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मुख्यमंत्री मान और अरविंद केजरीवाल ने नौवें ਪਾਤਸ਼ਾਹ जी के 350वें शहादत दिवस को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के अवसर पर गुरु चरण में शिरकत की
#350yearsofmartyrdom #srigurutegbahadursahibji

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मुख्यमंत्री मान और अरविंद केजरीवाल ने नौवें ਪਾਤਸ਼ਾਹ जी के 350वें शहादत दिवस को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के अवसर पर गुरु चरण में शिरकत की
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मुख्यमंत्री मान और अरविंद केजरीवाल ने नौवें ਪਾਤਸ਼ਾਹ जी के 350वें शहादत दिवस को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के अवसर पर गुरु चरण में शिरकत की
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भारतीय वायुसेना ने विंग कमांडर नमांश स्याल के पार्थिव शरीर को अत्यंत सम्मान और गरिमा के साथ स्वदेश लाकर अपना कर्तव्य निभाया। दुबई एयर शो 2025 के एरियल डिस्प्ले के दौरान हुए हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिनसे उनकी दुखद मृत्यु हो गई। उनके पार्थिव शरीर को IAF के C-130 विमान द्वारा भारत लाया गया, जहाँ साउदर्न एयर कमांड बेस पर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी गई। वर्दी में सजे जवानों की मौन सलामी, तिरंगे में लिपटा ताबूत और सैन्य बैंड की धीमी धुनों ने इस क्षण को और भी भावुक और सम्मानपूर्ण बना दिया।
श्रद्धांजलि समारोह के बाद विंग कमांडर नमांश स्याल के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश भेजा गया, जहाँ पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। भारतीय वायुसेना ने बताया कि साउदर्न एयर कमांड का हर सदस्य इस गहन क्षति के समय शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है। यह क्षण न केवल वायुसेना के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक भारी क्षति का प्रतीक है। विंग कमांडर स्याल की वीरता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा प्रेरणा देती रहेगी, और देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद में जब उनकी मुलाकात युवा कांग्रेस सांसदों या इंडिया गठबंधन के सदस्यों से होती है, तो वे बेहद निराश दिखाई देते हैं। उनके अनुसार, ये युवा सांसद अक्सर उनसे शिकायत करते हैं कि “सर, हम क्या करें? हमारे राजनीतिक करियर पर खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। हमें तो बोलने का मौका तक नहीं मिलता। जैसे ही हम उठते हैं, हमारे ही नेता ‘संसद बंद करो’ के नारे लगाने लगते हैं। हम अपने ही क्षेत्र के लोगों को जवाब नहीं दे पाते।”

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क्या आप प्रधानमंत्री मोदी जी की नेतृत्व शैली से संतुष्ट हैं? हाँ या नहीं?"

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महाराष्ट्र के लिए यह गौरव का क्षण है कि औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन कर दिया गया है। यह बदलाव केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि मराठा इतिहास, साहस और विरासत का सम्मान है। छत्रपति संभाजी महाराज, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रमी पुत्र थे, उनके नाम से जुड़ा यह नया स्टेशन नाम क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक गौरव को और मजबूत करता है।
लंबे समय से स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों की ओर से यह मांग उठती रही थी कि शहर की पहचान उसके गौरवशाली इतिहास से जुड़ी हो। इस बदलाव ने न केवल जनता की भावनाओं का सम्मान किया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि उस विरासत को सहेजना और आगे बढ़ाना आवश्यक है जिसने महाराष्ट्र को अपनी विशिष्ट पहचान दी है। स्टेशन के नाम में यह परिवर्तन आने वाली पीढ़ियों को भी यह याद दिलाएगा कि मराठा साम्राज्य की शौर्यगाथाएं आज भी उतनी ही प्रेरणादायक हैं जितनी कभी थीं।
इस निर्णय से क्षेत्र में सांस्कृतिक आत्मगौरव की भावना और भी प्रबल हुई है। यह बदलाव इतिहास और आधुनिकता के संगम का प्रतीक है, जो हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।
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