Discover posts

Explore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations

Upsilon Group changed her profile picture
3 yrs

image

image
3 yrs - Translate

पुराने समय की मस्त यादें !
भागते तो बचपन मे भी थे,
भागते तो आज भी है..
भागते तो बचपन मे भी थे,
भागते तो आज भी है
बस मकसते बदल चुकी है,
जिंदगी तो वही है बचपन मे गिरे तो कोई संभालने वाले थे
आज खुद ही गिरे तो खुद को ही संभालना पडता है
बचपन मे न रोटी की चिंता थी न कुछ कमाने का डर
अब हर पल आज और कल की जदोहद में गुजरता है बचपन मे नन्नी सी कंदो पे बस बश्ते का बोझ होता था आज सब की उमीदों का बोझ लिए कंदे थक चुकी है बचपन मे दो-चार दोस्त मिलके खेलने का मजा कुछ और ही था अब जिंदगी की उलजनो मे सब दोस्त बिजी हो गए है
बचपन मे किसी की टांग खीचना बडा मजाक होता था
अब टांग खीचने पर लोग एक दूसरे को मरने मारने पे उतारू होते है
बचपन मे चेहरे पे एक नटखट मुस्कान और मासूमियत होती थी
आज जिंदगी की दलदल में चेहरे पर सिर्फ उदासी और मायूसी छाई हुई है
बचपन मे रूठे तो खाना खाने के लिए मम्मा आगे-पीछे दौड़ती थी
आज भूका हूँ दिनभर पर किसी को खबर ही नही है
बचपन मे एक भरोसा था कि कुछ भी करु तो पापा साथ खडे रहते है
आज हजारो साथ होते हुए भी दिल अकेला महसूस करता है बचपन मे भाई-बहन, अपने सब करीबी लगते थे आज सब हवा की तरह बिखरे बिखरे से लगते है
एक दौर उस वक़्त था जो खेलकूद में सांस लेने की फुरसत नही होती थी एक दौर आज है जो जिंदगी को जीने के लिए सांस लेने की फुरसत नही है
भागते तो बचपन मे भी थे,
भागते तो आज भी है
बस मकसते बदल चुकी है,
जिंदगी तो वही है

image
3 yrs - Translate

नकली विज्ञान ने हमसे 400 प्रकार के टमाटर छीन कर हमें एक अंडे के आकार का टमाटर जो बिल्कुल गुणहीन है चिपका दिया।

आजकल आपने देखा होगा कि बाजार में मिलने वाले अधिकतर फल और सब्जियों में स्वाद बिल्कुल नहीं होता... लेकिन दिखने में वह एकदम लाजवाब होगी जैसे कि जामुन, टमाटर।
हाइब्रिड बीज से तैयार होने वाली जामुन इतनी मोटी मोटी, गोलमटोल होती हैं कि देखते ही खाने के लिये मुँह में पानी आ जाता है। औऱ देशी जामुन बेचारी देखने में बिल्कुल पतली सी एक कोने में दुबक कर पड़ी रहती कि कोई हम गरीब का भी मोल डाल दे।
लेकिन जब आप hybrid जामुन को खाते हैं तो स्वाद बिल्कुल फीका फीका सा बेस्वाद सा होता है। हाइब्रिड मोटी मोटी जामुन गले में एक अजीब तरह की खुश्की करती है। खाने के बाद आपको पानी पीना पड़ता है। दूसरी और देशी जामुन मुँह में रखते सार ही रस घोल देती है... आनंद आ जाता है कोई गले में खारिश नहीं होती। देशी जामुन जिनकी किस्मत और समझ अच्छी हो कभी कभार मिल जाती है।

आज का दूसरा मुद्दा है टमाटर। अंग्रेजी टमाटर देखने में अंडे जैसे लगते हैं इसलिये मैं इनको अंडे वाले टमाटर कहता हूँ। यह अंडे वाले टमाटर खाने में देशी टमाटरों (जोकि बिल्कुल गोल होते हैं) के मुकाबले बिल्कुल असरदार और स्वादिष्ट नही होते। देशी टमाटर जहाँ एक पड़ेगा और सब्जी में रस घोल देगा अंडे वाले हाइब्रिड टमाटर तीन पड़ेंगे और सब्जी की ऐसी तैसी कर देंगे वो अलग।

