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4 जून 1818 को तीसरे एंगलो-मराठा युद्ध में अंग्रेज़ो के विरुद्ध मराठो की हार के साथ ही मराठा साम्राज्य का भी अधिकारिक रूप से अंत हो गया था
2 june 1818 को Malcom बाजी राव के बीच खेरी नामक जगह पर बात चीत हुई थी यहां Malcom ने बाजीराव को आश्वस्त किया था की उन्हे अंग्रेज सरकार की और से आठ लाख रुपिये सालान पेंशन दी जाएगी लेकिन उन्हे पेशवा टाईटल नहीं दिया जाएगा साथ ही यह भी तय हुआ की उत्तर भारत में अंग्रेज़ सरकार द्वारा स्वीकृत किसी भी जगह पर अपना बाकी जीवन गुज़ार सकते है साथ ही उन्हे अपना श्रीमंत का टाईटल सरेंडर करना होगा।
वह सिर्फ अपने नाम के साथ महाराज ही लिख सकेंगे और उन्हे अपनी ज़मीन जायदाद से संबंधित सारे दावे छोड़ना होंगे
कुछ समय सोच विचार और झिझक के बाद आखिर 4 जून को बाजीराव ने इस संधी पत्र पर हस्ताक्षर कर दिये और इस तरह मराठा साम्राज्य का अंत हुआ।