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उदयभान सिंह राठौड़ का जन्म सन् 1635 ई में भिनाई रियासत मे हुआ था। वे राजपुताने के सबसे बलशाली राजपूत योद्धा थे, उनकी तलवारबाजी में उनके सामने कोई टिक नहीं पाता था। औरंगजेब ने जयपुर रियासत के शासक राजा जय सिंह के कहने पर उदयभान सिंह राठौड़ को महाराष्ट्र के कोंडाना किले के रक्षक पद पर तैनात थे।
वीर तानाजी मालुसरे मराठा सेना के लीडर थे। उन्हें छत्रपती शिवाजी महाराज ने कोंढाणा पर हमला करने के लिए भेजा। सेना के साथ हमला के लिए पहुंचे। वहां पर पहुंचे तो उनका सामना किले की रक्षा में तैनात वहां पर उदयभान सिंह राठौड़ से हुआ। तानाजी ने बहादुरी से युद्ध किया। उदयभान से घमासान युद्ध के दौरान तानाजी घायल हो गए। अंत में किला तानाजी ने जीत लिया। लेकिन तानाजी गंभीर रूप से घायल होने के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए। पर उदयभान सिंह राठौड़ गंभीर रूप से घायल होने के बाद सूर्याजी मालुसरे के हतो मारे गये।

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आपातकाल...

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Sidhu moose Wala Mother Charan Kaur Blessed with Second Baby Boy With husband Balkaur Singh #sidhumoosewala #charankaur #balkaursingh #ytshort #shortsfeed #ytshortsvideo #short #yt #ytshort

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यह मुन्नी है। बिहार के दरभंगा ज़िले से आकर परिवार के साथ नोएडा बस गई है। पति मेडिकल स्टोर में काम करता है। दो बच्चे हैं जिनको अच्छी शिक्षा दिलाकर , पढ़ालिखा कर काबिल और कामयाब बनाने का सपना है उसका, जिसके लिए घर से बाहर निकल कर मेहनत करती है। नोएडा की एक हाउसिंग सोसायटी के बाहर सड़क पर बढ़िया चाय-समोसे बनाती है। घर की बनाई मठरी भी रखती है। दोपहर में आ जाती है और रात तक अपने मोर्चे पर डटी रहती है। एक छोटी सी मेज पर गैस का चूल्हा रखकर काम करती थी लेकिन एक दिन नोएडा अथॉरिटी के लोग आकर इनकी खोली उजाड़ गये। उसने हिम्मत नहीं हारी और ज़मीन पर ही चूल्हा रखकर काम करती रही। थोड़ी दौड़धूप के बाद अथॉरिटी के अफसर ने उसकी मेज वापस कर दी । बहुत आशावादी है, हमेशा मुस्कुराकर, मीठे लहजे में बात करती है। महिला दिवस का मतलब उसे नहीं मालूम। 8 मार्च की तारीख सही मायनों में मुन्नी जैसी करोड़ों बेसहारा मेहनतकश महिलाओं की नामालूम कहानियों से ही आबाद है।

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यह मुन्नी है। बिहार के दरभंगा ज़िले से आकर परिवार के साथ नोएडा बस गई है। पति मेडिकल स्टोर में काम करता है। दो बच्चे हैं जिनको अच्छी शिक्षा दिलाकर , पढ़ालिखा कर काबिल और कामयाब बनाने का सपना है उसका, जिसके लिए घर से बाहर निकल कर मेहनत करती है। नोएडा की एक हाउसिंग सोसायटी के बाहर सड़क पर बढ़िया चाय-समोसे बनाती है। घर की बनाई मठरी भी रखती है। दोपहर में आ जाती है और रात तक अपने मोर्चे पर डटी रहती है। एक छोटी सी मेज पर गैस का चूल्हा रखकर काम करती थी लेकिन एक दिन नोएडा अथॉरिटी के लोग आकर इनकी खोली उजाड़ गये। उसने हिम्मत नहीं हारी और ज़मीन पर ही चूल्हा रखकर काम करती रही। थोड़ी दौड़धूप के बाद अथॉरिटी के अफसर ने उसकी मेज वापस कर दी । बहुत आशावादी है, हमेशा मुस्कुराकर, मीठे लहजे में बात करती है। महिला दिवस का मतलब उसे नहीं मालूम। 8 मार्च की तारीख सही मायनों में मुन्नी जैसी करोड़ों बेसहारा मेहनतकश महिलाओं की नामालूम कहानियों से ही आबाद है।

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यह मुन्नी है। बिहार के दरभंगा ज़िले से आकर परिवार के साथ नोएडा बस गई है। पति मेडिकल स्टोर में काम करता है। दो बच्चे हैं जिनको अच्छी शिक्षा दिलाकर , पढ़ालिखा कर काबिल और कामयाब बनाने का सपना है उसका, जिसके लिए घर से बाहर निकल कर मेहनत करती है। नोएडा की एक हाउसिंग सोसायटी के बाहर सड़क पर बढ़िया चाय-समोसे बनाती है। घर की बनाई मठरी भी रखती है। दोपहर में आ जाती है और रात तक अपने मोर्चे पर डटी रहती है। एक छोटी सी मेज पर गैस का चूल्हा रखकर काम करती थी लेकिन एक दिन नोएडा अथॉरिटी के लोग आकर इनकी खोली उजाड़ गये। उसने हिम्मत नहीं हारी और ज़मीन पर ही चूल्हा रखकर काम करती रही। थोड़ी दौड़धूप के बाद अथॉरिटी के अफसर ने उसकी मेज वापस कर दी । बहुत आशावादी है, हमेशा मुस्कुराकर, मीठे लहजे में बात करती है। महिला दिवस का मतलब उसे नहीं मालूम। 8 मार्च की तारीख सही मायनों में मुन्नी जैसी करोड़ों बेसहारा मेहनतकश महिलाओं की नामालूम कहानियों से ही आबाद है।

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2 سنوات - ترجم

"एक वर्ग अलग" की परिभाषा को इससे बेहतर तरीके से नहीं समझा जा सकता है।

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अंतिम फेस-ऑफ के लिए तैयार हो जाओ!
इतिहास 2 दिन में सामने आएगा
बड़े पैमाने पर सभी रोमांच वितरित करना।
तो क्या आप भावनाओं और इतिहास के टकराव के लिए तैयार हैं?

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