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केरल राज्य मे एक बहुत ही सुन्दर और प्रशंसनीय परम्परा है।
और यह परम्परा 15,000 साल से भी अधिक पुरानी है..!!
जिस परम्परा के अनुसार जब एक कन्या अपने माह्वारी (महिनावारी) कि शुरुवात को प्राप्त करती है तो परंपरागत रुप से उनकी पूजा की जाती है
और उन्हें एक नारी होने के सम्मानीय उपाधि से सम्मानित की जाती है।
हर वह बेटी धन्य है जो हिन्दू धर्म मे जन्मी है क्योंकि हम नारी काे देवी की दर्जा देकर पूजते हैं।
सत्य सनातन
केरल राज्य मे एक बहुत ही सुन्दर और प्रशंसनीय परम्परा है।
और यह परम्परा 15,000 साल से भी अधिक पुरानी है..!!
जिस परम्परा के अनुसार जब एक कन्या अपने माह्वारी (महिनावारी) कि शुरुवात को प्राप्त करती है तो परंपरागत रुप से उनकी पूजा की जाती है
और उन्हें एक नारी होने के सम्मानीय उपाधि से सम्मानित की जाती है।
हर वह बेटी धन्य है जो हिन्दू धर्म मे जन्मी है क्योंकि हम नारी काे देवी की दर्जा देकर पूजते हैं।
सत्य सनातन
केरल राज्य मे एक बहुत ही सुन्दर और प्रशंसनीय परम्परा है।
और यह परम्परा 15,000 साल से भी अधिक पुरानी है..!!
जिस परम्परा के अनुसार जब एक कन्या अपने माह्वारी (महिनावारी) कि शुरुवात को प्राप्त करती है तो परंपरागत रुप से उनकी पूजा की जाती है
और उन्हें एक नारी होने के सम्मानीय उपाधि से सम्मानित की जाती है।
हर वह बेटी धन्य है जो हिन्दू धर्म मे जन्मी है क्योंकि हम नारी काे देवी की दर्जा देकर पूजते हैं।
सत्य सनातन
