड़क पर जोर-जोर से चीखने और चिल्लाने लगे, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
अधिकारियों के अनुसार, इंस्पेक्टर ने एक पुराने मामले में मदद करने और जमानत दिलाने के बदले शिकायतकर्ता मोहम्मद अकबर से कुल 5 लाख रुपये की मांग की थी। वह पहले ही 1 लाख रुपये ले चुके थे और बाकी के 4 लाख रुपये लेते समय लोकायुक्त की टीम ने उन्हें ट्रैप कर लिया।