#kolkata से #thailand वाया रोड ! आपको यकीन नहीं होगा कि 70% यह रोड बन भी चुका है।1400 किलोमीटर लंबा यह हाइवे भारत-म्यंमार-थाईलैंड को जोड़ेगा।कोलकाता से सिलगुड़ी-कूचबिहार होते हुए बंगाल के श्रीरामपुर से यह रोड आसाम में प्रवेश करेगा वहां से दीमापुर ओर नागालैंड होते हुए मणिपुर की राजधानी इम्फाल पहुंचेगा।फिर मणिपुर-म्यंमार बॉर्डर मोरेह से यह म्यंमार को जोड़ेगा।म्यंमार के शहरों बागो-यांगून से होते हुए यह थाईलैंड पहुंचेगा।सोचिए आप अपनी गाड़ी य बाइकर अपनी बाइक से तीन कन्ट्रीज घूम लेंगे बिना हवाई सफर किए।ज्यादा से ज्यादा 1400 किलोमीटर के 20 से 25 घँटे लगेंगे पर लांग ड्राइव के शौकीनों के लिए तो यह सफर रोमांच से भरपूर होगा।इस रोड को बनाने का असली मकसद नार्थ ईस्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के साथ भारतीय माल को सड़क मार्ग से वाकी एशियाई देशों तक पहुंचाना है ताकि चीन को टक्कर दी जा सके क्योंकि चायनीज़ माल से एशिया के वाकी देशों की मार्किट भरी पड़ी है।तो चलते हैं न थोड़े इंतज़ार के बाद।

image
Lee’s Moving Company غير صورة الغلاف الخاص به
3 سنوات

image
wzywzy202212 إنشاء مقالة جديدة
3 سنوات - ترجم

www.nbhyjewelry.com | #http://www.nbhyjewelry.com/

Lee’s Moving Company غير صورته الشخصية
3 سنوات

image

ईश्वरचंद्र विद्यासागर अपने मित्र गिरीशचंद्र विद्यारत्न के साथ बंगाल के कालना गांव जा रहे थे। दोनों मित्र बात करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी मार्ग में उनकी दृष्टि लेटे हुए एक मजदूर पर पड़ी।
उसे हैजा हो गया था। वह बड़ी तकलीफ में था। बुरी तरह कराह रहा था। उसकी भारी गठरी एक ओर लुढ़की पड़ी थी। उसके मैले कपड़ों से बदबू आ रही थी।
लोग उसकी ओर से मुंह फेरकर वहां से तेजी से निकल जा रहे थे। कोई भी उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आ रहा था। बेचारा मजदूर उठने में भी असमर्थ था।
यह दृश्य देखकर संवेदनशील और दयालु ईश्वरचंद्र विद्यासागर बोले ‘आज हमारा सौभाग्य है।’ मित्र गिरीशचंद्र विद्यारत्न ने पूछा, ‘कैसा सौभाग्य?’
विद्यासागर ने कहा, ‘किसी दीन-दुखी की सेवा का अवसर प्राप्त हो, इससे बढ़कर सौभाग्य क्या होगा। यह बेचारा यहां मार्ग में पड़ा है। इसका कोई स्वजन समीप होता तो क्या इसको इसी प्रकार पड़े रहने देता? हम दोनों इस समय इसके स्वजन बन सकते हैं।
हमें इसकी सहायता करनी चाहिए।’ हैजे जैसे रोग में स्वजन भी दूर भागते हैं। ऐसे में एक दरिद्र, मैले-कुचले दीन मजदूर का उस समय स्वजन बनना सामान्य बात नहीं थी।
पर ईश्वरचंद्र विद्यासागर तो थे ही दया के सागर। उनके मित्र विद्यारत्न भी उनसे पीछे कैसे रहते। विद्यासागर ने उस मजदूर को पीठ पर लादा और विद्यारत्न ने उसकी भारी गठरी सिर पर उठाई। दोनों भारी वजन लादे कालना पहुंचे।
उन्होंने मजदूर के लिए रहने की व्यवस्था की। एक वैद्यजी को चिकित्सा के लिए बुलाया। दोनों ने पूरी तन्मयता से उस बीमार मजदूर की सेवा की।
जब मजदूर दो-तीन दिन में उठने-बैठने लायक हो गया, तब कुछ पैसे देकर उसे वहां से विदा किया। मजदूर ने तो दोनों का धन्यवाद किया ही, लेकिन जिसने भी यह दृश्य देखा उसने उन दोनों की इंसानियत और सेवा भावना की प्रशंसा की।

image

wzywzy202212 إنشاء مقالة جديدة
3 سنوات - ترجم

RE205D engine Valve for sale | #http://www.moyadapower.com/

कच्छ के महाराव खेंगार जी तृतीय जाडेजा द्वारा बनवाया गया - विजय विलास पैलेस (कच्छ - गुजरात) चंद्रवंशी क्षत्रिय खंगार राजपूत

image

image
wzywzy202212 إنشاء مقالة جديدة
3 سنوات - ترجم

3D Full Body Massage Chair OEM | #http://www.massagechair-china.com/