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महिला सशक्तिकरण का अर्थ है..पुरुषों के वर्चस्व वाली जगहों पर अपनी काबिलियत या हुनर से खुद को स्थापित करना और समाज का गौरव बनना...ना कि परिवार तोड़ना, झूठे आरोप लगाना और आत्मनिर्भरता दिखाकर लिव इन रिलेशनशिप में रखैल बनकर रहना..!!
जब स्त्री के अंदर बेवजह ही महिला सशक्तिकरण की वीरांगना बनने का कीड़ा कुलबुलाने लगता है तो...
वो ससुराल को कुरेक्षत्र का मैदान बनाकर महाभारत छेड़ देती है...
जो रिश्तेदार उनके साथ खड़े होने का दावा करते हैं वो भी कुछ समय बाद किनारा कर लेते हैं...
ससुराल में जिन कामों को करते हुए नौकरानी का एहसास होता था...वहीं काम मायके में भाई-भाभी के तानों को सुनते हुए करती हैं...
आज की आत्मनिर्भर नारी बनने की होड़ में ससुराल और मायके से अलग रहकर अपना जीवन आजादी से गुजारने के लिए ही लड़कियां लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है...
ऐसी स्त्रियों को नाते रिश्तेदारों से कोई मतलब नहीं होता...वजह बस इतनी है कि परिवार में मर्यादा से रहना पड़ता है, रोक टोक होती है, बंदिशे होती हैं और हिदायतें भी होती है...
संयुक्त परिवार में ऐसी स्त्रियों की बसर हो ही नहीं सकती....
पति या तो इनको लेकर अलग फ्लैट में रहे तो खुश रहेंगी अन्यथा रोज का कोहराम धरा है फिर..!!