2 jr - Vertalen

कंटेनर में हल्दी को प्रभावी ढंग से उगाने के लिए टिप्स।

मौसम
भारत में हल्दी की खेती दो मौसमों फरवरी-मई और अगस्त-अक्टूबर में की जाती है। सर्दियों का समय सबसे उत्तम है।

राइजोम का चुनाव
स्वस्थ, ताज़ा और मोटे हल्दी राइजोम का चयन करें।

सही कंटेनर का चुनाव
हल्दी के पौधों की पत्तियाँ बड़ी होती हैं और उनकी ऊंचाई 3 फीट तक की हो सकती है, इसलिए एक बड़ा कंटेनर चुनें जो कम से कम 12 इंच गहरा और 12-18 इंच व्यास का हो। सुनिश्चित करें कंटेनर में पर्याप्त जल निकासी के छेद हों।

मिट्टी तैयार करना
अच्छी जल निकासी वाली, जैविक-समृद्ध पॉटिंग मिश्रण का उपयोग करें। मिट्टी को समृद्ध करने के लिए इसमें कुछ जैविक खाद या अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद मिलाएं, जिससे बढ़ते पौधों के लिए इष्टतम पोषक तत्व सुनिश्चित हो सकें।

राइजोम को लगाना
राइजोम की कलियों को ऊपर की ओर रखते हुए मिट्टी में 2 इंच गहराई में रोपें।

इष्टतम विकास परिस्थितियाँ
हल्दी गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में पनपती है। कंटेनर को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ उसे प्रतिदिन कम से कम 4-6 घंटे अप्रत्यक्ष सूर्य का प्रकाश मिल सके। मिट्टी में नमी बनाए रखें लेकिन अधिक पानी देने से बचें। हल्दी की वृद्धि के लिए आदर्श तापमान 68-86°F (20-30°C) के बीच का है। हल्दी की फसल 7 से 10 महीने में तैयार होती है।

हल्दी की उन्नत किस्में।

सुगंधम
हल्दी की ये किस्म 200 से 210 दिनों में तैयार हो जाती है। इस हल्दी का आकार थोड़ा लंबा होता है और रंग हल्का पीला होता है। किसान इस किस्म से प्रति एकड़ 80 से 90 क्विंटल उपज प्राप्त कर सकते हैं।

आर एच 5
हल्दी की ये किस्म करीब 80 से 100 सेंटीमीटर ऊंचे पौधों वाली होती है। इस किस्म को तैयार होने में करीब 210 से 220 दिन लगते है। इस किस्म से 200 से 220 क्विंटल प्रति एकड़ हल्दी की पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

सुदर्शन
हल्दी की ये किस्म आकार में छोटी होती है, लेकिन दिखने में खूबसूरत होती है। 230 दिनों में फसल पककर तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ 110 से 115 क्विंटल की पैदावार होती है।

सोरमा
हल्दी की इस किस्म के कंद अंदर से नारंगी रंग के होते हैं। इस किस्म को खुदाई के लिए तैयार होने में 210 दिन लगता है। इससे प्राप्त होने वाली उपज की बात करें तो इस किस्म से प्रति एकड़ करीब 80 से 90 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो सकती है।

पीतांबर
हल्दी की इस किस्म को केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध अनुसंधान संस्थान विकसित किया है। हल्दी की सामान्य किस्में फसल 7 से 9 महीने में तैयार होती हैं लेकिन पीतांबर 5 से 6 महीने ही तैयार हो जाती है। इस किस्म में कीटों का ज्यादा असर नहीं पड़ता ऐसे में अच्छी पैदावार होती है। एक हेक्टेयर में 650 क्विंटल तक पैदावार हो जाती है।

image
2 jr - Vertalen

लहसुन न केवल व्यंजनों में अपने स्वादिष्ट योगदान के लिए बल्कि अपने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभों के लिए भी व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली सामग्री के रूप में जाना जाता है। विटामिन ए, बी, सी और ई, एंटीऑक्सिडेंट, कैल्शियम, पोटेशियम, जिंक, सेलेनियम और एलिसिन जैसे शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीबायोटिक से भरपूर लहसुन एक सुपरफूड और न्यूट्रास्युटिकल के रूप में अपनी स्थिति अर्जित करता है। यह आपकी रसोई और स्वास्थ्य व्यवस्था में एक मूल्यवान स्थान रखता है।

घर पर गमले में लहसुन की खेती करने की सरल विधि।

सामग्री जिसकी आपको जरूरत है:-

गमले की मिट्टी
लहसुन की एक कली
एक गमला

लहसुन उगाने के लिए चरण:- एक बड़ा गमला खरीदें, विशेषकर जल निकासी छेद वाला, और इसे उच्च गुणवत्ता वाली गमले वाली मिट्टी से भरें। लहसुन की कलियों को सावधानी से लहसुन के सिर से अलग करें, यह सुनिश्चित करें कि वे ताजी और क्षतिग्रस्त न हों।

