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भाजपा सरकार के शासनकाल में जिस तरह से प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर यूपी बोर्ड तक के पेपर लगातार लीक हो रहे हैं, उससे उप्र के युवाओं और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अब युवा ही नहीं बल्कि जो बच्चे पहली बार वोट डालेंगे उनके बीच भी भाजपा की छवि पूरी तरह धूमिल हो चुकी है और उनके माता-पिता के बीच भी।
भाजपा दरअसल परिवारवालों की विरोधी है। परिवारवाले किस तरह त्याग करके अपने बच्चों को पढ़ाते हैं और किस प्रकार पेपर लीक से बच्चों में मनो-मानसिक हताशा होती है, उसका दर्द परिवार विरोधी भाजपा कभी नहीं जान सकती है।
अन्य प्रदेशों में एडमिशन या प्रवेश परीक्षाओं की तारीख़ें उप्र में पेपर लीक होने की वजह से नहीं बदलेंगी, तो क्या हमारे प्रदेश के 12वीं के बच्चे इस मौके को खोकर अपने जीवन के सबसे ऊर्जावान सालों में से एक साल खो देंगे।
बच्चों के माता-पिता निराश होकर भाजपा सरकार से पूछ रहे हैं कि इस बात की गारंटी कौन लेगा कि दुबारा परीक्षा होने पर फिर से पेपर आउट नहीं होगा।
साथ ही छात्रों का कहना है कि ये तो वो विषय हैं जिनके बारे में ख़बर फैल गयी है, ऐसा भी तो हो सकता है कि अन्य विषयों के साथ ऐसा हुआ हो या होनेवाला हो जिसकी ख़बर किसी को नहीं है।
भाजपा सरकार या तो नकारात्मक राजनीति के चक्कर में देश-प्रदेश की सुध नहीं ले पा रही है या किसी साँठगाँठ के कारण लेना नहीं चाहती है। भाजपा शुरू से ही शिक्षा और नौकरी के प्रति नकारात्मक है क्योंकि वो नहीं चाहती कि पढ़-लिखकर लोग जाग्रत हों और भाजपा की तर्कहीन राजनीति पर सवाल उठाएं।
सच तो ये है कि इस बार लोकसभा चुनाव में पहली बार के वोटर छात्र-छात्राएं, नौकरी के लिए हताश हो चुके पढ़े-लिखे युवक-युवतियाँ बिना किसी बहकावे-भटकावे के भाजपा को हराने के लिए वोट करेंगे।
इस बार छात्र, बेरोज़गार युवा व उनके माता-पिता, भाई-बहन और घर के बड़े, सब मिलकर भाजपा को सबक़ सिखाना चाहते हैं, बुरी तरह हराना चाहते हैं।
भाजपा हटाओ, संकट मिटाओ!
भाजपा हराओ, भविष्य बचाओ!
⚡ Two-child norm for govt jobs in Rajasthan gets Supreme Court nod.
The Supreme Court has approved a 'two-child norm' for public employment, barring candidates with more than two children from seeking government jobs. The decision follows a similar provision upheld by the court for candidates contesting panchayat polls.