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सवर्ण समाज में भी बहुत है ऐसे पार्टी प्रेमी, जिनको सिर्फ पार्टी में नाम, पद से मतलब है, उनको समाज से कोई लेना देना नहीं है, सहमत हो ? कमेंट में अपनी राय जरूर दे।

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ऐसे कैसे जीत गये महिला से तो कोई भी जीत नहीं सकता

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MBA in Sustainability Management | NICMAR Pune

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प्रेम के उपासक रमण महर्षि

प्रौढ़ावस्था में तो प्रायः सभी लोग प्रभु स्मरण करने लगते हैं; पर कुछ लोग अपने पूर्व जन्म के संस्कारवश बाल्यवस्था में ही प्रभु को समर्पित हो जाते हैं। महर्षि रमण के नाम से प्रसिद्ध हुए वेंकटरमण ऐसी ही एक विभूति थे। उनका जन्म तमिलनाडु के एक छोटे से गाँव तिरुचली में 30 दिसम्बर, 1879 को हुआ था। बचपन में वे बहुत सुन्दर और स्वस्थ थे; पर पढ़ने में उनकी रुचि बहुत कम थी। उन्हें विद्यालय भेजने में माँ को पसीने छूट जाते थे। बहुत अधिक सोने के कारण लोग उन्हें कुम्भकर्ण कहते थे।

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Diploma in Construction Management | NICMAR NCR

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भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘जग विक्रम’ 11 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार कर ओमान की खाड़ी में पहुंच गया है और अब भारत की ओर अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। इस जहाज में लगभग 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी और 24 नाविक सवार हैं, और इसके 14 अप्रैल तक गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है

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20 नवंबर 1942 को एक यात्री-मालवाहक जहाज मुंबई से दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हुआ लेकिन कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। जापानी नौसेना ने टॉरपीडो से हमला करते हुए इसे डुबो दिया उड़ा दिया। अरबों के खजाने के साथ डूबे इस जहाज का नाम एसएस तिलवा था लेकिन इसे 'इंडियन टाइटैनिक' के नाम से दुनिया में जाना गया। यह सैकड़ों लोगों और अरबों रुपए के खजाने के साथ समुद्र में समा गया था। इस खजाने को 75 वर्षों बाद खोजा गया तो ये पूरा मामला काफी समय तक एक मुश्किल कानूनी लड़ाई में फंसा रहा।
एसएस तिलवा के डूबने के समय इसमें 732 यात्रियों सहित 958 लोग थे। इस जहाज में 6,000 टन माल भरा था, जिसमें 60 टन चांदी की छड़ें (43 मिलियन डॉलर की कीमत) थीं। 23 नवंबर, 1942 को जापानी पनडुब्बी के टॉरपीडो से टक्कर के बाद यह जहाज सेशेल्स से 930 मील उत्तर पूर्व में हिंद महासागर में डूब गया। काफी लोग जहाज की जीवनरक्षक नौकाएं से बच गए लेकिन इसके बावजूद हादसे में 280 लोगों की जान गई। इस जहाज के साथ डूबे खजाने की तलाश लंबे समय तक चली। जहाज का कीमती सामान 75 साल बाद 2017 में ब्रिटिश कंपनी ने बरामद किया। इसके बाद इस पर लंबे समय तक अदालतों में विवाद चलता रहा। आखिरकार 2024 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण अफ्रीका को द्वितीय विश्व युद्ध के समय डूबे इस जहाज के अधिकार सौंप दिए।

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