कैसे हाइब्रिड गेंहू में कैसे ग्लूटामेट की मात्रा अधिक होती है जिससे आजकल तथाकथित विकसित देश अमेरिका जिसकी 25% जनसंख्या मधुमेह नामक रोग से ग्रसित हैं। दूसरी ओर देशी गेहूँ जैसे शरबती में ग्लूटामेट की मात्रा संतुलित मात्रा में होती है।

यह लेख लिखने का उद्देश्य है कि आप भी ना केवल जैविक बल्कि प्रकृति की बनाये हुए फल सब्ज़ियाँ अनाज ही खरीदें क्योंकि इंसान गलती कर सकता है प्रकृति नहीं। कुदरती बीजों द्वारा उत्पन्न फल सब्जियाँ ही आपके स्वास्थ्य के लिये उत्तम हैं।

image
3 yrs - Translate

The Mysterious Machine of Dwarka
.
समुद्र में डूबी द्वारका के अनेक मानव निर्मित वर्गाकार "कट-स्टोन", वर्तमान भारत के छद्म पुरातत्व और इतिहास के विचारों को एकदम उलट देती है। ये भारी भरकम "कट-स्टोन" द्वारका के आसपास तो नहीं मिलते। ये बहुत दूर राजस्थान के कोटा या फिर उदयपुर में ही मिलते हैं। इन भारी भरकम पत्थरों को यहाँ तक लाना एक चुनौती रही होगी। इन भारी भरकम पत्थरों के बीच में एक सुराख बनी है जिनमें कभी लोहे के तीक्ष्ण तलवार नुमा यन्त्र दीवार पर घूमा करती थी। भारत के प्राचीन संस्कृत इतिहास ग्रंथों में घूमने वाला तलवार अस्त्र की सूचना मिलती है। जो कोल्हू जैसे यन्त्र से जुड़े होते थे और पशु संचालित होते थे। ५००० से भी अधिक वर्षों में इन यंत्रों के पत्थर तो बच गए परन्तु यन्त्र में प्रयोग हुए लोहे और लकड़ी के पाट पुर्जे नष्ट हो गए।

द्वारका की पुरातत्व सम्पदा, विश्व भर के उन लोगों के लिए एक चुनौती है जो सिंधु घाटी सभ्यता के विषय में कार्य कर रहे हैं। उनकी वर्तमान धारणा और समझ, द्वारका के आगे बहुत छोटी और बौनी है। द्वारका डूबने के बाद यहाँ के लोगों ने जब हड़प्पा को अपना निवास बनाया तब इस तरह के यंत्रों की आवश्यकता वहाँ नहीं समझी गई।

image
3 yrs - Translate

ये श्री राम, लक्ष्मण और सीता की मूल मूर्ति हैं जिन्हें बाबर द्वारा राम मंदिर के विध्वंश से पहले हटा कर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था।

जब बाबर ने अयोध्या कूच किया तो मंदिर के रखवाले पंडित श्यामामानंद महाराज मूर्तियों के साथ अयोध्या भाग गए और पैठण के स्वामी एकनाथ महाराज को सौंप दिए।
बाद में इन मूर्तियों को छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु स्वामी समर्थ रामदास को सौंप दिया गया।
जब स्वामी समर्थ दक्षिण भारत की यात्रा पर थे, तो उन्होंने उन मूर्तियों को हरीहर, कर्नाटक नामक छोटे से शहर में तुंगा और भद्रा के पवित्र संगम के तट पर रखा।
हरिहर में नारायण आश्रम के गुरुओं द्वारा तब से मूर्तियों की पूजा की जाती रही है। अयोध्या फैसले के बाद हरिहर में जमकर धूम मचा हरिहर और नारायण आश्रम के लोग अब श्री राम जन्म भूमि अयोध्या में मूर्ति वापस लाने की तैयारी में हैं।

image
3 yrs - Translate

राजस्थान -माटी रो हेलो की पोस्ट :

सबसे बड़ी शादी, 2000 बीघा में टेंट, पाँच लाख मेहमान, 300 ट्रैक्टर से खाना सप्लाई, 7 दिन से 1000 लोग बना रहे खाना, गिनीज रिकॉर्ड वाले आ गए...

