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अखिल भारतीय #जाट_महासभा_बिजनौर के द्वारा जिलाधिकारी महोदया बिजनौर को ज्ञापन सौंपा गया
जिसमें #गंगा_एक्सप्रेस-वे हरिद्वार से बिजनौर होते हुए बदायूं की ओर जाना चाहिए क्योंकि देवभूमि उत्तराखंड के बाद पहला जनपद बिजनौर है जिस मैदानी क्षेत्र में गंगा 120 किलो मीटर से 125 किलोमीटर की दूरी में बहती है जो कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक क्षेत्रफल में गंगा बिजनौर में होकर जाती है और इसलिए अति आवश्यक है कि बिजनौर में गंगा एक्सप्रेसवे निकलना चाहिए और रही बात मुजफ्फरनगर या मेरठ की तो हम उसका विरोध नहीं कर रहे है लेकिन मुजफ्फरनगर बिजनौर से 45 से 50 किलोमीटर है और वहां पर मीरापुर तक एक्सप्रेस-वे बना हुआ है और बिजनौर से मुजफ्फरनगर एक्सप्रेस-वे बन रहा है और मीरापुर तक बन चुका है ऐसे ही 25 किलोमीटर बिजनौर से तथा मेरठ हाईवे से एक्सप्रेस-वे से मवाना क्षेत्र को 20 किलोमीटर और मेरठ क्षेत्र को 40 किलोमीटर की दूरी से इस हाईवे की दूरी से जोड़ सकते हैं जो कि मेरठ से बिजनौर तक हाईवे है जो चांदपुर गंगा पर पुल बना है उससे हाईवे से मेरठ की दूरी 26 किलोमीटर है बिजनौर जनपद के जलीलपुर ब्लाक में पड़ता है इसलिए बिजनौर से हाईवे निकालने में दूरी भी कम होगी और बहुत ज्यादा क्षेत्रफल को उसका लाभ होगा यदि यह हाईवे मेरठ मुजफ्फरनगर को निकाला जाता है तो बिजनौर वासियों को कोई लाभ नहीं होगा और कोई भी बिजनौर का व्यक्ति इस हाइवे के द्वारा प्रयागराज द्वारा जाने का काम नहीं करेंगे क्योंकि बिजनौर जनपद के आदमी जब तक 100 किलोमीटर बिजनौर हेडक्वार्टर से मेरठ मुजफ्फरनगर पहुंचेंगे तब तक वह मुरादाबाद पास कर चुके होंगे और वह लखनऊ होते हुए प्रयागराज पहुंच चुके होंगे बिजनौर वासियों के साथ बहुत नाइंसाफी होगी
जिसमें मुख्य रूप से अखिल भारतीय जाट महासभा बिजनौर जिलाध्यक्ष योगेन्द्र प्रधान ,किसान नेता अशोक चौधरी, युवा जिलाध्यक्ष संदीप चौधरी ,डॉ विपिन तोमर,युवा क्षेत्रीय सचिव रालोद चौधरी शोएब ,देशराज सिंह, धर्मवीर सिंह, गजेन्द्र जी, मोहित तोमर, आदित्य चौधरी, मास्टर विजयपाल सिंह, आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार हुए जेल से रिहा हाईकोर्ट ने दी ज़मानत।।
#सुशीलकुमार
#sushilkumar

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बहुत दु:खद
चाहरवाटी अकोला व भारत के लिए कभी ना पूरी होने वाली क्षति 😥
अकोला का लाल लेफ्टिनेंट शहीद आजाद चाहर मात्र 24 साल की उम्र मे देश की सेवा करते हुए शहीद हुए उनकी शहादत को नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳🙏

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फौजी ललित मोहन जोशी ने साल 2001 मे उत्तराखंड के संगीत जगत में अपना कदम रखा. फौजी ललित मोहन जोशी को तब पहचान मिली जब उनका टक - टकाटक कमला बाटुली लगाए, गाना हिट हुआ, आज भी ललित मोहन जोशी जी की बराबरी कोई नहीं कर सकता है दोस्तों, कुमाऊं के लोक गायन को भले ही आजकल के नए जमाने का संगीत कड़ी टक्कर दे रहा है। मगर हमारे अपने कुछ गायकों ने भी इस चैलेंज को बाखूबी स्वीकार किया है। फौजी ललित मोहन जोशी जी की वह हमेशा से कुमाऊंनी लोक गायकी को आगे ले जाने के पक्षधर रहे हैं। समय-समय पर उनके गाने आते रहते हैं। फौजी ललित मोहन जोशी का गानों के साथ-साथ फ़ौज की नौकरी भी करते हैं, ऐसे महान कलाकार को एक लाइक तो बनता है जिन्होंने अपने गानों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को संभाले रखा है💐💐
फ़ोटो साभार: फौजी ललित मोहन जोशी
#dainikcircle #uttarakhand

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