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मंगल कर्ता, विघ्न हर्ता भगवान श्री गणेश सबके जीवन में मंगल करें , विघ्न हरें ।

गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 🙏🚩

विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता भगवान गणपति सृजनात्मक कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
कोई भी नया काम शुरू करने से पहले गणेश जी की आराधना से आगे आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। 🙏🚩

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90 का #दूरदर्शन और हम :
1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना
2."#रंगोली\"में शुरू में पुराने फिर
नए गानों का इंतज़ार करना
3."#जंगल-बुक"देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना
4."#चंद्रकांता\"की कास्टिंग से ले कर
अंत तक देखना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को
#फिल्मों का इंतजार करना
7.किसी नेता के मरने पर कोई #सीरियल
ना आए तो उस नेता को और गालियाँ
देना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना
9."#मूक-#बधिर\"समाचार में टीवी एंकर
के इशारों की नक़ल करना
10.कभी हवा से #ऐन्टेना घूम जाये तो
छत पर जा कर ठीक करना
बचपन वाला वो '#रविवार\' अब नहीं
आता, दोस्त पर अब वो प्यार नहीं
आता।
जब वो कहता था तो निकल पड़ते
थे बिना #घडी देखे,
अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।
बचपन वाला वो '#रविवार\' अब नहीं
आता...।।।
वो #साईकिल अब भी मुझे बहुत याद
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता...।।।
#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता...।।।
वो '#मोगली\' वो '#अंकल Scrooz',
'#ये जो है जिंदगी' '#सुरभि\' '#रंगोली\'
और '#चित्रहार\' अब नहीं आता...।।।
#रामायण, #महाभारत, #चाणक्य का वो
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
'रविवार' अब नहीं आता...।।।
वो #एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस
लगाना!
अब हर वार 'सोमवार' है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है। दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं
आता...।।।
बचपन वाला वो '#रविवार\' अब नही
आता...।।।
🙂🙏

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सन् 1840 में काबुल में युद्ध में 8000 पठान मिलकर भी
1200 राजपूतो का मुकाबला 1 घंटे भी नही कर पाये।
वही इतिहासकारो का कहना था की चित्तोड की तीसरी लड़ाई जो 8000 राजपूतो और 60000 मुगलो के मध्य हुयी थी , वहा अगर राजपूत 15000 होते तो अकबर भी जिंदा बचकर नहीं जाता।
"इस युद्ध में 48000 सैनिक मारे गए थे जिसमे 8000
राजपूत और 40000 मुग़ल थे वही 10000 के करीब
घायल थे"।
और दूसरी तरफ गिररी सुमेल की लड़ाई में 15000 राजपूत, 80000 तुर्को से लडे थे, इस पर घबराकर शेर शाह सूरी ने कहा था "मुट्टी भर बाजरे (मारवाड़) की खातिर हिन्दुस्तान की सल्लनत खो बैठता "।
उस युद्ध से पहले जोधपुर महाराजा मालदेव जी नहीं गए
होते तो शेर शाह ये बोलने के लिए जीवित भी नही रहता।
इस देश के इतिहासकारो ने और स्कूल कॉलेजो की किताबो मे आजतक सिर्फ वो ही लडाई पढाई जाती है, जिसमे हम कमजोर रहे। वरना बप्पा रावल और राणा सांगा जैसे योद्धाओ का नाम तक सुनकर मुगल की औरतो के गर्भ गिर जाया करते थे।
रावत रत्न सिंह चुंडावत की रानी हाडा का त्यागपढाया नही गया, जिन्होने अपना सिर काटकर दे दिया था।
पाली के आउवा के ठाकुर खुशहाल सिंह को नही पढाया जाता, जिन्होंने एक अंग्रेज के अफसर का सिर काटकर किले पर लटका दिया था।
जिसकी याद मे आज भी वहां पर मेला लगता है। दिलीप सिंह जूदेव जी के बारे मे नही पढ़ाया जाता, जिनके कारण एक लाख आदिवासियों ने फिर से सनातन धर्म अपनाया था।
महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर
महाराणा प्रताप सिंह
महाराजा रामशाह सिंह तोमर
वीर राजे शिवाजी
राजा विक्रमाद्तिया
वीर पृथ्वीराजसिंह चौहान
हमीर देव चौहान
भंजिदल जडेजा
राव चंद्रसेन
वीरमदेव मेड़ता
बाप्पा रावल
नागभट प्रतिहार(पढियार)
मिहिरभोज प्रतिहार(पढियार)
राणा सांगा
राणा कुम्भा
रानी दुर्गावती
रानी पद्मनी
रानी कर्मावती
भक्तिमति मीरा मेड़तनी
वीर जयमल मेड़तिया
कुँवर शालिवाहन सिंह तोमर
वीर छत्रशाल बुंदेला
दुर्गादास राठौर
कुँवर बलभद्र सिंह तोमर
मालदेव राठौर
बाबू वीर कुँवर सिंह
महाराणा राजसिंह
विरमदेव सोनिगरा
राजा भोज
राजा हर्षवर्धन बैस
बन्दा सिंह बहादुर
राऊ बज्जर सिंह राठौड़
इन जैसे महान योद्धाओं को नही पढ़ाया/बताया जाता है, जिनके नाम के स्मरण मात्र से ही शत्रुओं के शरीर में आज भी कंपकंपी शुरू हो जाती है। जय हिंदुस्तान के स्वर्णिम सनातन वीर।🏹🚩

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