राजस्थान में अब तब का सबसे बड़ा सामूहिक विवाह हो रहा है। यह विवाह राजस्थान का ही नहीं बल्कि देश दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक विवाह माना जा रहा है। इसीलिए आयोजकों ने लंदन से गिनीज बुक और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स वालों को भी बुलाया है और वे देर शाम राजस्थान पहुँच भी चुके हैं।

इस विवाह की तैयारी करीब एक महीने से की जा रही है और विवाह का आयोजन आज 26 मई को रखा गया है।
बांरा शहर में होने वाले इस आयोजन के लिए सात दिन से भट्टियाँ चल रही हैं और लगातार मिठाईयाँ और नमकीन बन रही हैं।
इस आयोजन में करीब पाँच लाख मेहमानों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसी हिसाब से तैयारियाँ भी की जा रही हैं।

आयोजन सर्व धर्म नि:शुल्क विवाह सम्मलेन के नाम से किया जा रहा है।
इस आयोजन में 2200 जोड़ों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
सामूहिक विवाह सम्मेलन का काम देख रहे मीडिया प्रभारी मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि पूरी टीम काम पर लगी हुई है। एक महीने से काम चल रहा है। पाँच दिन से खाना बन रहा है।

आयोजन में आने वाले लोगों के लिए करीब तीन लाख किलो खाद्य सामग्री बन रही है। इसमें इसमें 800 क्विंटल नुक्ती, 800 क्विंटल बेसन की मिठाई बनकर तैयार हो गई है। इसके अलावा 350 क्विंटल नमकीन भी बनकर तैयार हो गए हैं। साथ ही 500 क्विंटल कैरी की लौंजी बन रही है। करीब पंद्रह सौ क्विंटल पूडी और सब्जी बननी है जो आज रात से शाम से बनना शुरु हो जाएगी। 26 तारीख को भोजन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है।
खाने में लोगों को नुक्तीए बेसन मिठाई, नमकीन, कैरी की लौंजी और पूड़ी परोसी जाएगी। ऐसे में प्रति व्यक्ति पर करीब 150 रुपए का खर्चा होगा।

शादी के लिए बनी 800 क्विंटल नुक्ती को रखने के लिए ट्रैक्टर की ट्रॉली का उपयोग किया गया है। ट्रॉली में प्लास्टिक कवर लगाकर उनमें नुक्ती को रख दिया गया है। इसी तरह से बेसन की मिठाई को भी स्टोर करके रखा गया है। नमकीन को भी इसी तरह से बड़े पॉलिथीन के पैकेट में पैक करके रखा गया है।

image
3 yrs - Translate

क्या अर्जुन कायर था?

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।यह गीता का उद्घोष है।

अब एक अपनी पढ़ी हुयी कथा पढ़ें... और फिर निर्णय करें।

जब पाण्डव १३ वर्ष का वनवास काट रहे थे तभी श्रीकृष्ण ने पांडवों को सलाह दी थी कि कलियुगावतार दुर्योधन हर ढंग का छल कपट करेगा परन्तु राज्य वापस नहीं करेगा और अन्ततः युद्ध करना ही पड़ेगा।

और चूँकि वह अप्रत्यक्ष तैयारी अभी से ही कर रहा है अतः उसकी सेना भी संख्याबल में बड़ी होगी।

बहुत संभव है कि भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य जैसे महारथी भी उसके पक्ष में रहें अतः अर्जुन को तपस्या करके देवताओं से और अस्त्र प्राप्त करना चाहिये।

सलाह मानकर अर्जुन घनघोर वन में तपस्या करने चला गया। तपस्या में लीन अर्जुन को एक दिन जंगली सुअर की ध्वनि सुनायी दी और उसे लगा कि उस पर वह सुअर हमला कर देगा और तुरंत अर्जुन ने पास में रखे गांडीव का प्रयोग करके वाण चला दिया।

