image
33 w - Translate

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को प्रतिष्ठित अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनके लिए इस सम्मान को मंजूरी दी थी। कर्तव्य पथ पर आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया, जिससे वह शांतिकाल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं.

image

image

image
33 w - Translate

बारामती में अजित पवार से जुड़े प्लेन क्रैश की खबर जैसे ही सामने आई, झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक पुरानी, लेकिन सिहरन पैदा कर देने वाली याद ताजा हो गई। तारीख थी नौ मई 2012, जब झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मौत से चंद कदमों की दूरी पर खड़े थे। वह हादसा, जिसने न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
नौ मई 2012 की सुबह मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा रांची से खरसावां के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ थीं पत्नी मीरा मुंडा, विधायक बड़कुंवर गगराई, दो पायलट और सुरक्षा कर्मी। मौसम सामान्य था, लेकिन किसे पता था कि कुछ ही देर में यह यात्रा उनकी जिदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाएगी। खरसावां में लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी सामने आई। लैंडिंग में सहायता करने वाला राउटर सिस्टम अचानक फेल हो गया।
बताते हैं कि अर्जुन मुंडा के सुझाव पर पायलट ने साहसिक निर्णय लिया और हेलिकॉप्टर को वापस रांची मोड़ दिया गया। भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर चक्कर काटने लगा। वजह साफ थी कि अगर ईंधन भरा रहता और क्रैश लैंडिंग होती, तो नुकसान और भी भयावह होता। आसमान में हर चक्कर के साथ नीचे कुछ लोग सांसें थामे हुए थे। आखिरकार जब ईंधन लगभग समाप्त हो गया, तब पायलट ने क्रैश लैंडिंग का फैसला किया। क्रैश लैंडिंग होते ही हेलिकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चारों ओर आग और धुएं का गुबार फैल गया। हादसे में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा गंभीर रूप से घायल हो गए। अर्जुन मुंडा को पूरी तरह ठीक होने में चार महीने से अधिक का समय लगा।
#jharkhand #arjunmunda

image
33 w - Translate

बारामती विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ जान गंवाने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर की रहने वाली पिंकी के पिता शिवकुमार माली ने मुंबई में टैक्सी चलाकर संघर्षों के बीच अपनी बेटियों को पढ़ाया था।
नम आंखों से शिवकुमार ने बताया, "मैंने पाई-पाई जोड़कर पिंकी का एयर होस्टेस बनने का सपना पूरा किया था। वह घर का पूरा ख्याल रखती थी, लेकिन आज सब खत्म हो गया"। हादसे से कुछ देर पहले ही पिंकी ने पिता को आखिरी कॉल किया था और कहा था, "पापा, मैं अजित दादा के साथ बारामती जा रही हूं, उन्हें छोड़ने के बाद नांदेड़ जाऊंगी और कल बात करूंगी"।

पिंकी पिछले 5 साल से चार्टर्ड विमानों में सेवा दे रही थीं और संयोग से उनके पिता भी एनसीपी के 35 साल पुराने कार्यकर्ता हैं। इस हादसे ने एक संघर्षशील पिता की उम्मीदों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया है।

image

image

image
33 w - Translate

जिसे लड़कर नहीं हराया जा सकता उसके खिलाफ साजिश शुरू कर दी जाती है...

image
33 w - Translate

माँ सबसे पहला गुरु है