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बिहार का गौरव, अब कॉमनवेल्थ मंच पर!
बिहार के पूर्वी चंपारण के होनहार फेंसर शिवम कुमार का चयन अंडर-23 कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 की फॉइल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है।
यह प्रतिष्ठित चैंपियनशिप 9 से 19 अगस्त 2026 तक लागोस, नाइजीरिया में आयोजित होगी, जहाँ राष्ट्रमंडल देशों के शीर्ष फेंसर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
खेल विभाग, बिहार एवं बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की ओर से शिवम कुमार को हार्दिक शुभकामनाएं।
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#bajiprabhudeshpande
शूरवीर बाजीप्रभु देशपाण्डे / बलिदान दिवस - 13 जुलाई

शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दू पद-पादशाही की स्थापना में जिन वीरों ने नींव के पत्थर की भांति स्वयं को विसर्जित किया, उनमें बाजीप्रभु देशपाण्डे का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया)
पूण्य तिथि -14 जुलाई 2003
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह का जन्म 29 जनवरी, 1922 को ग्राम बनैल (जिला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश) के एक सम्पन्न एवं शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता कुँवर बलबीर सिंह अंग्रेज शासन में पहली बार बने भारतीय मुख्य अभियन्ता थे। इससे पूर्व इस पद पर सदा अंग्रेज ही नियुक्त होते थे। राजेन्द्र सिंह को घर में सब प्यार से रज्जू कहते थे। आगे चलकर उनका यही नाम सर्वत्र लोकप्रिय हुआ।
रज्जू भैया बचपन से ही बहुत मेधावी थे। उनके पिता की इच्छा थी कि वे प्रशासनिक सेवा में जायें। इसीलिए उन्हें पढ़ने के लिए प्रयाग भेजा गया; पर रज्जू भैया को अंग्रेजों की गुलामी पसन्द नहीं थी। उन्होंने प्रथम श्रेणी में एम-एस.सी. उत्तीर्ण की और फिर वहीं भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक हो गये।
उनकी एम-एस.सी. की प्रयोगात्मक परीक्षा लेने नोबेल पुरस्कार विजेता डा. सी.वी.रमन आये थे। वे उनकी प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए तथा उन्हें अपने साथ बंगलौर चलकर शोध करने का आग्रह किया; पर रज्जू भैया के जीवन का लक्ष्य तो कुछ और ही था।
प्रयाग में उनका सम्पर्क संघ से हुआ और वे नियमित शाखा जाने लगे। संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी से वे बहुत प्रभावित थे। 1943 में रज्जू भैया ने काशी से प्रथम वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण लिया। वहाँ श्री गुरुजी का ‘शिवाजी का पत्र, जयसिंह के नाम’ विषय पर जो बौद्धिक हुआ, उससे प्रेरित होकर उन्होंने अपना जीवन संघ कार्य हेतु समर्पित कर दिया। अब वे अध्यापन कार्य के अतिरिक्त शेष सारा समय संघ कार्य में लगाने लगे। उन्होंने घर में बता दिया कि वे विवाह के बन्धन में नहीं बधेंगे।

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ऐ वक़्त इस दौर में जीने का तरीका सीखा दे,
ना ज़्यादा, ना कम, जरूरत भर का हिसाब बता दे।

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क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनशन को अब फिल्म '3 इडियट्स' के अभिनेता ओमी वैद्य का भी समर्थन मिला है। फिल्म में 'चतुर' का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्य ने वीडियो जारी कर कहा कि वह 'फुंसुक वांगड़ू को मरते नहीं देख सकते' और सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में खड़े हैं।
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