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पीएम मोदी का आज का कार्यक्रम

10:30-11:30 बजे -(8 बजे भारतीय समय अनुसार)- भारत यूएस हाई-टेक हैंडशेक इवेंट, व्हाइट हाउस
12:30-140 बजे EST -(भारतीय समयानुसार रात 10 बजे)-विदेश विभाग लंच
150 -16:30 बजे EST -(भारतीय समयानुसार दोपहर 12:30 से दोपहर 2 बजे तक) - बिजनेस मीटिंग
17:15- 18:15 बजे EST -(भारतीय समयानुसार दोपहर 02:4 - 03:45) कैनेडी सेंटर में यूएसआईएसपीएफ कार्यक्रम
18:30 - 19:30 बजे EST - (भारतीय समयानुसार सुबह 40 बजे से शाम 050 बजे तक)- रोनाल्ड रीगन सेंटर में सामुदायिक कार्यक्रम
20: 10 बजे ST - भारतीय समयानुसार दोपहर 5:40 बजे

विदेश सचिव ने यह भी बताया कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री की अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन द्वारा संयुक्त रूप से दोपहर के भोजन की मेजबानी की जाएगी.

कुछ चुनिंदा CEO से मुलाकात का कार्यक्रम

विदेश सचिव ने कहा, पीएम मोदी कुछ चुनिंदा CEO, पेशेवरों और अन्य हितधारकों के साथ भी मुलाकात करने वाले हैं. वह प्रवासी भारतीयों के सदस्यों से भी मिलेंगे. उन्होंने कहा, यह यात्रा दोनों देशों के सहयोग में एक मील का पत्थर साबित होगी. ऐसे में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा है.

खुलेंगी व्यापार और निवेश को लेकर नई राहें

इस यात्रा से व्यापार और निवेश को लेकर नई राहें खुलेंगी. वहीं पीएम मोदी के इस दौरे के बाद दोनों देशों के संबंधों को नया आयाम मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इससे रक्षा क्षेत्र में नया और मजबूत तंत्र विकसित होगा.

द्विपक्षीय रक्षा सहयोग होगा मजबूत

विदेश सचिव ने यह भी कहा कि पीएम मोदी की यह ऐसी यात्रा है जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका में वास्तविक और व्यापक गहरी रुचि है. उन्होंने कहा, जिन प्रमुख घटकों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा उनमें से एक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग होगा. उन्होंने कहा कि रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण परिणाम होगा.

ये है 24 जून का कार्यक्रम

पीएम मोदी 24 जून को अमेरिका से रवाना होंगे और 24-25 जून को मिस्र की राजधानी काहिरा पहुंच जाएंगे.

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PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाशिंगटन डीसी पहुंच चुके हैं. यहां उनका काफी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया. कल रात व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने उनके लिए खास डिनर का आयोजन किया था. तो चलिए जानते हैं पीएम मोदी के आज के कार्यक्रम की लिस्ट

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प्रतापगढ़ के मनगढ़ जैसे छोटे से गांव में भक्ति धाम मनगढ़ जैसा भव्य मंदिर बनाने का मुख्य उद्देश था कि यह स्थान कृपालु महाराज की जन्मभूमि है यहीं पर उनका जन्म साल 1922 में शरद पूर्णिमा के दिन मध्यरात्रि को हुआ था।

चांदनी रात में लाइट का रिफ्लेक्शन जब झांकियों का पड़ता है तो ऐसा प्रतीत होता है मानो कुदरत की कायनात बस यही समाई है इसे देखने के लिए दूर-दूर से आए हुए पर्यटक संध्या होने का इंतजार करते हैं।

मन मोह लेती है मंदिर की झांकियां

जमीन से 108 फीट ऊंचे शिखर वाले इस मंदिर के निचले तल पर श्री कृष्ण और राधा रानी संग उनके अष्ट सखियों के जीवन का झांकियों के माध्यम से बड़े ही सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है।
वही पहले मंजिल को दो चरणों में बांटा गया है जिसमें से पहले चरण में त्रेता अवतार राम सीता और श्री कृष्ण राधा के साथ बलराम के जीवन प्रसंगों को चित्रित किया गया है।
जबकि दूसरे भाग में महाराज कृपालु के जीवन से जुड़े अहम पहलुओं को प्रदर्शित किया गया है।

