सिंगर भुवना शेषन ने एक इंटरव्यू के दौरान वैरामुथु रामासामी के बारे में बात करते हुए कहा है कि वैरामुथु पर 17 लड़कियों ने आरोप लगाए हैं, लेकिन उनमें से केवल 4 ने ही अपना चेहरा दिखाया है।
#vairamuthu #bhuvanaseshan
Entdecken BeiträgeEntdecken Sie fesselnde Inhalte und vielfältige Perspektiven auf unserer Discover-Seite. Entdecken Sie neue Ideen und führen Sie bedeutungsvolle Gespräche
सिंगर भुवना शेषन ने एक इंटरव्यू के दौरान वैरामुथु रामासामी के बारे में बात करते हुए कहा है कि वैरामुथु पर 17 लड़कियों ने आरोप लगाए हैं, लेकिन उनमें से केवल 4 ने ही अपना चेहरा दिखाया है।
#vairamuthu #bhuvanaseshan
Mika Singh
मीका सिंह को जन्मदिन की शुभकामनाएं
#mikasingh #happybirthdaymikasingh
सुंदर पिचाई को जन्मदिन की शुभकामनाएं
#SundarPichai #HappyBirthdaySundarPichai #Google
वैदिक परंपरा में सेंगोल को "राजदण्ड" कहा जाता है। जिसे राजपुरोहित राजा को देता है।
वैदिक परंपरा में दो तरह के सत्ता के प्रतीक हैं।
राजदंड राजा के पास होता था और धर्मदंड राजपुरोहित के पास।
प्राचीन समय में ये राजा की शक्ति और सत्ता का प्रतीक माना जाता था।
सेंगोल शब्द सुनने में नया लग सकता है पर इसका प्रयोग वैदिक काल से राजपुरोहित सत्ता के हस्तांतरण के समय करते आ रहे हैं।
आचार्य विष्णुगुप्त ने भी चंद्रगुप्त के हाँथों यही राजदंड सौंप कर उन्हें मगध का सम्राट घोषित किया था।
जब हमें रटाया जाता है कि पेशवाओं के राज में दलित गले में मटकी और पीठ पर झाड़ू बांध कर घूमते थे ऐसे में हमें चंद्रपुर के आदिवासी क्रांतिवीर ‘बाबुराव पुल्लेसूर शेडमाके’ को पढ़ना चाहिए।
बाबुराव आदिवासी गोंड जाति से आते थे। उनका परिवार एक जमींदार परिवार था लेकिन 1818 में तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठों की हार के बाद उनका पूरे क्षेत्र मराठों से अंग्रेजों के पास चला गया जिसके बाद अंग्रेजों ने नई नीतियां बनाकर उनके जीवन में घुसपैठ शुरू कर दी।
बिल्कुल वैसे ही जैसे वो झारखंड के संथाल में कर रहे थे। बाद में 1857 के समय में अपने साथियों के साथ बाबूराव ने अंग्रेज़ो के खिलाप संघर्ष शुरू किया जो एक साल तक चला बाद में 1857 की क्रांति असफल होने पर बाबूराव को फांसी पर चढ़ा दिया गया।
आज दलितवादी जश्न मनाते हैं कि कैसे भीमा कोरेगांव में अंग्रजों ने मराठा सेना को हरा दिया था और फिर अंग्रेजों का राज आया जिससे मनुवाद से आजादी मिली।
वो अलग बात कि बाद में अंग्रेजों ने ही मार्शल रेस थ्योरी लाकर उन्हीं महारों के ही सेना में भर्ती होने पर रोक लगा दी जिनकी वजह से वे कोरेगांव युद्ध जीते थे।
और सच्चाई यह है कि उस पेशवा राज में बाबूराव जमींदार यानि राजा भी थे और वनवासी हिन्दू भी और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला क्रान्तिकारी भी।
आज इन्ही गोंड जाति को दो बोरा चावल पर ईसाई बनाया जा रहा है क्योंकि उन्हें रटा दिया गया कि हिन्दू धर्म में तुम्हारा शोषण हुआ है।
जबकि गोंड जाति के राजा और जमींदार हुआ करते थे जिनका बाद में शोषण वो अंग्रेज कर रहे थे, जिसकी जीत का जश्न मनाया जाता है।
बाबूराव हमारे हीरो है