Descubrir Mensajes

Explore contenido cautivador y diversas perspectivas en nuestra página Descubrir. Descubra nuevas ideas y participe en conversaciones significativas

Decor Glance Cambio su foto de perfil
3 años

image
ruchawaikar Creó nuevo artículo
3 años - Traducciones

Insulin Market Size, Share, Key Players, Growth Trend, and Forecast, 2022–2028 | #insulin Market # Insulin Industry # Insulin Market size # Insulin Market share # Insulin Market trend # Insulin Market forecast

image

image
3 años - Traducciones

फिर से स्वयं ही सिद्ध किया

image
3 años - Traducciones

मनोज मुन्तज़िर .. भावनाओं में मत बहो
अपन लोग भी आज के ही लोग है ... हमें और हमारे पीछें के सभी पुर्वजों को और मेरे बच्चों को राम कथा को समझने के लिये ..तुम्हारे जैसे चवन्नी छाप हल्के लोगों की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है ।.......

image
3 años - Traducciones

इसमें गलत क्या है हरम की औलादों वो जब आपके पूजास्थल पे पूजा करने नही जाते वो आपके प्रसाद को नही खाते तो हम क्यों उनको पूजे???
वैसे भी मरे हुए की पूजा करना हमारे सनातन में निषिद्ध है।शमशान घाट से आने के बाद हमारे यहां लोग अशुद्ध हो जाते है फिर हम इन मुर्दों को पूजकर शुद्ध कैसे हो सकते है???

बहुत ही शर्मनाक कृत्य है
मजारों पे जाना पूजा करना।
जय बजरंगबली जय हनुमान जी।

image
ruchawaikar Creó nuevo artículo
3 años - Traducciones

Immunomodulators Market Revenue Analysis & Region and Country Forecast To 2032 | #immunomodulators Market # Immunomodulators Industry # Immunomodulators Market size # Immunomodulators Market share

3 años - Traducciones

भारत का इतिहास स्वर्णिम ही नहीं है। अत्याचारों, दुखों से भरा है।
1947 में भारतमें औसत आयु मात्र 34 वर्ष थी। आज कोई भी इस पर विश्वास नही कर सकता है।
लेकिन इन सभी दर्दनाक घटनाओं सबसे बड़ी घटना चुननी हो तो क्या होगी?
वह है नालंदा विश्वविद्यालय का बख्तियार खिलजी द्वारा जलाया जाना। यह विश्वविद्यालय था जिससे व्हेनसांग 10 हजार प्रतिलिपि बनाकर लेकर गया था। इसी के साथ विक्रमशिला जला दी गई।
भारत का सारा ज्ञान, विज्ञान, धर्म, चिकित्सा, ज्योतिष नष्ट हो गई। कुछ शास्त्र छिपाकर नेपाल ले गये। दक्षिण में बचे रहे।
इस तरह अपने धर्म को बचाने के लिये भारतीय पीढ़ी दर पीढ़ी कथानक को ले जाते। रामायण, महाभारत ऐसे ही आगे बढ़ाया गया। कुछ समय पूर्व तक बच्चे अपने माता पिता से ही रामायण, महाभारत सुनते थे।
भक्तिकाल में कवियों ने लोकस्रुतियो, अपने भक्ति, तप से नये ग्रन्थ रचे। जो समाज के लिये बड़े उपयोगी रहे।
1923 में गीताप्रेस कि स्थापना हुई थी। मैं उसके इतिहास पर नहीं जाता, वह कही भी मिल जायेगा।
गीताप्रेस ने पुस्तकों को ही प्रकाशित किया ऐसा नहीं है। नेपाल, दक्षिण भारत से पांडुलिपियो का खोजा। महाभारत कि मूलप्रतिया चार पाँच स्थानों पर मिली। उनको क्रम से जोड़ना, फिर इसी तरह उपनिषद को पूरे देश में खोजकर क्रमबद्ध किया।
इन सभी गर्न्थो को प्रकाशित करके, जनमानस तक पहुँचाया।
गीताप्रेस न होता तो संभव था कि हम जानते ही नहीं कि हमारे पूर्वजों ने इतना महान ग्रँथ रचे थे।
गीता प्रेस कि विश्वसनीयता इतनी अधिक है कि प्रकांड विद्वान भी कोड करता है कि यह गीताप्रेस से प्रकाशित पुस्तक है।
प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने हनुमान प्रसाद पोद्दार को भारत रत्न देने का प्रस्ताव गोविंदबलभ पंत से भेजा। लेकिन उन्होंने लेने से मना कर दिया।
2014 में गीताप्रेस ने जो आंकड़े जारी किये थे।
54 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित किया था।
12 करोड़ गीता,
11 करोड़ रामचरित मानस,
9 करोड़ रामायण, महाभारत,
2.5 करोड़ पुराण, उपनिषद
पत्रिका, चालीसा, कथानक आदि।
2.5 लाख प्रति प्रतिदिन प्रकाशित होती है।
ऐसा अप्रतिम उदाहरण मनुष्य के इतिहास में नहीं है।
गीताप्रेस हमारे लिये 'गीता' कि भांति ही आस्था है। तक्षशिला, नालंदा कि भांति आदरणीय है।
उसके सामने कोई भी पुरस्कार महत्वहीन है।

image
ruchawaikar Creó nuevo artículo
3 años - Traducciones

Histology and Cytology Market Revenue, Growth Factors, Trends, Key Companies, Forecast To 2032 | #histology and Cytology Market # Histology and Cytology Industry # Histology and Cytology Market size # Histology and Cytology Market share # Histology and Cytology Market trend # Histology and Cytology Market forecast