पर जब सुअर गिरा तो अर्जुन ने देखा कि सुअर के उपर दो वाण लगे हैं और कुछ समय पश्चात ही एक किरात आया और अर्जुन से बोला कि उसके वाण से सुअर मरा है तथा अर्जुन का वाण बाद में लगा है।

बातचीत में ही विवाद बढ़ गया और किरात ने अर्जुन को युद्ध करने को ललकारा।

हालाँकि अर्जुन तपस्यारत था पर क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुये उसने चुनौती स्वीकार कर ली और पिनाक से युद्ध होने लगा।

वह किरात कोई साधारण किरात नहीं बल्कि स्वयम् शिव थे और शिव को युद्ध में देखकर उनके लाखों गण भी अर्जुन पर टूट पड़े। वन के महात्माओं को पता चला और उन्होंने अर्जुन से कहा कि तुम तपस्या करने आये हो तुम्हें पाण्डवों की सहायता करके दुर्योधन को हराना है और तुम उद्देश्य से भटक कर यहीं युद्ध में क्यों उलझ रहे?

अर्जुन ने महात्माओं से कहा कि वह क्षत्रिय है और युद्ध की चुनौती को अस्वीकार कर ही नहीं सकता। उसे काल का वरण स्वीकार है परन्तु वह चुनौती से भाग नहीं सकता।

परमशिव ने जब अर्जुन का यह दृढ़ विश्वास देखा तो विश्वास की परम मूर्ति शिव ने प्रसन्न होकर अर्जुन को पाशुपतास्त्र भेंट किया।

अब आप तय करें कि निहत्था और तपस्यारत जब अर्जुन अकेले ही काल से भी भिड़ सकता है तो उसे किसी भी अवस्था में कायर कहना क्या, साक्षात शिव या श्री हरि नारायण का ही अपमान नहीं है?

नोटः कथाएँ थोड़े थोड़े अन्तर के साथ आपने पहले भी पढ़ी होंगी पर आप अपने हृदय से पूछें कि दद्दाओं का अर्जुन को कायर बताना कितना बड़ा ढोंग और कपट है। क्या ढोंगी और कपटी सनातन धर्म की रक्षा वास्तव में कर रहे हैं?

निर्णय आपका। मैं फ़ेसबुक त्यागने हेतु तत्पर हूँ परन्तु धर्म के पक्ष से विमुख नहीं हो सकता।

image
3 yrs - Translate

Kripa Shankar Bawalia Mudgal जी की पोस्ट :

यह उपग्रह चित्र — भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी अभी डेढ़ घंटे पूर्व का है, जो गुजरात तट पर आए चक्रवात को दिखाता है।

मौसम के बारे में अनुमान सिर्फ चित्र से ही नहीं लगाया जा सकता। उसके लिए और भी डाटा चाहिए जो मौसम विभाग के पास ही होता है। अतः वे ही सही भविष्यवाणी कर सकते हैं।

कम दबाव के क्षेत्र के केंद्र की सही स्थिति, वहाँ का तापमान, वहाँ के वातावरण का बेरोमेट्रिक प्रेशर, केंद्र के मूवमेंट की दिशा और गति, केंद्र के चारों ओर बह रही हवाओं की गति और दिशा, आदि की जानकारी के बिना कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।
यह एक दक्षता प्राप्त विशेषज्ञों का काम है, जो अपना काम भलीभाँति कर रहे हैं। पूरे देश के चुने हुए कुछ स्थानो से मौसम विभाग के रॉकेट या गुब्बारे छोड़े जाते हैं जो विभिन्न ऊंचाइयों पर तापमान, वायु के दबाव, गति और दिशा आदि की जानकारी देते हैं।
समुद्र में भी कुछ चुने हुए स्थानों पर एक उपकरण जल में उतारा जाता है, जो विभिन्न गहराइयों पर तापमान, जल के प्रवाह की दिशा आदि का डाटा देता है जिसका उपयोग भी मौसम विभाग करता है।

image
3 yrs - Translate

More about in India की पोस्ट :

ये अंग्रेजी इंजीनियर वाला हावड़ा ब्रिज घूम के एक चीज समझ नही आया की 100 साल से इसका एक नट नहीं खुला है और हमरा बिहार वाला साल में दो बार टूट के गिर जाता है 😀

image