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Since 2014, inclusive and holistic development has become quintessential to India's policy framework, weaving together national growth and aspirations of a billion+ Indians!

The second module, "Vikas Yatra', brings to the light Modi Govt's multi-dimensional successes across 14 diverse sectors in the last 9 years.

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नया भारत - नई दिशा,
सुनिश्चित हुई महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा!

देश की नारी शक्ति ही नए भारत का आधार है... इसी सोच के साथ केंद्र की भाजपा सरकार निरंतर महिलाओं की आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित कर उन्हें और सशक्त कर रही है।

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बेहतर आज - उज्ज्वल कल
मध्यम वर्ग का जीवन हुआ सरल!

₹7 लाख तक की आय पर फुल टैक्स रिबेट।

उच्च शिक्षा के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता।

अब तक देश के 20 शहरों में मेट्रो सेवा, जबकि वर्ष 2014 तक केवल 5 शहरों में मेट्रो सेवा थी।

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सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया!

प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा सरकार "सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया" के मंत्र पर चलकर आजादी के अमृतकाल में भारत को स्वस्थ बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

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सांस्कृतिक संवर्धन का अमृतकाल!
दिव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण एवं महाकाल महालोक का निर्माण कर मोदी सरकार ने अभूतपूर्व कार्य किया है।

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Jay shree RAM

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भगवान जगन्नाथ के याद में निकाली जाने वाली 'जगन्नाथ रथ यात्रा' का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। आपको बता दें कि जगन्नाथ मंदिर हिन्दुओं के चार धाम में से एक है।
यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ 'जगत के स्वामी' होता है। इसलिए पुरी नगरी 'जगन्नाथपुरी' कहलाती है। इस रथ यात्रा को देखने के लिए हर साल दस लाख से अधिक तीर्थयात्री आते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस रथ यात्रा में भाग लेता है वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। उनके रथ पर भगवान जगन्नाथ की एक झलक बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस त्योहार को ‘घोसा यात्रा’, ‘दशवतार यात्रा’, ‘नवादिना यात्रा’ या ‘गुंडिचा यात्रा’ के नाम से भी जाना जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा के दस दिन तक के इस महोत्सव में शामिल होने से व्यक्ति की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। इस रथयात्रा का पुण्य 100 यज्ञों के बराबर होता है। इस समय उपासना के दौरान अगर कुछ उपाय किये जाएं तो श्री जगन्नाथ अपने भक्तों की समस्या को जड़ से खत्म कर देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रथ यात्रा भगवान जगन्‍नाथ जी के मंदिर से निकालकर प्रसिद्ध गुंडिचा माता के मन्दिर तक पहुंचाया जाता है। जहां पर भगवान जगन्‍नाथ जी सात दिनों तक विश्राम करते हैं। सात दिनों तक विश्राम करके के बाद में मंदिर में वापिस आ जाते हैं। इस रथ यात्रा में शामिल होने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।
रथयात्रा में सबसे आगे बलरामजी का रथ होता है।
गौरतलब है कि रथयात्रा में सबसे आगे बलरामजी का रथ, उसके बाद बीच में देवी सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है। तीनों के रथ को खींचकर मौसी के घर यानी कि गुंडीचा मंदिर लाया जाता है जो कि जगन्नाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर है।
भगवान जगन्नाथ के रथ को 'नंदीघोष' कहते हैं।
बलरामजी के रथ को 'तालध्वज' कहते हैं, जिसका रंग लाल और हरा होता है। देवी सुभद्रा के रथ को 'दर्पदलन' या 'पद्म रथ' कहा जाता है, जो काले या नीले और लाल रंग का होता है, जबकि भगवान जगन्नाथ के रथ को 'नंदीघोष' या 'गरुड़ध्वज' कहते हैं। इसका रंग लाल और पीला होता है।
राधे राधे गोविंदा 🙏🚩

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