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हर हर महादेव 🙏
आईए हम लोग जानते हैं l की सनातन धर्म के आधार स्तंभ कौन कौन से हैं l जिनके कारण सनातन धर्म 🕉️ सभी धर्मों से सबसे प्राचीन है l और जिसे कोई मिटा नहीं सकता है l वो ताकत है l हमारा सत्य सनातन धर्म l
क्योंकि जो सत्य है l वही सनातन धर्म है l
#सत्यसनातनधर्म #सनातनहमारीपहचान

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श्री कृष्ण जी की वंशावली को शास्त्रीय परंपरा (हरिवंश पुराण, भागवत पुराण, महाभारत) के आधार पर स्पष्ट, क्रमबद्ध और पूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया है।
🌿 श्री कृष्ण जी की वंशावली (यदुवंश)
🔱 1. मूल वंश
चन्द्रदेव
↓
बुध
↓
पुरूरवा
↓
आयु
↓
नहुष
↓
ययाति
🔱 2. यदुवंश की स्थापना
राजा ययाति
पुत्र: यदु (इन्हीं से यदुवंश चला)
🔱 3. यदु से वृष्णि वंश
यदु
↓
सहस्रजित
↓
शतजित
↓
हैहय
↓
धर्मनेत्र
↓
कुन्ति
↓
वृष्णि (वृष्णि वंश की स्थापना)
🔱 4. वृष्णि वंश → यादव वंश
वृष्णि
↓
अंधक
↓
देवक
↓
उग्रसेन
पुत्र: कंस
🔱 5. श्री कृष्ण जी के माता-पिता
उग्रसेन
↓
देवक
पुत्री: देवकी
शूरसेन
पुत्र: वसुदेव
👉 वसुदेव + देवकी = श्री कृष्ण
🌸 श्री कृष्ण जी की संतानें
🔱 प्रमुख पुत्र
प्रद्युम्न (रुक्मिणी के पुत्र)
सांब (जाम्बवती के पुत्र)
अनिरुद्ध (प्रद्युम्न के पुत्र)
👉 शास्त्रों में श्री कृष्ण के 16,108 पुत्र बताए गए हैं।
🌸 श्री कृष्ण जी के पौत्र
अनिरुद्ध
विवाह: उषा
वंश आगे चला
🕉️ संक्षिप्त वंश क्रम (लाइन फॉर्मेट)
चन्द्र → बुध → पुरूरवा → आयु → नहुष → ययाति → यदु → वृष्णि → अंधक → देवक → उग्रसेन → देवकी → श्री कृष्ण
✨ विशेष तथ्य
श्री कृष्ण यदुवंशी क्षत्रिय थे।
उनका वंश चन्द्रवंश से संबंधित है।
महाभारत काल में यादव वंश अत्यंत शक्तिशाली था
अगर जानकारी में किसी को भी प्रकार कि त्रुटि हुई है तो उसके लिए हम क्षमा प्रार्थी है l
मेरा मानना है l कि कृष्ण जी सबके है l और उन्हें जाती में कोई नहीं बांध सकता है l
#jaishreekrishna #socialmedia

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माँ #बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। इन्हें स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। शत्रु की वाणी, विचार, क्रिया और अहंकार को रोक देना—यही माँ बगलामुखी की मूल शक्ति है। पीतवर्ण, पीत वस्त्र, पीत आसन और पीत तेज इनके स्वरूप की पहचान हैं।
बगलामुखी कौन हैं और किसका अवतार हैं
माँ बगलामुखी को आदिशक्ति पार्वती का उग्र-रहस्यमय स्वरूप माना गया है। देवी भागवत, तंत्र चूड़ामणि और रुद्रयामल जैसे ग्रंथों में वर्णन आता है कि जब सृष्टि में अराजकता और विनाश की स्थिति उत्पन्न हुई, तब माँ ने ब्रह्मास्त्र रूपी प्रलयकारी शक्ति को स्तम्भित करने के लिए अवतार लिया। इस कारण इन्हें स्तम्भन महाविद्या कहा जाता है।

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जल्दी-जल्दी में एक महिला अंबाला जा रही ट्रेन में बेटिकट ही बैठ जाती है। ऐसे में जब टीटीई उस स्लीपर कोच में टिकट चेक करने आता है, तो वह उसे 200 की नोट देती है। मगर आगे कहानी में ऐसा ट्विस्ट आता है कि टिकट न बनाने के चलते TTE को उसके 200 रुपये भी लौटाने पड़ते हैं।

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विराट कोहली ने श्री प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम जाने से पहले तुलसी माला पहनी, जिसकी ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल पर कीमत ₹124 रुपए है। बता दें कि तुलसी माला का महत्व धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभों से भरा है, जो मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, भगवान विष्णु और लक्ष्मी का आशीर्वाद, नकारात्मकता से बचाव और आध्यात्मिक विकास प्रदान करती है, ध्यान और जप में सहायक होती है और कई तरह के शारीरिक व मानसिक रोगों को दूर करने में मददगार मानी जाती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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1997 में, Richard Lee Norris, 22 वर्षीय युवक, एक प्रोजेक्टाइल उपकरण की सफाई कर रहा था, यह सोचकर कि यह खाली है, जब उसने गलती से ट्रिगर दबा दिया और उसके चेहरे पर गंभीर विस्फोट हो गया। इस हादसे ने उसकी नाक, होंठ, जबड़ा, दांत और जीभ का हिस्सा नष्ट कर दिया, जिससे उसके चेहरे की हर विशेषता प्रभावित हुई। अगले 15 वर्षों में, Norris ने 30 से अधिक सर्जरी करवाईं, जिनमें से एक सबसे लंबी मानी जाती है, जो 36 घंटे तक चली, जिसमें उसका पूरा चेहरा प्रत्यारोपित किया गया। इस तरह, उसने अपनी बुनियादी क्षमताएं वापस पा लीं और फिर से सूंघने, बोलने, सांस लेने, दाढ़ी बनाने और मुस्कुराने में सक्षम हो गया।

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तेलंगाना ने देश में एक नई मिसाल कायम की है। यह भारत का पहला राज्य बन गया है, जिसने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ट्रैफिक मार्शल और सिक्योरिटी पर्सनल के रूप में हैदराबाद मेट्रो में नियुक्त किया है। हाल ही में 20 प्रशिक्षित ट्रांसजेंडर प्रोफेशनल्स ने प्लेटफॉर्म और ट्रेनों पर अपनी जिम्मेदारी संभाली।
औपचारिक सुरक्षा और इंडक्शन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अब वे यात्रियों की मदद, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की निगरानी, बैगेज चेक और महिला यात्रियों की सुरक्षा जैसे अहम कार्य कर रहे हैं।
यह पहल सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, सशक्तिकरण और समान अवसर का प्रतीक है।
इन फ्रंटलाइन भूमिकाओं में आकर ये लोग न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि समाज की सोच भी बदल रहे हैं।
तेलंगाना का यह कदम दिखाता है कि ताकत, करुणा और नेतृत्व का कोई जेंडर नहीं होता और यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण है।
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