सिरों को खुला रखते हुए लगभग 2.5 सेमी गहराई में रोपें। प्रत्येक के बीच 10 सेमी की दूरी बनाए रखें। ऊपर गमले की मिट्टी की एक पतली परत (मुश्किल 1 सेमी) डालें।

पॉट को धूप वाली जगह पर रखें और हल्का पानी डालें। लहसुन को न्यूनतम पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए थोड़ी नमी बनाए रखें। लहसुन की कोंपलों को बढ़ते हुए देखें। यदि फूल दिखाई दें, तो लहसुन का स्वाद बनाए रखने के लिए उन्हें तुरंत हटा दें।

लहसुन की कटाई तब करें जब पौधों में 5 या 6 पत्तियाँ हों और वे पीले होकर मुरझाने लगें। कटे हुए लहसुन को लगभग एक सप्ताह तक किसी ठंडी, सूखी जगह में सुखाएं।

ध्यान रखें कि लहसुन को उगने में 8 से 10 महीने लगते हैं, शुरुआती वसंत या पतझड़ में रोपण का इष्टतम समय होता है। इसके अतिरिक्त, लहसुन की हरी पत्तियां खाने योग्य भी होते है। इन सरल चरणों का पालन करके, आप घरेलू लहसुन की निरंतर आपूर्ति का आनंद ले सकते है

image
2 jr - Vertalen

केला पाउडर का उपयोग मधुमेह, बच्चों के आहार, हृदय रोग, पाचन, वजन बढ़ाने-घटाने, cattle फ़ूड, केक, बिस्कुट और सौंदर्य उत्पाद के निर्माण में किया जाता है।

व्यवसाय शुरू करने के लिए 2 मशीनों की आवश्यकता होती है। केले सुखाने और पॉउडर बनाने के लिए। मशीनें ऑनलाइन/ऑफलाइन आसानी से उपलब्ध है। घरेलू स्तर पर चिप्स काटने की मशीन, चलनी, मिक्सर ग्राइंडर और औद्योगिक स्तर पर लघु उद्योग हेतु 500 sqft की जगह के साथ 4 मशीन चिप्स काटने, पानी सुखाने, हॉट एयर और पाउडर बनाने की।

खाने वाले माल की स्वक्षता और गुणवत्ता के लिए कच्चा माल अगर Nendran वेरायटी के केले का हो तो मुनाफा भी अधिक होगा। वहीं अगर सौंदर्य उत्पाद बनाने है तो सामान्य कच्चा माल भी उचित है।

केले का पाउडर बहुत ही आसानी से बनाया जा सकता है। सर्वप्रथम, हरे केले को सोडियम हाइपोक्लोराइट घोल में 10 ग्राम/ लीटर से धोकर, फिर कच्चे केले को हाथ से छीलकर तुरंत साइट्रिक एसिड के घोल 1 ग्राम/लीटर में 5 मिनट के लिए डुबो दिया जाता है। 5 मिनट बाद केले निकालकर छोटे टुकड़े 4 मिमी-मोटाई में काट लिया जाता है और एंजाइमी ब्राउनिंग से बचने के लिए वापस घोल में फिर से डूबा दिया जाता है। बाद में स्लाइस को रूम टेम्परेचर या धूप में या हॉट एयर ओवन में सुखाने के लिए 60 ℃ पर 24 घंटो तक रखा जाता है। बारीक पाउडर बनाने के लिए केलों को मिक्सर में पीस लिया जाता हैं। पाउडर को पॉलीइथाइलीन बैग या सीसे की बॉटल में पैक करके 20-25 डिग्री सेल्सियस रूम टेम्परेचर के तापमान पर संग्रहीत किया जाता है।

केले के पाउडर का बिज़नेस आप मात्र 10-15 हजार रुपए में शुरू कर सकते है। जितना बारीक पाउडर उतना जादा मुनाफा। 1 किलो कच्चे केले से लगभग 300 ग्राम पाउडर तैयार होता है। बाजार में एक किलो पाउडर की कीमत 1400 रूपये तक है। आप प्रत्येक दिन 5000 रूपये तक कमा सकते है। पाउडर की लागत लगभग 75-125 तक आती है। इसे आप ऑनलाइन मार्केट प्लेस पर खुद की ब्रांडिंग करके भी सीधे बेच भी सकते हैं जैसे Amazon, Flipkart, Snapdeal, Paytm Mall, Reliance Retail, Grofers, Big Basket, आदि। साथ ही इसे ऑफलाइन मार्किट जैसे फ़ूड प्रोडक्ट्स कंपनी, बेकरी और जिम में भी सप्लाई कर सकते हैं।

