37 w - Translate

#बाप #गरीब फिर भी #कर्जा लेकर #बेटी को #पढ़ाई करवाता रहा लेकिन बेटी 3 बार #असफल हो गई कारण #आरक्षण फिर लास्ट मे बेटी #भगवान के पास 😰 #मोदीजी आरक्षण ख़त्म करो जो अच्छा #पढ़ेगा मेहनत करेगा वही आगे जाएगा #सिस्टम ऐसा लाओ 😰 ये केसा #न्याय 35 नम्बर वाला पास और #मिडिल_क्लास का आदमी 50 नम्बर लाने के बाद भी फेल

image
37 w - Translate

मैं क्या मांगू..

image
37 w - Translate

जिंदगी का सबसे खूबसूरत ..!👍👍💯💯💯✔️👇👇♥️

image
37 w - Translate

समाज की मजबूती केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सोच से आती है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं होता, बल्कि दो परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी भी होता है। इसलिए जीवनसाथी का चयन करते समय समझदारी और परिपक्वता आवश्यक है।
यदि कोई व्यक्ति अपनी आदतों पर नियंत्रण नहीं रख पाता, तो उसका प्रभाव केवल उसी तक सीमित नहीं रहता। उसका असर उसके परिवार और भविष्य की पीढ़ियों पर भी पड़ता है। गलत आदतें केवल वर्तमान को ही नहीं, बल्कि आने वाले कल को भी प्रभावित करती हैं।
See more

image
37 w - Translate

अजीब तमाशा है भाई इस दुनिया का अगर एक गरीब का बच्चा पेट की आग बुझाने के लिए चाय की दुकान पर बर्तन मांझे तो उसे 'बाल अपराध' कह कर पुलिस उठा ले जाती है लेकिन वही बच्चा अगर टीवी सीरियल के सेट पर रात-रात भर मेकअप लगाकर 18-18 घंटे कैमरे के सामने खटे तो उसे दुनिया 'बाल कलाकार' कह कर तालियां बजाती है मतलब ये कौन सा चश्मा है भाई जिससे गरीब और अमीर का बचपन अलग-अलग नजर आता है राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल जी ने जो सवाल उठाया है ना वो सीधा सिस्टम के मुंह पर तमाचा है सोचिए एक मासूम अगर मजबूरी में अपने परिवार की दो वक्त की रोटी के लिए पसीना बहाए तो उसे 'जुर्म' बता दिया जाता है मालिक पर केस होता है बच्चे को रेस्क्यू किया जाता है लेकिन वही मासूमियत जब बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स के लिए करोड़ों का धंधा करती है जब वो बच्चा अपनी पढ़ाई छोड़कर स्टूडियो की लाइटों में झुलसता है तब कानून को उसमें कोई बुराई नजर नहीं आती क्यों क्योंकि वहां पैसा है वहां ग्लैमर है वहां से सरकार को टैक्स मिल रहा है क्या अब बचपन की कीमत भी बैंक बैलेंस से तय होगी क्या कानून सिर्फ उस पर चलेगा जिसकी जेब खाली है अगर बच्चे का काम करना गलत है तो वो हर जगह गलत होना चाहिए चाहे वो ढाबे की कालिख में हो या किसी आलीशान स्टूडियो की चकाचौंध में क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां गरीबी ही सबसे बड़ा गुनाह बन गई है और अमीरी हर गलती को हुनर बना देती है आखिर ये दोहरा मापदंड कब तक चलेगा कब तक हम मासूमों के बचपन को पैसों की तराजू में तोलते रहेंगे दोस्तों क्या आप स्वाति मालीवाल जी की इस बात से सहमत हैं क्या आपको भी लगता है कि हमारे कानून की ये दोहरी सोच गलत है अपनी राय कमेंट में लिखो शर्माओ मत और इस वीडियो को इतना शेयर करो कि ये सवाल हर उस कुर्सी तक पहुँचे जो कानून की अलग-अलग परिभाषा बनाती है बोलो क्या ये सही है या गलत?

