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तुर्की के इब्राहिम युसेल ने धूम्रपान छोड़ने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने अपने सिर पर एक पिंजरा पहन लिया और उसकी चाबी अपनी पत्नी को दे दी। उनकी पत्नी केवल खाने के समय पिंजरा खोलती हैं।
कहा जा रहा है कि कुटाह्या के निवासी युसेल ने यह कठोर कदम तब उठाया, जब उनके पिता का निधन फेफड़ों के कैंसर के कारण हुआ। युसेल पिछले 26 सालों से रोजाना दो पैकेट सिगरेट पीते थे। इस बुरी आदत से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने यह अनोखा तरीका चुना।
उनकी कहानी दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई है।
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नैना जायसवाल भारत की एक टेबल टेनिस खिलाड़ी और पीएचडी धारक हैं. वह एशिया की सबसे कम उम्र की पोस्ट ग्रेजुएट हैं. नैना ने 8 साल की उम्र में 10वीं और 13 साल की उम्र में ग्रेजुएशन किया था. उन्होंने 15 साल की उम्र में मास्टर डिग्री हासिल की थी और 22 साल की उम्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की थी।
नैना का शोध "माइक्रोफाइनेंस से महिला सशक्तिकरण"
पर आधारित था। पढ़ाई के साथ-साथ नैना एक अंतरराष्ट्रीय स्तर
की टेबल टेनिस खिलाड़ी भी हैं। होमस्कूलिंग की मदद से उ
न्होंने पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बनाया।
नैना की कहानी साबित करती है कि मेहनत और लगन से
उम्र की हर सीमा को पार किया जा सकता है। यह हर युवा
के लिए प्रेरणा है।
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सुयश जाधव ने स्वीमिंग में कई मैडल जीते इनको अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया आशा हैं प्यार मिलेगा🙏🏾
क दुर्घटना में दोनों हाथ गंवाने के बावजूद, उन्होंने न केवल खुद को उठाया, बल्कि पानी में अपनी असाधारण प्रतिभा से भारत का नाम गर्व से ऊंचा किया।
सय्याश जाधव ने एशियन पैरा गेम्स 2018 में 50 मीटर बटरफ्लाई तैराकी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह उनकी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है, जिसने उन्हें भारतीय खेल जगत का एक सितारा बना दिया। उनके प्रदर्शन ने न केवल भारत के तैराकी मानचित्र को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।
उनकी कहानी केवल तैराकी की नहीं, बल्कि जीवन के प्रति एक जज्बे की है, जो हर मुश्किल को चुनौती मानता है और हर जीत को नई शुरुआत। सय्याश जाधव आज भारत के युवा खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श हैं। उनकी सफलता हमें यह सिखाती है कि जीवन में कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं होती जिसे दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से पार न किया जा सके।
हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री रामदरश मिश्र ने साहित्य के लगभग सभी विधाओं में अपनी सृजनशीलता का परिचय दिया है। कविता के साथ उन्होंने कहानी, उपन्यास, आलोचना, यात्रा संस्मरण और आत्मकथा लिखी। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें उदयराज स्मृति सम्मान और साहित्य अकादमी सम्मान से नवाज़ा गया। उनके साहित्य में भाव प्रवणता के साथ यथार्थ भी है।
पद्मश्री सम्मान 2025 के अवसर पर कवि का एक शेर याद आता है।
जहाँ आप पहुँचे छलांगें लगा कर
वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे-धीरे
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कुलशान सिंह ग्रेवाल, यह नन्हा बच्चा अपने छोटे कदमों से बड़ा इतिहास रच रहा है। कुलशान ने सिर्फ 1 मिनट 30 सेकंड में 15 सीढ़ियां चढ़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। इस उपलब्धि को वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक रूप से दर्ज किया है।
कुलशान ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि उम्र से नहीं, हौसले से मंजिलें तय होती हैं। इस नन्हे चैम्पियन ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। ❤️