लाइसेंस पंजीकरण:-
घरेलू स्तर पर fssai, लघु उद्योग में fssai, gst, trade, निर्यात के लिए iec, साथ ही नगर गिगम और गुमास्ता भी लेने रहेंगे।

केले का बचा हुआ छिलका 3 अतरिक्त उत्पाद दे सकता है, जैसे कि मुर्गी, मछली का चारा, वर्मीकम्पोस्ट इत्यादि।

image
2 jr - Vertalen

गर्मियों में पौधों को निरंतर नमी प्रदान करने तथा उनकी वृद्धि और हरियाली बनाए रखने के लिए आज मैं आपके साथ पौधों को पानी देने की एक बहुत ही सरल तकनीक साझा कर रहा हूँ, जिसके परिणाम आश्चर्यजनक हैं।
गोबर के उपलों के बारे में तो आप जानते ही होंगे। आपको बस इतना करना है कि लगभग 200 ग्राम वजन का एक छोटा सा गाय के गोबर से तैयार उपले/कंड़े का टुकड़ा लें और उसे पहली बार पानी देने से पहले 30 लीटर पानी में 2 से 3 घंटे के लिए छोड़ दें। 2-3 घंटे में पानी का रंग बदल जाएगा। अब आप इस पानी का इस्तेमाल सीधे पौधों को पानी देने के लिए कर सकते हैं।
पहली बार पानी देने के बाद दूसरी बार भी उसी उपले/कंड़े के टुकड़े को 30 लीटर पानी में डालकर 2 दिन के लिए छोड़ दें। 2 दिन बाद पानी फिर से तैयार हो जाएगा। इसे 2 दिन के अंतराल पर पहले की तरह ही पानी देने के लिए इस्तेमाल करें।
दूसरे प्रयोग के तुरंत बाद तीसरे प्रयोग के लिए उसी गीले गोबर के उपले/कंड़े को कुचलकर 30 लीटर पानी में फिर से 2 दिन के लिए डाल दें। 2 दिन बाद पानी का रंग फिर से बदल जाएगा। अब इसे छानकर पौधों में इस्तेमाल करें और चूरे को सुखाकर किसी पॉटिंग मिक्स में या खाद बनाने के लिए इस्तेमाल करें।
इस तरह आप पूरे सप्ताह में एक दिन छोड़कर हर दूसरे दिन पानी में उपले/कंड़े का एक छोटा टुकड़ा डालकर पौधों को पानी के साथ-साथ पोषण भी देते रह सकते हैं। इस सरल विधि से पौधों को पानी में मौजूद पोषक तत्वों के अलावा उपले/कंड़े में मौजूद एनपीके, सूक्ष्म पोषक तत्व और उपयोगी बैक्टीरिया का पोषण भी मिलता रहेगा। यह विधि कुछ उपलों से तरल खाद बनाने की तकनीक जैसी ही है। जिसे तैयार होने में करीब 5 से 7 दिन का समय लगता है। पर इस विधि में आप लगातार बिना समय गवाये पूरे साल पौधों को पानी दे सकते हैं।
पौधों को पानी आप या तो सुबह 8 बजे तक या फिर शाम को 5 बजे तक में देदे हैं। जिस बाल्टी में आप ने उपले/कंड़े को भिगो कर रखा हैं उसे हमेशा छाया में ही रखें।
आज का ये लेख आप को कैसा लगा। अपनी राय जरूर दे।
लगातार ऐसे ही उपयोगी जानकारी प्राप्त करने के लिए फॉलो करें।
#watering #gardening #foryou #fertilizer #relatable #gardeninghacks #useful #summer2024 #usefultips

image
2 jr - Vertalen

रसोई में भोजन बनाना
छोड़ने का दुष्परिणाम जानिए।
अमेरिका में क्या हुआ, जब
घर में भोजन बनाना बंद हो गया ?
1980 दशक के
अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने
अमेरिकी लोगों को चेतावनी दी, कि
यदि वे परिवार में आर्डर देकर
बाहर से भोजन मंगवायेंगे, तो
परिवार व्यवस्था धीरे-धीरे
समाप्त हो जाएगी.

साथ ही दूसरी चेतावनी दी, कि
यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण
घर के बुजुर्गों के स्थान पर
बाहर से व्यवस्था की तो यह भी
परिवार व्यवस्था के लिए घातक होगा.
लेकिन बहुत कम लोगों ने
उनकी सलाह मानी.
घर में भोजन बनाना
लगभग बंद हो गया है, और
बाहर से मंगवाने की आदत
(यह अब नॉर्मल है),
अमेरिकी परिवारों के
विलुप्त होने का कारण बनी है,
जैसा कि ....
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी.

