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मियाजाकी आम (Miyazaki Mango) दुनिया का सबसे दुर्लभ और महंगा फल है, जिसकी कीमत लाखों में है. जापान में उगने वाला यह लाल रंग का आम अपनी बेमिसाल मिठास और खुशबू के लिए जाना जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मियाजाकी आम मुख्य रूप से जापान के मियाजाकी शहर में उगाया जाता है. यह आम नॉर्मल नहीं है क्योंकि इसे उगाने की प्रक्रिया बहुत मुश्किल होती है. इस आम को उगाने वाले हर उगाने वाले किसान हर एक आम की बहुत बारीकी से देखभाल करते हैं. इन आमों को पेड़ों पर सीधे धूप लगने दी जाती है, जिससे इनका रंग गहरा लाल या बैंगनी हो जाता है.

यदि इस आम की कीमत की बात करें तो इंटरनेशन मार्केट में मियाजाकी आम की कीमत करीब 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है. इतनी मोटी रकम में भारत में एक अच्छी सेकंड हैंड कार, नई लग्जरी बाइक खरीदी जा सकती है.

इस आम की महंगाई का सबसे बड़ा कारण इसकी सीमित पैदावार और इसके क्वालिटी चेक हैं. केवल वही आम 'मियाजाकी' के नाम से बेचे जाते हैं जिनका वजन कम से कम 350 ग्राम हो और जिनमें शुगर की मात्रा 15 प्रतिशत से अधिक हो.

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मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका और ईरान युद्ध को स्थायी तौर पर रोकने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सुरक्षा को लेकर कई बड़े दावे किए है।

ईरानी राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद मरांडी ने लेबनान के न्यूज आउटलेट 'अल-मयादीन' को बताया कि कड़ी सावधानी के साथ वे लोग वापस ईरान आए हैं। जिसमें ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ शामिल थे। उन्होंने बीच रास्ते में ही अपनी फ्लाइट बदल ली और तेहरान पहुंचने के लिए बस और ट्रेन का सहारा लिया।

तेहरान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मरांडी ने कहा कि वे ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद गए थे। वार्ता असफल होने के बाद जब वे लोग पाकिस्तान से लौट रहे थे, तब उन लोगों ने खुद को गंभीर खतरे में महसूस किया। उन्होंने आगे बताया कि इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत के लिए जाते समय भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल को सीधे तौर पर सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा, "इस्लामाबाद जाते समय हमें सीधे तौर पर धमकियां मिली थी कि हमारे विमान पर हमला हो सकता है।"

इसीलिए उन्होंने तेहरान लौटते समय चुपके से विमान बदल लिया। राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विमान अचानक अपना रास्ता बदलकर ईरान के शहर मशहद में आपातकालीन लैंडिंग के लिए उतर गया, और वहां से प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने ट्रेन, कार और बस से तेहरान तक का अपना सफर जारी रखा।

मरांडी ने मंगलवार को 'अल-मयादीन' से कहा, "हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है, और हम युद्ध के अगले दौर के लिए खुद को तैयार करने में भी बहुत व्यस्त हैं।" उन्होंने आगे कहा कि, "ईरान हमेशा से जानता था कि अमेरिका धोखेबाज है, और यह भी जोड़ा कि जब हम बातचीत की मेज पर बैठे होते हैं, तब भी वे अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहे होते हैं।"

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