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अपने इतिहास को जानकर ही इतिहास बनाएंगे।
भारत के इतिहासकारों ने बहुजन समाज के इतिहास को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों से सदैव बाहर रखा है इसी का नतीजा है कि हम अपने इतिहास से अपरिचित हैं।
सम्यक प्रकाशन ने बहुत ही शानदार बहुजन वर्णमाला प्रकाशित किया है यह किताब बहुजन समाज के हर घर के बच्चों के हाथ में होनी चाहिए।

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King Kohli 👑

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Gomukh-Tapovan is one the best treks in India. During the trek one can get a mighty view of Mt. Shivling right from base to its summit.

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तस्वीर में दारा सिंह के साथ उनके छोटे भाई सरदार सिंह रंधावा हैं। आज इनकी पुण्यतिथि है। 21 अक्टूबर 2013 को, बड़े भाई दीदार सिंह रंधावा उर्फ दारा सिंह की मृत्यु के लगभग एक साल बाद सरदार सिंह रंधावा, जिन्हें रंधावा के नाम से जाना गया था, उनका भी देहांत हो गया था। कहते हैं कि रंधावा कद-काठी में दारा सिंह से भी तगड़े थे। तस्वीर में देखकर ऐसा लग भी रहा है।
बड़े भाई की तरह ये भी पहलवान थे। और इन्होंने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुश्तियां लड़ी हैं। साल 1952 में इनका कुश्ती करियर शुरू हुआ था। अपने दौर के कई नामी इंटरनेशनल पहलवानों से इन्होंने कुश्तियां लड़ी थी। जिस दौर में दारा सिंह जी वर्ल्ड चैंपियन बने थे, उस वक्त रंधावा भारत के चैंपियन थे।
बड़े भाई के नक्शे-कदम पर चलते हुए रंधावा ने भी फिल्मों में करियर बनाने की कोशिश की। हालांकि यहां उन्हें बड़े भाई जैसी सफलता ना मिल सकी। 1963 में आई फिल्म आवारा अब्दुल्लाह नामक फिल्म में इन्होंने पहली दफा एक्टिंग की थी। एक्टिंग उतनी अच्छी नहीं कर सके, और छोटे-मोटे व निगेटिव शेड्स वाले रोल्स तक ही महदूद रह गए।
रंधावा ने एक्ट्रेस मुमताज़ की बहन मल्लिका से शादी की थी। इनका एक बेटा शाद रंधावा और बेटी शहनाज़ हैं। इनका बेटा शाद रंधावा भी एक्टर है। और शाद रंधावा ने कुछ बड़ी धांसू फिल्मों में काम किया है। जैसे वो लम्हे(2006), आवारापन(2007), आशिकी 2(2013), एक विलेन(2014), सत्यमेव जयते 2(2021) और एक विलेन रिटर्न्स(2022)।
भारत का नाम कुश्ती में विश्व पटल पर रोशन करने वाले सरदार सिंह रंधावा को किस्सा टीवी नमन करता है।

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