image
37 w - Translate

19 फरवरी गुरूवार को चांदी (Silver Price high) में जोरदार तेज़ी देखी गई है। इस समय 1 किलो चांदी की कीमत (Silver Price Today) 2,54,410 रुपये चल रही है। वहीं सोने (Gold Price Today) का दाम 1,58,140 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है,

image
37 w - Translate

शराब के लिए रुपये न देने पर मां को डंडे से पीटकर मार डाला
बहुत ही दुखद😥😢

image
37 w - Translate

..Breking News.. स्कूल स्टूडेंट लड़की ने वीडियो जारी कर लगाया बिहार के मुख्यमंत्री पर आरोप । पटना के बोरिंग रोड में सभी लड़कीयों के साथ छेड़छाड़ होती है
बिहार के मुख्यमंत्री शर्म करो नहीं तो चुल्लू भर पानी में डूब के मर जाओ ।

image
37 w - Translate

हिंदुओं को जातियों में बांटकर मोदी ने वो काम किया जो मुगल औरंगजेब भी न कर सका, इसने हिंदू को हिंदू का दुश्मन बना दिया, इसने हिंदू समाज का जो नुकसान किया है कि स्कूल कॉलेज में अब हिंदू बच्चे जाति देखकर लड़ रहे है, यही है विकसित भारत।🇮🇳
#ugc_roll_back

image
37 w - Translate

दिल्ली में आयोजित AI सम्मिट (Apna Insult Summit) में हो रहे अव्यवस्था और ग्लोबल बेइज्जती पर अचानक लोगों का आँख खुला है ? भाई साहब, आप AI और अन्य टेक्नोलॉजिकल रिसर्च में देश को फ्रंट पे देखना चाहते हैं लेकिन आपको ये क्यों नहीं दिखता की हमारी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में इसके लिए क्या किया है।
चाइना अपने GDP का 2.7% यानि की 780 बिलियन US डॉलर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च करता है। अमेरिका अपने बजट का 3.6% R&D पे खर्च करता है। इजरायल अपने बजट का 5% सिर्फ R&D पे खर्च करता है। साउथ कोरिया (5%), जापान (3.3%), जर्मनी (3.1%), UK (2.9%), फ्रांस (2.2%) जैसे देश रिसर्च एंड डेवलपमेंट में इसलिए आगे हैं।
अब अपने देश का खर्च देखिए R&D के ऊपर...बजट का 0.6%, करीब 70 बिलियन डॉलर। चाइना और US के खर्च के दसवें हिस्से से भी कम। फिर आप चाहते हैं की हमारा देश भी बराबरी करे।
जिस देश में विश्वविद्यालयों में 30-35 साल तक पढ़ने वाले रिसर्च स्कॉलर्स पर तंज कसा जाता हो। जहाँ नेशनल रैंकिंग में टॉप पर रहने वाले JNU, जादवपुर, हैदराबाद जैसे यूनिवर्सिटीज को विलेनाइज किया जाता हो। जहाँ सरकारी नौकरी और UPSC को पब्लिक डिस्कोर्स में एस्पायर किया जाता हो। जहाँ शिक्षा मंत्री कौन है इसका कोई महत्व न रहे। जहाँ UGC जैसे संस्थानों का उपयोग सिर्फ ऊलजुलूल विवादों के लिए इस्तेमाल किया जाता हो। जिस देश का नेशनल यूनिवर्सिटी "व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी" बन गया हो। वो देश जब रिसर्च एंड डेवलपमेंट एक्सीलेंस में एसपेक्टेशन रखता है तो ये सिर्फ दोगलापन है।
आपको बता दें की इस बार दिल्ली के AI सम्मिट में बिहार से सातवीं पास मंत्री को भेजा गया है। पूरी दुनिया AI को भविष्य की तरह देख रही है, उसके लिए पॉलिसी बना रही है, AI आधारित स्टार्टअप एंड इकोसिस्टम डेवलप करने का कोशिश कर रही है, इन्वेस्टमेंट लाने की कोशिश कर रही है। वहीं बिहार हमेशा की तरह इसको भी फोटो सेशन के लिए ही इस्तेमाल कर रहा है। सातवीं पास आदमी जिसको टेक्नोलाॅजी का 'T' नहीं पता, इंटेलीजेंस नाम पे जीरो है वो AI सम्मिट में गया है। फिर आप सवाल उठाते हैं ? गजब करते हैं।
देशभर में कुकुरमुत्ते के तरह उगे प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज का हाल आपको पहले नहीं पता था ? फिर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के खबर पे आपको आश्चर्य क्यों हो रहा है।अब यूनिवर्सिटी बेचारी मैनेजमेंट प्रोग्राम के कम्युनिकेशन प्रोफेसर को AI वाले सम्मिट में भेजेगा तब तो यही होगा।

image