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प्रतापगढ़ जिले के कुंडा तहसील मुख्यालय से २ किलोमीटर पर भगवान राधा-कृष्ण को समर्पित भक्तिधाम मंदिर है। इस मंदिर की नीवं जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने रखी है। भक्तिधाम में भगवान श्री कृष्णलीला दर्शन के लिए भक्तों का ताँता लगा रहता है। भक्ति धाममें हर ओर राधे-राधे की गूंज सुनाई पड़ती है। मंदिर की रमणीय बनावट और धाम की राधे-राधे कि गूँज से वातावरण सुंदरता देखते ही बनती है। भक्तिधाम मनगढ़ में श्रीकृष्ण भगवान के जन्मोत्सव परधामको विद्युत झालरों से बखूबी सजाया जाता है और सबसे ज्यादा रमणीय राधा-कृष्ण दरबार दिखाई पड़ता है। धाम पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव में सबसे अधिक भीड़ होती है। लाखों की संख्या में लोग जन्मोत्सव आयोजन में ही सम्मिलित होते हैं। हजारों भक्तो का आवागमन भगवान श्री कृष्ण जी के दर्शन के लिए हमेशा बना रहता है।

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एक समय की बात है, योगीराज नारद जी दूसरों के हित की इच्छा लिए अनेकों लोको में घूमते हुए मृत्युलोक में आ पहुंचे। यहाँ उन्होंने अनेक योनियों में जन्मे प्राय: सभी मनुष्यों को अपने कर्मों द्वारा अनेकों दुखों से पीड़ित देखा। उनका दुख देख नारद जी सोचने लगे कि कैसा यत्न किया जाए जिसके करने से निश्चित रुप से मानव के दुखों का अंत हो जाए। इसी विचार पर मनन करते हुए वह विष्णुलोक में गए। वहाँ वह देवों के ईश नारायण की स्तुति करने लगे जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म थे, गले में वरमाला पहने हुए थे।

स्तुति करते हुए नारद जी बोले: हे भगवान! आप अत्यंत शक्ति से संपन्न हैं, मन तथा वाणी भी आपको नहीं पा सकती हैं। आपका आदि, मध्य तथा अंत नहीं है। निर्गुण स्वरुप सृष्टि के कारण भक्तों के दुख को दूर करने वाले है, आपको मेरा नमस्कार है। नारद जी की स्तुति सुन विष्णु भगवान बोले: हे मुनिश्रेष्ठ! आपके मन में क्या बात है? आप किस काम के लिए पधारे हैं? उसे नि:संकोच कहो। इस पर नारद मुनि बोले कि मृत्युलोक में अनेक योनियों में जन्मे मनुष्य अपने कर्मों के द्वारा अनेको दुख से दुखी हो रहे हैं। हे नाथ! आप मुझ पर दया रखते हैं तो बताइए कि वो मनुष्य थोड़े प्रयास से ही अपने दुखों से कैसे छुटकारा पा सकते है।

श्रीहरि बोले: हे नारद! मनुष्यों की भलाई के लिए तुमने बहुत अच्छी बात पूछी है। जिसके करने से मनुष्य मोह से छूट जाता है, वह बात मैं कहता हूँ उसे सुनो। स्वर्ग लोक व मृत्युलोक दोनों में एक दुर्लभ उत्तम व्रत है जो पुण्य़ देने वाला है। आज प्रेमवश होकर मैं उसे तुमसे कहता हूँ। श्रीसत्यनारायण भगवान का यह व्रत अच्छी तरह विधानपूर्वक करके मनुष्य तुरंत ही यहाँ सुख भोग कर, मरने पर मोक्ष पाता है।

श्रीहरि के वचन सुन नारद जी बोले कि उस व्रत का फल क्या है? और उसका विधान क्या है? यह व्रत किसने किया था? इस व्रत को किस दिन करना चाहिए? सभी कुछ विस्तार से बताएँ। नारद की बात सुनकर श्रीहरि बोले: दुख व शोक को दूर करने वाला यह सभी स्थानों पर विजय दिलाने वाला है। मानव को भक्ति व श्रद्धा के साथ शाम को श्रीसत्यनारायण की पूजा धर्म परायण होकर ब्राह्मणों व बंधुओं के साथ करनी चाहिए। भक्ति भाव से ही नैवेद्य, केले का फल, घी, दूध और गेहूँ का आटा सवाया लें। गेहूँ के स्थान पर साठी का आटा, शक्कर तथा गुड़ लेकर व सभी भक्षण योग्य पदार्थो को मिलाकर भगवान का भोग लगाएँ।

ब्राह्मणों सहित बंधु-बाँधवों को भी भोजन कराएँ, उसके बाद स्वयं भोजन करें। भजन, कीर्तन के साथ भगवान की भक्ति में लीन हो जाएं। इस तरह से सत्य नारायण भगवान का यह व्रत करने पर मनुष्य की सारी इच्छाएँ निश्चित रुप से पूरी होती हैं। इस कलि काल अर्थात कलियुग में मृत्युलोक में मोक्ष का यही एक सरल उपाय बताया गया है।

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