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कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने एटा में बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सांस लेने में गंभीर परेशानी के चलते दो बुजुर्गों और एक टीबी मरीज की मौत हो गई। तीनों को हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया था, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही जान नहीं बचाई जा सकी।
डॉक्टरों के मुताबिक ठंड के मौसम में दमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस और टीबी जैसे रोगों से जूझ रहे मरीजों में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ठंडी हवा फेफड़ों पर सीधा असर डालती है, जिससे सांस की नली सिकुड़ जाती है और सांस लेने में दिक्कत बढ़ती है। ओपीडी में भी सांस संबंधी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खासकर बुजुर्गों में।
ठंड के मौसम में बुजुर्ग और सांस रोगी सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें, दवाइयों में लापरवाही न करें और सांस लेने में जरा सी भी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ठंड में सावधानी ही जान बचा सकती है।
#winterhealth #breathingproblems #elderlycare #tbpatients #healthalert

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श्रीमती बबीता सिंह चौहान जी को उत्तर प्रदेश महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई एवं अशेष शुभकामनाएं।
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व, अनुभव और समर्पण से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को नई गति मिलेगी और नारी शक्ति और अधिक मजबूत होगी।
आपके सफल कार्यकाल की मंगलकामना करते हैं।
#babitasinghchauhan #upwomenscommission #uttarpradesh #womenempowerment #congratulations

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कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने एटा में बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सांस लेने में गंभीर परेशानी के चलते दो बुजुर्गों और एक टीबी मरीज की मौत हो गई। तीनों को हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया था, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही जान नहीं बचाई जा सकी।
डॉक्टरों के मुताबिक ठंड के मौसम में दमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस और टीबी जैसे रोगों से जूझ रहे मरीजों में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ठंडी हवा फेफड़ों पर सीधा असर डालती है, जिससे सांस की नली सिकुड़ जाती है और सांस लेने में दिक्कत बढ़ती है। ओपीडी में भी सांस संबंधी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खासकर बुजुर्गों में।
ठंड के मौसम में बुजुर्ग और सांस रोगी सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें, दवाइयों में लापरवाही न करें और सांस लेने में जरा सी भी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ठंड में सावधानी ही जान बचा सकती है।
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कोटा स्थित कार्यालय में आज कोटा, बून्दी, बारां और झालावाड़ से आए दिव्यांग भाई-बहनों को मोटराइज़्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का अवसर मिला। यह केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन को अधिक सहज, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने में सहायक माध्यम भी है। समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि दिव्यांगजनों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें, ताकि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संतोष का विषय है कि कोटा में मई 2025 में प्रारंभ हुए ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ के माध्यम से अब तक लगभग 2500 से अधिक दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को सहायता मिल चुकी है और करीब 7 करोड़ रूपए के सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसे आगे भी निरंतर मजबूत किया जाएगा।
#kota

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कोटा स्थित कार्यालय में आज कोटा, बून्दी, बारां और झालावाड़ से आए दिव्यांग भाई-बहनों को मोटराइज़्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का अवसर मिला। यह केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन को अधिक सहज, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने में सहायक माध्यम भी है। समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि दिव्यांगजनों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें, ताकि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संतोष का विषय है कि कोटा में मई 2025 में प्रारंभ हुए ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ के माध्यम से अब तक लगभग 2500 से अधिक दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को सहायता मिल चुकी है और करीब 7 करोड़ रूपए के सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसे आगे भी निरंतर मजबूत किया जाएगा।
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कोटा स्थित कार्यालय में आज कोटा, बून्दी, बारां और झालावाड़ से आए दिव्यांग भाई-बहनों को मोटराइज़्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का अवसर मिला। यह केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन को अधिक सहज, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने में सहायक माध्यम भी है। समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि दिव्यांगजनों को समान अवसर और सुविधाएं मिलें, ताकि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
संतोष का विषय है कि कोटा में मई 2025 में प्रारंभ हुए ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र’ के माध्यम से अब तक लगभग 2500 से अधिक दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को सहायता मिल चुकी है और करीब 7 करोड़ रूपए के सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसे आगे भी निरंतर मजबूत किया जाएगा।
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