akshay567 created a new article
3 yrs - Translate

Global Ligation Devices Market is expected to surpass US$ 1681.2 million by 2028 at a 6.2% CAGR | #global Ligation Devices Market Growth Drivers # Global Ligation Devices Market Forecast

akshay567 created a new article
3 yrs - Translate

Infection Control Market is likely to register CAGR of 3.5% through 2028 | #infection Control Market Growth Drivers # Infection Control Market Forecast]

akshay567 created a new article
3 yrs - Translate

Microcatheters Market is likely to register CAGR of 5.5% through 2028 | #microcatheters Market Growth Drivers # Microcatheters Market Forecast

3 yrs - Translate

अनिल मामा को सगाई होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
माँ लटियाल माता का आशीर्वाद सदैव बना रहे

image
akshay567 changed his profile picture
3 yrs

image
3 yrs - Translate

मैं प्रबल तेज सा खड़ा रहा,जनमत के बल पर अड़ा रहा।
आँधियों का भान था मुझे,तूफान वेगमय बहता रहा ।।

image

image
3 yrs - Translate

...क्योंकि उन्होंने देशभक्ति का....समाज-प्रेम का....सेवा का संस्कार पाया है।

image

image
3 yrs - Translate

स्वधर्मे निधनं श्रेयः
परधर्मो भयावह।
"मतांतरण से राष्ट्रांतरण" कितना खतरनाक होता है, इसकी एक बानगी देखिए :--
ग्वालियर, मध्य प्रदेश की रहने वाली सरोज देवी एक 'हिंदू' महिला थीं।
आपने बहुत मोटा पैसा खर्च करके अपने बेटे धीरेंद्र प्रताप सिंह को स्थानीय 'कॉन्वेंट स्कूल' में शिक्षा प्रदान करवाई थी, लेकिन इसके साथ ही सरोज देवी अपने बेटे को उसकी संस्कृति और सनातन धर्म की बुनियादी शिक्षा तक प्रदान नहीं करवा सकी।
जिसका कालांतर में यह परिणाम हुआ कि उनका कॉन्वेन्ट शिक्षित बेटा "ईसाई" बन गया!
अभी कुछ दिनों पहले जब सरोज देवी का स्वर्गवास हुआ तो उनके ईसाई बेटे धीरेंद्र प्रताप सिंह ने उनका अंतिम संस्कार करने से साफ़ मना कर दिया।
समाज के वरिष्ठजनों ने धीरेंद्र को लाख समझाया, लेकिन वह अपनी मां को मुखाग्नि देने के लिए तैयार नहीं हुआ।
उसके बाद सरोज देवी की नातिन श्वेता सुमन, जो कि ग्वालियर से 1,100 किलोमीटर दूर झारखंड में रहती थी, उसने वहां से आकर सरोज देवी का अंतिम संस्कार संपन्न किया।
दरअसल इसके पीछे की असली वजह यह है कि मतांतरित होने वाले व्यक्ति का ऐसा ब्रेन-वाश किया जाता है कि वह व्यक्ति अपने निकटतम परिवारीजनों, रिश्तेदारों, मित्रों, समाज और यहां तक कि "राष्ट्रीय-हितों से भी विमुख" हो जाता है।
उसकी निष्ठाएं उसके मूल राष्ट्र से हटकर उस मत के जनक राष्ट्र के साथ जुड़ जाती हैं, जिस मत को वह धारण करता है।
यही कारण है कि स्वामी विवेकानंद एवं स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने कहा था कि मतांतरण होते ही व्यक्ति का राष्ट्रांतरण हो जाता है।

image