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कँटीले तार, ड्रोन से आँसू गैस, कीले और बंदूक़ें… सबका है इंतज़ाम,
तानाशाही मोदी सरकार ने किसानों की आवाज़ पर जो लगानी है लगाम !
याद है ना “आंदोलनजीवी” व “परजीवी” कहकर किया था बदनाम, और 750 किसानों की ली थी जान ?
10 सालों में मोदी सरकार ने देश के अन्नदाताओं से किए गए अपने तीन वादे तोड़े हैं —
1️⃣ 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी
2️⃣ स्वामीनाथन रिपोर्ट के मुताबिक़ Input Cost + 50% MSP लागू करना
3️⃣ MSP को क़ानूनी दर्जा
अब समय आ गया है 62 करोड़ किसानों की आवाज़ उठाने का।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आज कांग्रेस पार्टी “किसान न्याय” की आवाज़ उठाएगी। हमारा किसान आंदोलन को पूरा समर्थन है।
न डरेंगे, न झुकेंगे !
असल किसान नहीं, ये पूँजीपति हैं जो किसानों के नाम पर राजनीतिक दलों की दलाली करते हैं।
देश में 92% जोत लघु व सीमांत कृषकों की हैं, जिन्हें किसान राजनीति से कोई वास्ता नहीं। आंदोलन कर रहे स्वार्थी तत्व, छोटे किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
खेती किसानी की आड़ में ये लोग टैक्स भी नहीं भरते और कृषक सब्सिडी का पूरा लाभ भी उठाते हैं जो छोटे किसानों के लिए होनी चाहिए।
किसान संगठनों के नाम पर चंदाबाज़ी व राजनीतिक दलों की दलाली अलग से।
इन पूँजीपति कथित किसानों को आमजन की समस्याओं से भी कोई सरोकार नहीं।
ये नितांत रूप से मोदी विरोधी की राजनीति का अंग हैं।