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देश के माननीय उपराष्ट्रपति आदरणीय श्री CP Radhakrishnan जी, जो वित्तीय मामलों की संसदीय समिति में मेरे आदरणीय पिता जी के सहयोगी भी रहे हैं, आज देहरादून स्थित वसंत विहार हमारे निवास पर पहुँचकर आपने पिता जी के स्वास्थ्य का कुशल-क्षेम जाना।
आपका यह आत्मीय व्यवहार, सादगी और संवेदनशीलता पारिवारिक ही नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन के मूल्यों को भी दर्शाता है।
मैं इस स्नेहपूर्ण भेंट एवं शुभेच्छाओं हेतु माननीय उपराष्ट्रपति जी आपका हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हूँ।

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देश के माननीय उपराष्ट्रपति आदरणीय श्री CP Radhakrishnan जी, जो वित्तीय मामलों की संसदीय समिति में मेरे आदरणीय पिता जी के सहयोगी भी रहे हैं, आज देहरादून स्थित वसंत विहार हमारे निवास पर पहुँचकर आपने पिता जी के स्वास्थ्य का कुशल-क्षेम जाना।
आपका यह आत्मीय व्यवहार, सादगी और संवेदनशीलता पारिवारिक ही नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन के मूल्यों को भी दर्शाता है।
मैं इस स्नेहपूर्ण भेंट एवं शुभेच्छाओं हेतु माननीय उपराष्ट्रपति जी आपका हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हूँ।

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देश के माननीय उपराष्ट्रपति आदरणीय श्री CP Radhakrishnan जी, जो वित्तीय मामलों की संसदीय समिति में मेरे आदरणीय पिता जी के सहयोगी भी रहे हैं, आज देहरादून स्थित वसंत विहार हमारे निवास पर पहुँचकर आपने पिता जी के स्वास्थ्य का कुशल-क्षेम जाना।
आपका यह आत्मीय व्यवहार, सादगी और संवेदनशीलता पारिवारिक ही नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन के मूल्यों को भी दर्शाता है।
मैं इस स्नेहपूर्ण भेंट एवं शुभेच्छाओं हेतु माननीय उपराष्ट्रपति जी आपका हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हूँ।

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शहादत को सलाम: विदाई ऐसी कि पत्थर दिल भी रो पड़े! 🇮🇳🥺
"बाप ने अभी बेटी की पहली किलकारी भी नहीं सुनी थी, कि तिरंगे में लिपटकर घर आ गया..."
आज इस तस्वीर ने पूरे देश की आँखों को नम कर दिया है। यह कहानी है वीर जवान प्रमोद जाधव जी की, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। लेकिन उनकी शहादत की यह तस्वीर कलेजा चीर देने वाली है।
सोचिए उस माँ पर क्या गुजर रही होगी, जिसने मात्र 8 घंटे पहले एक नन्ही परी को जन्म दिया। एक तरफ अस्पताल का स्ट्रेचर था जहाँ नई जिंदगी ने जन्म लिया, और दूसरी तरफ वही स्ट्रेचर श्मशान की ओर बढ़ रहा था जहाँ एक सुहाग और एक पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
💔 एक तरफ जन्म की खुशी, दूसरी तरफ शहादत का गम। वीर प्रमोद जाधव ने अपनी बेटी का चेहरा तक नहीं देखा। उन्होंने अपनी नन्ही बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपना वर्तमान देश के नाम कर दिया। उस नन्ही जान को शायद पता भी नहीं कि उसके पिता ने उसे एक ऐसा गौरवशाली नाम दिया है, जिसे यह देश कभी नहीं भूलेगा।
भारत माता के ऐसे वीर सपूत और उनके बहादुर परिवार को हमारा कोटि-कोटि नमन। हमें गर्व है हमारे सैनिकों पर जो अपनी खुशियों की परवाह किए बिना सीमा पर डटे रहते हैं।
आइये मिलकर इस वीर योद्धा को श्रद्धांजलि दें। कमेंट में 'जय हिंद' लिखकर अपनी संवेदनाएं प्रकट करें। 🙏🇮🇳
#indianarmy #jaihind #martyr #pramodjadhav #salutetobravehearts #indiansol****r #emotional #india #sacrifice #deshbhakti #hindustan #proudindian

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🙏🚩बिहार में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, विराट रामायण मंदिर में आज होगी स्थापना!!
#samratchoudhary #ramayanmandir #shivling #shiva

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अहमदाबाद के कालुपुर रेलवे स्टेशन पर 10 मंजिला ऊंची पानी की टंकी को तोड़ने के लिए एक JCB मशीन को उसके ऊपर चढ़ाया गया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। स्टेशन के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) प्रोजेक्ट के तहत, 75 साल पुरानी और अनुपयोगी हो चुकी इस टंकी को हटाने के लिए अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने यह अनोखा तरीका अपनाया।

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"इतिहास के पन्नों में दबी एक सच्चाई! 🚩
8वीं सदी में जब अरब आक्रमणकारी भारत की ओर बढ़ रहे थे, तब मेवाड़ के बप्पा रावल ने उन्हें न केवल हराया, बल्कि खदेड़ते हुए ईरान और अफगानिस्तान तक ले गए।
सामरिक दृष्टि से उन्होंने जिस जगह अपनी मुख्य सैन्य चौकी बनाई, उसे 'रावल की पिंडी' (रावल का गाँव/छावनी) कहा जाने लगा।
समय के साथ यह नाम बिगड़कर 'रावलपिंडी' हो गया।
यह शहर आज भी हमारे पूर्वजों के शौर्य की गवाही देता है।

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भारत की आखिरी सती: रूप कंवर राजपूत और 1987 का वो इतिहास 🙏
आज इतिहास के पन्नों से उस घटना को याद करते हैं जिसने न केवल राजस्थान बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। बात है 1987 की, जब राजस्थान के सीकर जिले के दिवराला गाँव में रूप कंवर राजपूत जी सती हुई थीं।

महज 18 साल की उम्र और शादी के सिर्फ़ 7 महीने बाद, जब उनके पति माल सिंह शेखावत का निधन हुआ, तो रूप कंवर जी ने वो फैसला लिया जो सदियों से राजपूती परंपरा का हिस्सा रहा है। उस समय राजपूत समाज में पुनर्विवाह की रीत नहीं थी और पति के साथ जीने-मरने का वचन ही सर्वोपरि माना जाता था। इसी वचन को निभाते हुए उन्होंने अपने पति की चिता के साथ सती होने का मार्ग चुना।

यह घटना 'भारत की आखिरी सती' घटना मानी जाती है। इसके बाद जयपुर की सड़कों पर हजारों राजपूत अपनी परंपरा के सम्मान में तलवारें लेकर उतर आए थे। इस घटना की गूंज इतनी तेज थी कि BBC जैसे अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इसे कवर किया।

इसके बाद देश के कानून में बड़े बदलाव हुए और सती प्रथा के खिलाफ सख्त कानून बने। उस समय 39 लोगों पर मुकदमे चले, जिनमें से कई बरी भी हो चुके हैं। आज भी दिवराला गाँव में सती माता रूप कंवर जी का स्थान मौजूद है, जो उस त्याग और इतिहास का गवाह है।

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