नए साल पर श्री दरबार साहिब में हुए नतमस्तक विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल
सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना की
#sridarbarsahib #amritsar #mla #kuldeepdhaliwal #punjab
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नए साल पर श्री दरबार साहिब में हुए नतमस्तक विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल
सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना की
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नए साल पर श्री दरबार साहिब में हुए नतमस्तक विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल
सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना की
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कैलाश विजयवर्गीय के तरफ जो टकला आदमी NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी से लड़ रहा था वो
इंदौर के उसी इलाके का पार्षद कमल वाघेला है जहां गंदा पानी पीने से दस लोगों की मौत हुई है.
टकला आदमी को देखकर NAYAK फ़िल्म का भानु का किरदार याद आ गया जिससे सौरभ शुक्ला ने निभाया था.
भानु भी CM के लिए कैमरा बंद कराता है, पत्रकारों को डांटता फटकारता है. अपने नेता के लड़ता है. भानु जैसे लोग हर छोटे बड़े नेता के इर्दगिर्द घूमते हुए मिलेंगे.
मोहल्लों में भानु लोगों का रुतबा किसी मंत्री से कब नही होता है.
कैलाश विजयवर्गीय के तरफ जो टकला आदमी NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी से लड़ रहा था वो
इंदौर के उसी इलाके का पार्षद कमल वाघेला है जहां गंदा पानी पीने से दस लोगों की मौत हुई है.
टकला आदमी को देखकर NAYAK फ़िल्म का भानु का किरदार याद आ गया जिससे सौरभ शुक्ला ने निभाया था.
भानु भी CM के लिए कैमरा बंद कराता है, पत्रकारों को डांटता फटकारता है. अपने नेता के लड़ता है. भानु जैसे लोग हर छोटे बड़े नेता के इर्दगिर्द घूमते हुए मिलेंगे.
मोहल्लों में भानु लोगों का रुतबा किसी मंत्री से कब नही होता है.
कैलाश विजयवर्गीय के तरफ जो टकला आदमी NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी से लड़ रहा था वो
इंदौर के उसी इलाके का पार्षद कमल वाघेला है जहां गंदा पानी पीने से दस लोगों की मौत हुई है.
टकला आदमी को देखकर NAYAK फ़िल्म का भानु का किरदार याद आ गया जिससे सौरभ शुक्ला ने निभाया था.
भानु भी CM के लिए कैमरा बंद कराता है, पत्रकारों को डांटता फटकारता है. अपने नेता के लड़ता है. भानु जैसे लोग हर छोटे बड़े नेता के इर्दगिर्द घूमते हुए मिलेंगे.
मोहल्लों में भानु लोगों का रुतबा किसी मंत्री से कब नही होता है.

ये है देश के तथाकथित सबसे "साफ शहर" के "गंदगी से सने" मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जिनके राज में अब तक जहरीले पानी से करीब 8 मौतें हो चुकी है और विजयवर्गीय के अनुसार ये "फोकट और घण्टा" सवाल है।
इस पूरे प्रकरण से कैलाश विजयवर्गीय की मानसिक और नैतिक स्थिती साफ हो चुकी है और उन्हें मंत्री रहने का अब कोई हक नही है,
हम चाहते है कि पीड़ित परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये मुआवजा मिले क्योंकि ये सरकारी हत्या है।
साथ ही इस पूरे मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच होना चाहिए और दोषी मंत्री, अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।