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420 ग्राम का बच्चा…
सुनने में ये बस एक संख्या लगती है,
लेकिन इसके पीछे छुपी है
ज़िंदगी और मौत के बीच की सबसे कठिन जंग।
यह बच्चा सिर्फ 21 सप्ताह में पैदा हुआ था।
वज़न मात्र 420 ग्राम —
हाथ की हथेली से भी छोटा शरीर,
नाज़ुक सांसें,
और चारों तरफ़ मशीनों की आवाज़ें।
डॉक्टरों ने साफ़ कहा था—
इसके जीवित रहने की संभावना
1% से भी कम है।
हर दिन एक सवाल था—
क्या आज की रात निकल पाएगा?
हर सांस एक उम्मीद थी,
हर धड़कन एक दुआ।
माँ की छाती से लगकर
उस नन्ही सी जान ने
ज़िंदगी को पकड़े रखा।
मशीनें, दवाइयाँ,
डॉक्टरों की मेहनत…
और माँ-बाप का अटूट विश्वास।
NICU की वो रातें आसान नहीं थीं—
डर, आंसू, थकान,
और फिर भी हार न मानने का जज़्बा।
जिस बच्चे को दुनिया ने
लगभग खोया हुआ मान लिया था,
आज वही बच्चा
अपना चौथा जन्मदिन मना रहा है।
ये सिर्फ एक मेडिकल चमत्कार नहीं,
ये सब्र, प्यार और उम्मीद की जीत है।
कभी भी किसी को
कमज़ोर मत समझो—
क्योंकि
ज़िंदगी सबसे छोटे शरीर में भी
सबसे बड़ी ताकत छुपा सकती है ❤️
#love #kids #familylove #relationships

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रात 2 बजे 8 महीने की गर्भवती महिला को..🙏😢

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अब ये दोनों 4 बच्चे कैसे पैदा करेंगे, अब नहीं पूछेगा

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पक्षियों को दाना खिलाते हुए पूज्य महाराज जी

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झांसी में 11वीं की छात्रा माया राजपूत ने आईफोन के लिए जान दे दी। वह कई दिनों से आईफोन दिलाने की जिद कर रही थी।

आत्महत्या से पहले छात्रा ने अपने पिता तुलसीराम राजपूत को धमकी देते हुए कहा था- अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो देख लेना। उस वक्त तुलसीराम को बेटी की धमकी समझ नहीं आई।

शनिवार को जब माता-पिता काम पर चले गए, उसी दौरान छात्रा ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

छात्रा की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी की मौत से पूरा परिवार आहत है। पिता ने कहा- मैं गरीब किसान हूं। आईफोन के लिए पैसे नहीं थे। पूरा मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुशमिलिया गांव का है।

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झांसी में 11वीं की छात्रा माया राजपूत ने आईफोन के लिए जान दे दी। वह कई दिनों से आईफोन दिलाने की जिद कर रही थी।

आत्महत्या से पहले छात्रा ने अपने पिता तुलसीराम राजपूत को धमकी देते हुए कहा था- अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो देख लेना। उस वक्त तुलसीराम को बेटी की धमकी समझ नहीं आई।

शनिवार को जब माता-पिता काम पर चले गए, उसी दौरान छात्रा ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

छात्रा की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी की मौत से पूरा परिवार आहत है। पिता ने कहा- मैं गरीब किसान हूं। आईफोन के लिए पैसे नहीं थे। पूरा मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुशमिलिया गांव का है।

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झांसी में 11वीं की छात्रा माया राजपूत ने आईफोन के लिए जान दे दी। वह कई दिनों से आईफोन दिलाने की जिद कर रही थी।

आत्महत्या से पहले छात्रा ने अपने पिता तुलसीराम राजपूत को धमकी देते हुए कहा था- अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो देख लेना। उस वक्त तुलसीराम को बेटी की धमकी समझ नहीं आई।

शनिवार को जब माता-पिता काम पर चले गए, उसी दौरान छात्रा ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

छात्रा की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी की मौत से पूरा परिवार आहत है। पिता ने कहा- मैं गरीब किसान हूं। आईफोन के लिए पैसे नहीं थे। पूरा मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुशमिलिया गांव का है।

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अल्फाजों के दीवाने तो बहुत मिलेंगे दोस्त ,
तलाश उसकी करना जो खामोशी को पढ़ ले !!

ऐसे दूल्हे को दिल से सैल्यूट है जिन्होंने दुल्हन के बाप के दर्द को महसूस किया और उनका दामन खुशियों से भर दिया !!
❤️🤲🥰