प्यार से भोजन बनाना, मतलब
परिवार के सदस्यों के साथ
प्यार से जुड़ना.
● पाक कला ●
अकेले भोजन बनाना नहीं है,
बल्कि ... केंद्र बिंदु है,
पारिवारिक संस्कृति का.

अगर कोई किचन नहीं है,
तो बस एक बेडरूम है,
यह परिवार नहीं है,
यह एक हॉस्टल है.
उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जानें
जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और
सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है.
★ 1971 में, लगभग 72%
अमेरिकी परिवारों में
केवल पति और पत्नी थे,
जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे.
2020 तक, यह आँकडा
22% पर आ गया है.
★ पहले साथ रहने वाले परिवार
अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में
रहने लगे हैं.
★ अमेरिका में, 15% महिलाएं
एकल महिला परिवार के रुप में
रहती हैं.
★ 12% पुरुष भी
एकल परिवार के रूप में रहते हैं.
★ अमेरिका में 19% घर या तो
अकेले रहने वाले पिता या
माता के स्वामित्व में हैं.
★ अमेरिका में आज पैदा होने वाले
सभी बच्चों में से 38%
◆ अविवाहित महिलाओं से
पैदा होते हैं.
उनमें से आधी लड़कियाँ हैं,
जो स्कूलों में जा रही हैं.
★ संयुक्त राज्य अमेरिका में
लगभग 52% पहली शादियाँ
तलाक में परिवर्तित होती हैं.
67% दूसरी शादियाँ भी
समस्याग्रस्त हैं.

अगर किचन नहीं है और सिर्फ
बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है.
संयुक्त राज्य अमेरिका
विवाह की संस्था के टूटने का
एक उदाहरण है.
हमारे आधुनिकतावादी भी
अमेरिका की तरह दुकानों से या
ऑनलाईन भोजन ख़रीद रहे हैं
और खुश हो रहे हैं कि
भोजन बनाने की समस्या से
हम मुक्त हो गए हैं.
इस कारण भारत में परिवार
धीरे-धीरे
अमेरिकी परिवारों की तरह
नष्ट हो रहे हैं.
जब परिवार नष्ट होते हैं , तो
मानसिक और शारीरिक
दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं.
बाहर का खाना खाने से
अनावश्यक खर्च के अलावा
शरीर मोटा और संक्रमण के प्रति
संवेदनशील हो सकता है.
इसलिए ... घर पर भोजन बनाना,
परिवार के सुखी रहने का
एकमात्र कारण नहीं है.
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी
देश की अर्थव्यवस्था के लिए
आवश्यक है.
इसलिए ....
हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग,
हमें बाहर के भोजन से
बचने की सलाह देते थे.
लेकिन आज
हम अपने परिवार के साथ
रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं.
स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से
अजनबियों द्वारा पकाए गए
भोजन को ऑनलाइन
ऑर्डर करना और खाना,
उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय
लोगों के बीच
फैशन बनता जा रहा है.

दीर्घकालिक आपदा होगी -->
ये आदत.
अगर वो ऑनलाइन कंपनियाँ
जो मनोवैज्ञानिक रूप से
तय करती हैं , कि हमें
क्या खाना चाहिए.
हमारे पूर्वज किसी भी यात्रा पर
जाने से पहले घर से भोजन
बनाकर ही ले जाते थे.
इसलिए ... भोजन घर में ही बनायें,
मिल-जुलकर खायें और
खुशी से रहें.
पौष्टिक भोजन के अलावा,
इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।

image

2 jr - Vertalen - Facebook

Wait for Rohit Sharma .
.
#rohitsharma? #cricketnation #teamindia #india #viratkohli #viralvideofb



https://fb.watch/rpM9hkiCWx/

2 jr - Vertalen

जो 70 साल मे नही हुआ वो 10 साल में हो गया !!

image
2 jr - Vertalen

हीरो हिरोहिन को सब लाईक करते है आज देखते है श्री राम को कितना लोग लाईक करते है ♥️
.
.
.
bhagya lashkmi today episode
bhagya laxmi today episode full
bhagya lakshmi serial update
bhagya lakshmi today episode news
bhagya lakshmi today episodes live
bhagya laxmi today episode full
bhagya laxmi aaj ka episode live
bhagyalakshmi today episode
Police
bhagya lakshmi aaj ka episode live
bhagyalakshmi latest episode
bhagyalakshmi latest promo
bhagyalakshmi kal ka episode
bhagyalakshmi yesterday full episode
bhagya lakshmi tomorrow full episode
bhagya laxmi new episode
#bhagyalakshmi #bhagyalaxmi
#bhagyalakshmiantv #bhagyalakshmifullepisodetoday #bhagyalakshmiserial

image
2 jr - Vertalen

https://ekbaarphirsemodisarkar.....com/modimeter2/?utm

फिर एक बार मोदी सरकार