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क्रौंच-युगल के 'शोक' को 'श्लोक' में परिणत कर, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के यशोगान को विश्व-भूमि पर प्रवाहित करने वाले, विश्व के प्रथम कवि, कुलगुरु महर्षि वाल्मीकि को उनके प्राकट्य-पर्व पर कृतज्ञ प्रणाम। आपकी काव्य-चेतना संपूर्ण कुल के लिए सदा सर्वदा प्रेरणा-स्रोत बनी रहेगी🙏।
2001 में आज ही के दिन मैंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। आज मैंने सरकार के मुखिया के रूप में ईश्वर रूपी जनता-जनार्दन की सेवा करने के अपने 25वें वर्ष में प्रवेश किया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ये सिद्धि, मुझे भारत की जनता का बहुत बड़ा आशीर्वाद है।
इन वर्षों में हर एक दिन, हर एक क्षण मैंने देशवासियों के जीवन को बेहतर करने और उनके विकास के लिए समर्पित भाव से काम करने का प्रयास किया है। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे आप सभी लोगों का निरंतर स्नेह मिला है।