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संबंधों की गहराई का हुनर
दरख्तों से सीखो जड़ों में ज़ख्म
लगते हैं तो टहनियाँ सूख जाती हैं...
सुप्रभात दोस्तों

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.दिल भरा भरा सा है, ख़ुद में एक खालीपन..
अज़ीब सन्नाटा है, ना जाने क्या चाहे यह मन..
रोने को बहुत मन है, और रोना भी आता नहीं अब..
क्या हुए हालत के ख़ुद को ना समझे खुद का मन..

चलते जाना है ज़िंदगी और चलती ही जाएगी..
क्यूँ पहचान कर भी किसी को ना पहचानें यह मन..
ना खुशी का एहसास ना ग़मों का कोई दुख..
फिर किस दुविधा में है आज, मेरा यह मन.. !!

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आजकल के रिश्तें सूर्यमुखी के फुल जैसे होते है, जिधर ज्यादा फायदा मिले उधर घूम जाते है !!
सुप्रभात दोस्तों

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वो जो ज़ख्म
दिखाई नहीं देते
उन्हीं का दर्द आँखों में तैरता है
उसी के निशान
उसी की पीड़ा का बोझ
चेहरे पर उभर आते हैं जो उठाए न उठे आवाज़ में उतर आता है।
तो वो ही वज़न
आवाज़ में उतर आता है ।
सुप्रभात दोस्तों

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बेरोज़गारी एक ऐसा अभिशाप है जो इंसान को अपने भाई बहनों,
रिश्तेदारों, दोस्तों और शुभचिंतकों की औकात से रूबरू कराती है...❤️🌻
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यकीन कर तू बदल सकता है,
अपनी किस्मत की लकीरों को ।
लिखने वाले खुद ही लिखते हैं,
आजकल अपनी तकदीरों को
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एक दिन तुमसे टकराने तुम्हारा वर्षों का संघर्ष आएगा,
तुम उस दिन के आने तक अपना संघर्ष जारी रखना..❤️🌻

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